आलीशान क्रूज पर सवार लोग जब मरने लगे एक-एक कर…23 देशों में हंटावायरस का मंडराया बड़ा खतरा; WHO ने जारी किया अलर्ट, डरा देगा ये Video
Hantavirus Outbreak: पूरी दुनिया को ईरान युद्ध के अलावा भी एक ख़बर इस वक्त डरा रही है. दरअसल हंटावायरस नाम के वायरल से पूरी दुनिया इस वक्त डरी हुई है. इसके सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जो कि डरा देने के लिए काफी हैं. 23 देशों में इसका असर देखा गया है. खबरों के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 5 हंटावायरस मामलों की पुष्टि की है और बताया है कि इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
इस वायरस को लेकर जानकारों की ओर से बताया जा रहा है कि इससे होने वाली मृत्यु दर: 40% है. अगर इसकी तुलना कोविड-19 से करें तो उसमें मृत्यु दर 1% थी. हालांकि हंटावायरस को लेकर राहत भरी खबर ये है कि ये मनुष्यों के बीच नहीं फैलता है लेकिन इसको लेकर बुरी खबर ये है कि इससे संक्रमित होने वाले लोगों में से 40% जीवित नहीं बचते हैं. 5 मामले तो बहुत कम हैं. सोशल मीडिया पर वायरल जानकारों के मुताबिक, WHO किसी भी मामले की पुष्टि तभी करता है जब उसे कोई गंभीर समस्या हो.
ऐंटार्कटिका की सैर के लिए निकला एक क्रूज शिप
दरअसल ऐंटार्कटिका की सैर कराने के लिए एक क्रूज शिप निकला था. ये तो सभी जानते हैं कि क्रूज़ शिप समुद्र में तैरते फ़ाइव स्टार होटलों की तरह होते हैं. लोग महंगी टिकट लेकर इसमें लग्जरी यात्राएं करते हैं और समुद्र के बीच खूब मौज-मस्ती करते हैं. इसी तरह समुद्री जहाज़ ‘MV हॉन्डियस’ ने कई देशों से होते हुए लोगों को ऐंटार्कटिका घुमाने का ट्रिप निकाला.
BREAKING:
WHO confirms 5 Hantavirus cases.
Mortality rate: 40%. For context: COVID was 1%.The good news: Hantavirus does not spread between humans.
The bad news: 40% of those infected don’t survive.5 cases is small.
The WHO doesn’t confirm cases unless they’re concerned.… pic.twitter.com/zsHhRamRxa— Merlijn The Trader (@MerlijnTrader) May 7, 2026
जानें कैसा है ऐंटार्कटिका?
आप सभी जानते हैं कि ऐंटार्कटिका पृथ्वी का बिलकुल दक्षिण महाद्वीप है. यह दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित है और यहां पर कोई रहता नहीं है. यहां पर पहले वैज्ञानिक लोग एक्सपेरिमेंट करने के लिए जाते थे लेकिन अब इस जगह को लोगों ने सैर-सपाटे की जगह बना लिया है और रईस पर्यटक महंगे क्रूज़ के जरिए यहां पहुंचते हैं. हालांकि यहां बहुत अधिक लोग नहीं जाते लेकिन फिर भी हर साल यहां करीब एक लाख से अधिक पर्यटक पहुंचने लगे हैं.
ऐंटार्कटिका में कोई होटेल तो है नहीं इसलिए लोग क्रूज से जाते हैं जिसमें सभी तरह की आलीशान सुविधाएं होती हैं. लोग जहाज़ पर रहकर प्रकृति के इस नाजारे को देखते हैं. हालांकि कुछ उतरकर बर्फ़ पर पैर भी रखते हैं. यहां पर जमीन नहीं है सिर्फ बर्फ़ ही बर्फ़ है. बर्फ़ के ही पहाड़ हैं. पेंगुइन पक्षी यहां पर रहते हैं. इनको भी देखने के लिए लोग यहां जाते हैं. व्हेल यहां देखने को मिलती है.
