गलियों में लड़कों के साथ खेलती थीं क्रिकेट और अब रचा इतिहास…भारतीय महिला क्रिकेट को विश्व विजेता बनाने वाली खिलाड़ी बेटियों की पढ़ें अनोखी कहानी-Video

November 3, 2025 by No Comments

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Womens World Cup-2025: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने कल नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका महिला क्रिकेट टीम को हराकर इतिहास रच दिया है. यही नहीं भारतीय महिला क्रिकेट जगत में एक नए युग की शुरुआत भी कर दी है.

यह जीत कई मायनों में खास कही जा सकती है क्योंकि टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर अब महिला विश्व कप जीतने वाली सबसे उम्रदराज कप्तान बन गईं, तो दूसरी ओर युवा सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने सबसे कम उम्र में विश्व कप फाइनल या सेमीफाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने का कीर्तिमान हासिल कर लिया है.

यहां यह कहना जरा भी अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अगर 1983 में कपिल देव की टीम ने पुरुष क्रिकेट को पहचान दी थी, तो 2025 की इन बेटियों ने महिला क्रिकेट को गौरव का नया अध्याय दिया है.

पूरे देश ही दुनिया भर में भारत की विश्व कप विजेता बेटियों के हौसलों की चर्चा जोरों पर हो रही है. इस सफलता की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इस टीम में अनुभव के साथ-साथ नई ऊर्जा, साहस और निडरता का अद्भुत संगम देखने को मिला. जेमिमा रॉड्रिग्स, शेफाली वर्मा, ऋचा घोष, श्री चरणी, अमनजोत कौर और क्रांति गौड़…

बेटियों ने पूरे देश की बेटियों को अपने संघर्ष, प्रतिभा और जुनून से नया संदेश दिया है और ये भी साबित कर दिया है कि अगर बेटियां चाहें तो क्या नहीं कर सकतीं. साथ ही इन बेटियों ने अपने साहस से भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. इस क्रिकेट मैच में खास बात ये भी है कि भारतीय महिला टीम ने पहली बार आईसीसी विश्व कप को अपने नाम किया है. तो आइए जानते हैं अपनी होनहार बेटियों के बारे में जिन्होंने देश को ये गर्व के पल महसूस करने का मौका दिया…

गीत लिखने वाली जेमिमा रॉड्रिग्स

क्रिकेट की दुनिया में अपने खेल के अंदाज से तहलका मचाने वाली मुंबई की जेमिमा रॉड्रिग्स बचपन से क्रिकेट में नहीं बल्कि संगीत में अधिक रुचि रखती थीं. बचपन से ही गिटार बजाने और गीत लिखने वाली जेमिमा को धीरे-धीरे क्रिकेट से प्यार हुआ और फिर मैदान पर अपने क्लास और टाइमिंग के लिए जाने जानी लगीं. उनका भी सफर बहुत आसान नहीं था. 2022 में उनको खराब फॉर्म के लिए टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नए सिरे से मेहनत शुरू की. नतीजतन 2025 विश्व कप में उन्होंने अपने बल्ले से भारत को कई मुश्किल स्थितियों से निकाला और आज वही फिनिशर बन गईं जिसने भारत को पहली बार विश्व चैंपियन बना दिया.

अमनजोत कौर को दी गई थी खेल छोड़ने की सलाह

पंजाब की अमनजोत कौर के घर की आर्थिक स्थित बहुत कमजोर थी. शुरुआत में खेल छोड़ने की सलाह तक उनको दी गई थी लेकिन अमनजोत ने अपनी मां के सपनों को ताकत बनाया और लगातार मेहनत करती रहीं. नतीजतन इस विश्व कप में उनकी शांत बल्लेबाजी देखने को मिली और टीम के प्रति समर्पण ने भारत को संतुलन दिया व भारत विश्व विजेता बनकर उभरा. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें टीम की जीत पर अमनजोत कौर के पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और वह अपने आंसू पोछते हुए दिख रहे हैं.

शेफाली वर्मा: नहीं आसान था क्रिकेट खेलना

हरियाणा के रोहतक की रहने वाली 21 वर्षीय शेफाली वर्मा ने अपने खेल से भारतीय क्रिकेट में एक अलग पहचान बना ली है वो भी बहुत की कम समय में. वह ऐसी जगह से हैं जहां पर लड़कियों का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था लेकिन उनके पिता संजीव वर्मा अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए बेटों जैसा हर मौका दिया तो वहीं शेफाली मोहल्ले के लड़कों के साथ गलियों में ही क्रिकेट खेलती थी और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से लड़कों को भी हरा देती थीं. मात्र 15 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया और आज वह विश्व कप की प्लेयर ऑफ द फाइनल हैं. शेफाली ने ये दुनिया को दिखा दिया कि अगर सच्चा जुनून मन में है तो फिर कोई रास्ता कठिन नहीं.

