12 दिन बाद अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह फिर से…प्रियंका चतुर्वेदी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना-Video

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Attari Wagah Beating Retreat Ceremony: पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाए जाने और फिर पाकिस्तान द्वारा भारत के शहरों को निशाना बनाने के कारण करीब 12 दिन तक भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के अटारी वाघा सीमा पर ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह बंद था जिसे आज यानी 20 मई से फिर शुरू कर दिया गया है लेकिन अब इस समारोह का आकार पहले से छोटा दिखाई देगा क्योंकि पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में आई कड़वाहट के कारण अब बीएसएफ के जवान पाकिस्तान रेंजर्स से हाथ नहीं मिलाएंगे और न ही ध्वज उतारने की प्रक्रिया के दौरान गेट खोले जाएंगे.

इसको लेकर सोमवार यानी 19 मई को बीएसएफ अधिकारियों ने बताया था कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पंजाब स्थित तीनों सीमा चौकियों (अटारी-वाघा अमृतसर), (हुसैनवाला फिरोजपुर) और सादकी फाजिल्का पर बीटिंग रिट्रीट समारोह मंगलवार (20 मई) से फिर से शुरू होने जा रहा है.

बंद था आम लोगों के लिए प्रवेश

बीएसएसफ के अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी कि 8 मई से बीएसएफ के जवान हर दिन ध्वज उतार रहे थे, लेकिन केवल आम लोगों के लिए प्रवेश बंद किया गया था. बता दें कि बीएसएफ ने 8 मई को “सार्वजनिक सुरक्षा” के मद्देनजर इन तीन स्थानों पर आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी.

बीएसएफ के अधिकारियों की मानें तो बीटिंग रिट्रीट समारोह को बंद किए जाने का फैसला भारत द्वारा 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के खिलाफ जवाबी सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के एक दिन बाद लिया गया था.

इनको मिली बड़ी राहत

माना जा रहा है कि बीएसएफ द्वारा बीटिंग रिट्रीट फिर से शुरू करने की घोषणा होने के बाद अटारी वाघा सीमा के निकट गांव में रहने वालों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि इनकी आजीविका बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों और व्यापार पर निर्भर थी.

सांसद ने पूछा ये सवाल

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के फिर से शुरू होने को लेकर सोशल मीडिया पर सोशल मीडिया यूजर्स सवाल खड़े कर रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के रिश्ते भारत को नहीं रखना चाहिए तो इसी बीच शिवसेना यूबीटी की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार के इस फैसले पर निशाना साधा है और एक्स पोस्ट में इस पर डिटेल में कोई प्रतिक्रिया न देते हुए इतना पूछा है कि व्हाई बीटिंग रिट्रीट? राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा सवाल उठाना ही आपने आप में बड़ी बात है. उनके पूछने का मतलब है कि बीटिंग रिट्रीट समारोह फिर से शुरू क्यों होने जा रहा है? आखिर इसका क्या औचित्य है?

1959 से होता आ रहा है ये सैन्य समारोह

बता दें कि बीटिंग रिट्रीट अमृतसर के पास दोनों देशों की सीमा पर 1959 से होने वाला एक अनूठा और उत्साहपूर्ण सैन्य समारोह है. इस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज उतारने की भी प्रक्रिया शामिल रहती थी और दोनों देशों के जवानों का प्रदर्शन होता था. सामान्य दिनों में विदेशी नागरिकों सहित सैकड़ों दर्शक इस समारोह को देखने के लिए बार्डर पर पहुंचते रहे हैं.

आमतौर पर 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के साथ ही दीवाली और ईद जैसे विशेष अवसरों पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को देखने के लिए करीब 25 हजार से अधिक दर्शक पहुंचते रहे हैं. ईद-दीवाली के मौके पर मिठाई का भी आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच होता रहा है. अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट अमृतसर से लगभग 30 किमी और पाकिस्तान के लाहौर से 22 किमी दूर है. यहां पर बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने आते हैं।

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