कुल मिलाकर यहां कि ट्रिप बहुत महंगी होती है. कई लाख रुपयों का खर्च आता है. खास तरह के जहाज ही यहां तक पहुंच सकते हैं. क्योंकि कई जगह तो समुद्र ही बर्फ़ से ढका होता है. ऐसे में जहाज को बर्फ तोड़कर आगे बढ़ना पड़ सकता है. इसलिए खास तरह के समुद्री जहाज़ बनाए जाते हैं जो यहां तक पहुंच सके. हालांकि यहां पहुंचने के नियम भी बहुत सख्त हैं.
जानें क्या है ऐंटार्कटिका पहुंचने के नियम?
बता दें कि ऐटार्कटिका पहुंचने के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने नियम बनाए हैं. यहां पर कोई देश या सरकार तो है नहीं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने ही नियम बनाया है. इसके तहत यहां पर एक जगह पर अधिक लोग नहीं उतर सकते हैं. किसी भी तरह से पर्यावरण को ख़तरा न हो इसके लिए नियम बनाए गए हैं. क्योंकि दुनिया का सबसे साफ इलाक़ा यही बचा है जो सबसे ठंडा और एक तरह से सबसे अनोखा इलाका है.
कहते हैं कि ये जगह सपनों जैसी महसूस होती है यहां पर लोग बर्फ पर चलने, पेंगुइन के साथ फोटो खिंचवाने, व्हेल देखने, बर्फ़ के पहाड़ देखने आदि के लिए जाते हैं और रईस लोग ये सब करने के नाम पर लाखों रुपयों को पानी में बहा देते हैं.
तो ऐसा ही रईसों का एक ट्रिप यही सब देखने के लिए 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से जहाज़ MV हॉन्डियस के साथ निकला.
क्रूज़ पर हुआ हंटावायरस का हमला
इस सुनहरी यात्रा के लिए 23 देशों के लोग निकले जिसमें कुल 147 लोग थे जिसमें से 88 यात्री थे और बाक़ी चालक दल के लोग. ऐंटार्कटिका जाने के साथ ही इन सभी को फॉकलैंड, आइलैंड्स जाना था साथ ही साउथ जॉर्जिया नाम के ख़ूबसूरत टापू पर भी जाना था. यही नहीं त्रिस्तान दा कुन्या पर भी जाने का प्लान था. ये लोग ऐसे दूर-दराज़ के द्वीप देखने के लिए जा रहे थे जिसके नाम अमूमन लोग जानते ही नहीं.
6 अप्रेल को 70 वर्षीय शख्स को आया तेज बुखार
एक अप्रैल को सुखद यात्रा के लिए सभी निकले लेकिन फिर लेकिन 6 अप्रैल को नेदरलैंड्स के एक 70 साल के यात्री को तेज बुख़ार आने की बात सामने आई. उसे सिरदर्द के साथ ही पेट खराब होने की शिकायत की. जहाज़ बीच समुद्र में था. हालांकि क्रूज में मौजूद डॉक्टर ने इलाज शुरू किया, लेकिन यात्री की हालत बिगड़ती चली गई और फिर 11 अप्रैल को इस यात्री को साँस लेने में दिक्कत होने लगी और देखते ही देखते उसकी मौत हो गई.
इसकी ख़बर क्रूज में फैलते ही सब डर गए. हालांकि अभी तक किसी को तबीयत खराब होने की वजह नहीं मालूम थी. क्योंकि जहाज में किसी तरह के लैब टेस्ट की व्यवस्था तो थी नहीं.