बंगाल के छोटे शहर की ऋचा घोष

महिला क्रिकेट में पावर हिटिंग का मतलब क्या होता है, इसे 21 साल की ऋचा घोष ने दिखाया. बंगाल के छोटे से शहर सिलिगुड़ी की ऋचा को बचपन में अपने पिता की कोचिंग में क्रिकेट सीखने का मौका मिला. विश्व कप के फाइनल में ऋचा ने डेथ ओवर्स में जो निडर बल्लेबाजी की, उसने भारत को जीत की राह पर ला दिया. उनका सपना था कि लोग महिला क्रिकेट में भी ‘सिक्सर क्वीन’ की बात करें और उन्होंने अपनी मेहनत से खुद को इसके लिए साबित भी कर दिया. ऋचा ने खिताबी मुकाबले में 24 गेंदों पर तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 34 रन बनाने के बाद आउट हुईं. इस तरह से वह महिला विश्व कप के एक संस्करण में सर्वाधिक छक्के लगाने वाली भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं.

इंदौर की गलियों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने वाली क्रांति गौड़

मध्य प्रदेश की क्रांति गौड़ भी गलियों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर बड़ी हुईं. इंदौर की गलियां आज भी उनके खेल की गवाह हैं. परिवार की सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा और हर परिस्थियों से लड़ते हुए वह आगे बढ़ीं और आज नया इतिहास रचा. क्रांति अपनी तेज गेंदबाजी और जोश के लिए जानी जाती हैं. मैदान में उतरते ही विरोधी टीम के होश उड़ा देती हैं. वह इस टीम की ‘स्पार्क प्लेयर’ मानी जाती हैं. क्रांति का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि ‘मुझे याद है जब मेरे पास जूते तक नहीं थे, तब पापा ने अपने जूते काटकर मुझे दिए थे. आज मैं मैदान में हर विकेट उन्हीं के लिए लेती हूं.’

फिरकी से कमाल करने वाली श्री चरणी

आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से आने वाली युवा स्पिन गेंदबाज श्री चरणी कभी बैडमिंटन खेला करती थीं. उनका जीवन भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. मां ने उनको क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया. इस तरह से उन्होंने भारतीय क्रिकेट में एंट्री ली और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद दिल्ली कैपिटल्स से WPL में डेब्यू किया. फिर कुछ ही महीनों में टीम इंडिया में जगह भी बना ली. 2025 महिला विश्व कप फाइनल में वे भारतीय गेंदबाजी की नई उम्मीद बनकर उभरी हैं. उनकी फिरकी विरोधी टीम को खूब नचाती है तो उनका शांत स्वभाव और सटीक लाइन-लेंथ से खेल को नई दिशा मिलती है.

Harmanpreet Kaur

परिवार के साथ कप्तान हरमनप्रीत कौर

सबसे सीनियर कप्तान बनीं बेटी हरमनप्रीत कौर

यह मैंच इसलिए भी भारत के लिए खास रहा क्योंकि क्रिकेट के मैदान में उतरीं हमारी सभी बेटियों ने इतिहास रचा. 36 साल 239 दिन की उम्र में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपने अनुभव, समझदारी और शानदार कप्तानी से टीम को विश्व विजेता बना दिया. मालूम हो कि सेमीफाइनल मुकाबले में हरमनप्रीत कौर ने जेमिमा रॉड्रिक्स के साथ 167 रन की साझेदारी की थी और इस दौरान हरमनप्रीत ने पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार 89 रन भी बनाए थे जिससे भारत फाइनल में पहुंचा.

आलराउंडर दीप्ति शर्मा

दीप्ति शर्मा ने ओवरों में रन रोककर टीम को जीत की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने ऑलराउंडर की तरह खेला और अहम मौकों पर विकेट भी झटके. फाइनल में उन्होंने पांच विकेट लिए और अपनी शानदार गेंदबाजी के चलते मौजूदा विश्व कम में वह सबसे अधिक विकेट चटकाने वाली गेंदबाज बनीं.

स्मृति मंधाना

स्मृति भारत के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं. उनकी बल्लेबाजी के सामने विरोधी टीम का गेंदबाज नहीं टिक पाता. उनकी टाइमिंग और कवर ड्राइव ने सबका दिल जीत लिया है.

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