Gandhi Jayanti: बापू की जिंदगी की 3 महिलाएं… जानें कैसे थे उनके रिलेशन?

October 2, 2025 by No Comments

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Gandhi Jayanti: आज पूरा देश गांधी जयंती मना रहा है. इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ी तमाम जानकारियां सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. बता दें कि भारत में हर साल 2 अक्टूबर के दिन महात्मा गांधी के जन्म दिवस को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है. भारत में लोग प्यार से उनको बापू भी बुलाया जाता है. वह सत्य और अहिंसा के सिद्धांत पर हमेशा कायम रहे और इसीलिए वह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं.

बापू के जीवन में ऐसे कई लोग आए, जिन्होंने उन्हें गांधी (मोहन दास करमचंद गांधी) से महात्मा गांधी बनने तक के सफर में उनका पूरा सहयोग किया और हमेशा उनके साथ खड़े रहे. यही नहीं सत्य और अहिंसा के मार्ग पर भी उनके साथ चले और उनका साथ दिया. ये बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि महात्मा गांधी के जीवन में तीन महिलाएं आई और उनके जीवन में अहम भूमिका निभाई. तो आइए इस लेख में जानते हैं उन तीनों के बारे में…

महिलाओं को लेकर कैसे थे गांधी जी के विचार

बता दें कि महिलाओं को लेकर गांधी जी काफी संवेदना रखते थे. यही वजह रही कि उनके जीवन में आई सभी महिलाओं से उनके संबंध काफी अच्छे और मधुर रहे. आभाबेन, मीराबेन, कस्तूरबा, सुशीला नायर, अमृतकौर के साथ ही मीराबेन बनी मैडलिन, भारत कोकिला सरोजिनी नायडू और कस्तूरबा गांधी का गांधी जी के जीवन में महत्व अधिक महत्व रहा लेकिन इनमें से मैडलिन, सरोजिनी नायडू औऱ कस्तूरबा गांधी का रोल अहम रहा.

कस्तूरबा गांधी

गांधीजी की पत्नी के रूप में कस्तूरबा गांधी को भला कौन नहीं जानता. वह हमेशा ही उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं. कस्तूरबा गांधी का उनके जीवन में बेहद अहम योगदान रहा. इतिहासकार कहते हैं कि वह उनकी जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि उनके जीवन में ऐसी पहली महिला थीं, जिन्होंने शुरुआत से उनका साथ निभाया और हर छोटे-बड़े आंदोलन में उनके साथ रहीं. गांधीजी का विवाह बहुत ही कम उम्र में हो गया था. इसके बाद वह पढ़ने के लिए विदेश चले गए. गांधी के विचारों को महिलाओं तक पहुंचाने के लिए और महिलाओं को आंदोलन से जोड़ने के लिए भी कस्तूरबा गांधी का अहम रोल रहा. माना जाता है कि कस्तूरबा के साथ की वजह से ही गांधी के हर आंदोलन सफल होते थे क्योंकि कस्तूरबा की वजह से गांधी को आधी आबादी का पूरा सपोर्ट मिलता था.

सरोजिनी नायडू

बता दें कि महात्मा गांधी के जीवन में नेहरू और पटेल जैसे दोस्त भी बने लेकिन भारत की स्वर कोकिला सरोजिनी नायडू का महात्मा गांधी के जीवन में एक अलग रोल रहा. वह उनकी अच्छी मित्र थीं. दोनों का सेंस ऑफ ह्यूमर एक-दूसरे के हिसाब से बिल्कुल मिलता-जुलता था. गांधीजी से सरोजिनी सबसे पहली बार इंग्लैंड में मिली थीं और तब उनको गांधी जी सबसे अनोखे इंसान लगे थे और वह देखते ही हंसने लगी थीं. इस पर गांधी जी भी मुस्कुरा दिए थे. फिर इसी के साथ ही दोनों में मित्रता शुरू हो गई थी. जानकार बताते हैं कि तब सरोजिनी नायडू ने महात्मा का नाम मिकी माउस रख दिया था और गांधीजी उन्हें प्यार से डियर बुलबुल या डियर मीराबाई कहकर बुलाते थे. फिर करीब 30 सालों तक दोनों एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में देश के लिए कार्य करते रहे.

मैडलिन स्लेड?

मैडलिन स्लेड का जन्म 1892 में इंग्लैंड के एक सम्भ्रांत परिवार में हुआ. इस ब्रिटिश मैम की मुलाकात साल 1923 में गांधीजी की बायोग्राफी लिखने वाले फ्रांसीसी लेखक से हुई. उन्होंने मैडलिन को गांधी जी के बारे में बताया जिसे सुनकर मैडलिन इतनी प्रभावित हुईं कि उनसे मिलने की ठान ली. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन गांधी के आश्रम में रहकर उनकी सहयोगी के रूप में बिताने का मन बना लिया. इस तरह के विचार लेकर वह 1925 में अहमदाबाद पहुंचीं जहां गांधी जी को देखते ही मैडलिन उनके सामने झुककर बैठ गईं. इस पर गांधी जी ने उन्हें उठाया और कहा कि तुम मेरी बेटी की तरह हो और इसी के बाद से दोनों में पिता पुत्री जैसे संबंध बन गए. फिर गांधी जी ने उन्हें मीराबेन नाम दिया और तभी से भारत की आजादी में मीराबेन ने बापू का लगातार साथ दिया और हर आंदोलन में शामिल रहीं.

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