एक के बाद एक की बिगड़ने लगी तबीयत
इस सम्बंध में क्रूज़ कंपनी की ओर से बयान सामने आया है जिसमें उसने प्राकृतिक कारणों से मृत्यु की वजह बताई और शव को फ़्रीज़र में रखने की बात कही. ताकि जब कोई अगला ऐसा पड़ाव आए तो वहां से वापस किसी बड़े देश की ओर लौटा जा सके. ताकि वहां पर शव के साथ मौजूद उसकी पत्नी को उतारा जा सके. इसी सोच के साथ जहाज़ आगे बढ़ता रहा. हालांकि इस दौरान लोगों में डर भरा हुआ था. दूसरी ओर कुछ अन्य लोगों ने भी महसूस किया कि उनकी भी तबीयत कुछ सही नहीं लेकिन ये भी विचार किया कि हो सकता है ये वहम हो.
त्रिस्तान दा कुन्या द्वीप पर रुका क्रूज
इस दौरान क्रूज त्रिस्तान दा कुन्या द्वीप पर रुका और यहां से भी कुछ नए यात्री सवार हुए. 24 अप्रैल को जहाज़ सेंट हेलीना द्वीप पर रुका तो यहां पर मृतक के शव को उतार दिया गया और उसकी पत्नी भी उतर गई जो कि 69 साल की थी. हालांकि इसी दौरान जहाज़ में एक ब्रिटिश यात्री भी बीमार पड़ गया. इसकी खबर सामने आते ही बाकि अन्य लोग डर गए और फिर आगे जाने की योजना कैंसल कर दी. हालांकि कुछ यात्री शायद सेंट हेलीना तक ही जाना चाहते थे.
इसलिए बताया जा रहा है कि यहीं पर करीब 30-40 यात्री उतर गए. सेंट हेलीना से दुनिया का कनेक्शन थोड़ा ठीक माना जाता है. यहां से कई देशों तक की उड़ानें मिल जाती हैं. सेट हेलीने पर ब्रिटेन के साथ ही अमेरिका, जर्मनी और स्विट्जरलैंड के करीब 30-40 यात्री उतर गए.
प्लेन में मरे शख्स की पत्नी की भी हुई मौत
तो वहीं खबर है कि जिस यात्री की मौत जहाज़ में हुई थी उसकी पत्नी ने 25 अप्रैल को सेंट हेलीना से दक्षिण अफ़्रीका के जोहानेसबर्ग जाने के लिए फ़्लाइट ली लेकिन प्लेन में ही वो बेहोश हो गईं. प्लेन जोहानेसबर्ग पहुंचा और उनको अस्पताल तुरंत ले जाया गया लेकिन 26 अप्रैल को ही उनकी मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल में टेस्ट हुआ तो ख़तरनाक वायरस जिसका नाम हंटावायरस बताया गया की पहचान हुई. इसके बाद दुनिया भर में हड़कंप मच गया.
3 मई को जहाज पहुंचा अफ्रीका
इसी बीच जहाज़ अफ़्रीका के केप वर्ड 3 मई को पहुंचा और तब तक इसकी खबर पूरी दुनिया में फैल चुकी थी. इसके बाद MV हॉन्डियस जहाज को अधिकारियों ने केप वर्ड में उतरने ही नहीं दिया और फिर डर इतना था कि जहाज़ को समुद्र में ही रोक लिया गया.
WHO को मिली 2 मई को खबर
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO, UN को इसके बारे में 2 मई को जानकारी मिली. लैब टेस्ट में ‘ऐंडीज़’ हंटावायरस के तौर पर इसकी पुष्टि हुई. यानी वो हंटावायरस जो चूहों में होता है लेकिन ये वाला ऐंडीज़ हंटावायरस एक बार चूहों से इंसान में आ जाए तो फिर इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. यानी जहाज़ में जितने भी लोग थे उन सभी को खतरा है तो इससे बड़ा खतरा वो 30-40 यात्री है जो सेंट हेलीना में ही उतर गए थे.
कहां गए 30-40 यात्री?
अब दुनिया के सामने ये सवाल है कि वो 30-40 यात्री कहां गए? वो किन-किन लोगों के संपर्क में आए होंगे? तो वहीं किस-किस को ट्रैक किया जाएगा? हालांकि जब इन 30-40 यात्रियों के बारे में ट्रैक किया गया तो पता चला कि जहाज़ से उतर कर वे अपने-अपने घर निकल गए थे.
