दृष्टिबाधित और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शकुन्तला विवि में किए जा रहे ये काम…छह शोधार्थियों की पीएचडी थीसिस को मंजूरी

March 19, 2026 by No Comments

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Dr. Shakuntala Mishra National Rehabilitation University News: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों के छह शोधार्थियों की पीएचडी थीसिस को स्वीकृति दे दी गई है। विवि प्रवक्ता प्रो यशवंत वीरोदय ने मीडियो का जानकारी दी कि शिक्षा, अंग्रेजी, भौतिकी और वाणिज्य संकाय से जुड़े शोधार्थियों रेनू ओझा, हरि लाल कोरी, शिवम श्रीवास्तव, प्राची सिंह, आशीष कुमार गुप्ता और इना मौर्या को पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) डिग्री के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया है।

इस संबंध में कुलसचिव रोहित सिंह की ओर से मीडिया को जानकारी दी गई. बताया गया कि भौतिकी के शोधार्थी शिवम श्रीवास्तव और प्राची सिंह ने मटेरियल साइंस और नैनो टेक्नोलॉजी से जुड़े जटिल पहलुओं पर शोध किया है तो वहीं शिक्षा संकाय की शोधार्थी रेणु ओझा ने दिव्यांग छात्रों की उच्च शिक्षा में खुशी के अनुभवों का विश्लेषण किया है, अंग्रेजी विषय में हरी लाल कोरी ने प्रसिद्ध लेखक विक्रम सेठ के साहित्य में सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को केंद्र में रखा है। तो वहीं आशीष कुमार गुप्ता ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल आधारित गणित एवं विज्ञान शिक्षा को बेहतर बनाने पर कार्य किया है।

वाणिज्य संकाय की इना मौर्या ने निफ्टी में शामिल एफएमसीजी कंपनियों के ईएसजी (Environmental, Social, Governance) प्रदर्शन का विश्लेषण कर कॉर्पोरेट क्षेत्र में सतत विकास के पहलुओं को उजागर किया है।

पारदर्शिता को रखा गया है ध्यान में

कुलसचिव रोहित सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि सभी स्वीकृत थीसिस को नियमानुसार आगे की प्रक्रिया के लिए अग्रसारित किया जा रहा है। शोध की गुणवत्ता और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सभी कार्य किए गए हैं। इसके अलावा संबंधित शोध पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन शोध कार्यों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ‘शोधगंगा’ पोर्टल पर समयबद्ध रूप से अपलोड कराना सुनिश्चित करें, ताकि ये शोध व्यापक स्तर पर उपलब्ध हो सकें।

कुलपति ने दी बधाई

इस मौके पर कुलपति आचार्य संजय सिंह ने सभी शोधार्थियों को बधाई दी है. वह बोले “हमारा उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी और प्रभावी शोध को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे समावेशी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए कार्यरत है, जहां हर विद्यार्थी—विशेषकर दिव्यांग छात्र—अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सके और अपने शोध के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सके।”

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