इन देशों के लोगों को किया गया ट्रैक
ये सभी 12-13 देशों के लोग थे. ये सभी ब्रिटेन के साथ ही अमेरिका, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, नेदरलैंड्स, कनाडा, सिंगापुर के लोग थे. हालांकि सभी को ट्रैक किया गया. तो जानकारी सामने आई है कि इनमें कुछ लोग घर पहुँचकर अपने डॉक्टर के पास गए तो जहां उनको ट्रैक किया गया. तो वहीं कुछ को स्वास्थ्य अधिकारियों ने ढूँढ निकाला.
स्विस यात्री में पाया गया हंटावायरस पॉजिटिव
खबरों के मुताबिक, ट्रैक के दौरान एक स्विस यात्री जब घर पहुंचा तो वह हंटावायरस पॉजिटिव पाया गया. इस पर उसे तत्काल सबसे अलग कर दिया गया और फिर निगरानी में रख लिया गया.
तो वहीं 2-6 यात्रियों की अमेरिका में निगरानी की जा रही है. हालांकि इनमें हंटावायरस के लक्षण न मिलने की बात कही गई है. तो वहीं ब्रिटेन में दो लोगों ने घर पहुंचने के तुरंत बाद ही खुद को सेल्फ-आइसोलेशन में रख लिया. हालांकि अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य विभाग सभी को ट्रैक करने में जुटे हैं और बताया जा रहा हैकि 30 से 60 दिन यानी करीब एक से दो महीने तक इन सभी की निगरानी की जाएगी.
तो वहीं जो लोग जहाज़ पर हैं उनकी भी सांसें अटकी ही हुई हैं. खबर है कि केप वर्ड में भी जहाज़ को उतरने नहीं दिया गया.
सैनेटाइज किया जाएगा पूरा जहाज
इस तरह से जहाज को किसी भी जगह पर रुकने नहीं दिया गया तो अब खबर है कि जहाज़ स्पेन के कैनरी आइलैंड्स की ओर निकल पड़ा है और यहां पहुंच कर सभी यात्रियों को उतार कर पूरे जहाज़ को सैनिटाइज़ करने की योजना है. फिलहाल अभी तक हंटावायरस के कुल 8 मामले आ चुके हैं जिनमें से 5 में हंटावायरस पॉजिटिव पाया गया है. यानी पुष्टि हो चुकी है.
संदिग्ध हैं 3 और मामले
3 की मौत हो चुकी है तो वहीं 3 मामले और हैं जो संदिग्ध बताए जा रहे हैं. एक व्यक्ति दक्षिण अफ़्रीका में ICU में भर्ती है तो वहीं जो डॉक्टर जहाज पर इलाज कर रहे थे उनके भी बीमार होने की खबर सामने आ रही है. तो वहीं जो 30-40 यात्री पहले उतरे थे उनकी भी निगरानी की जा रही है.
बताया जा रहा है कि जहाज़ पर बचे लोग कैबिन में बंद बैठे हैं. 6 मई को तीन और मरीज़ों को यूरोप के अस्पतालों में भेजा गया है. हालांकि इस पूरी घटना पर WHO की अपील है कि घबराएं नहीं.
इसको लेकर आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम है. जो लोग जहाज़ पर नहीं थे उनको बिल्कुल भी घबराने की ज़रूरत नहीं है. बावजूद सके दुनिया भर के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है. भले ही ये वायरस कोरोना की तरह फैलने वाला नही है लेकिन लेकिन पूरी दुनिया ने करोना का डरावना रूप देखा है. इसलिए पहले से ही सतर्क हो गए हैं. तो वहीं सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर पर लोग सवाल करने लगे हैं कि क्या एक बार फिर से दुनिया पर लॉकडाउन का खतरा मंडरा रहा है? फिलहाल स्वास्थ्य संगठन ने सभी को साफ-सफाई से रहने की अपील की है.