दुनिया भर में पड़ सकती है भीषण गर्मी…वैज्ञानिकों ने दी डरा देने वाली चेतावनी

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El Nino Alert: भारत के तमाम हिस्से इन दिनों भीषण गर्मी और तेज धूप की तपिश झेल रहे हैं. सुबह 8 बजे से ही घर के बाहर निकलने की हिम्मत लोग नहीं कर पा रहे है. ऊपर से गर्म हवाएं व लू से जनता त्राहि कर उठी है. कूलर-एसी कुछ भी काम नहीं कर रहा है. तो ये हालत केवल भारत की ही नहीं है बल्कि दुनिया में लगातार जो तापमान बढ़ रहा है उससे लोग चिंतित हैं. इसी बीच वैज्ञानिकों ने गर्मी को लेकर बड़ी चेतावनी दी है.

सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में सुपर अल नीनो के तेजी से बनने की बात कही है. उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, जो कि किसी बड़ी घटना की ओर संकेत कर रहा है. अल नीनो का दुनिया पर क्या और किस तरह का असर पड़ेगा, यह निर्भर होगा अस्थिर हवाओं और वायुमंडल में होने वाले बदलावों पर. हवाओं में कमजोरी से यह धीमा अथवा तेज कर सकती हैं, जो फिलहाल अभी तक नहीं हुआ है.

जुलाई तक दिख सकता है प्रभाव

इस पर वैज्ञानिकों का आगे कहना है कि इसके बारे में अनुमान लगाना कठिन होता है, क्योंकि आपसी क्रियाएं काफी जटिल होती हैं. इसलिए फिलहाल अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि अल नीनो कितना ताकतवर हो सकता है? इस सम्बंध में अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने अनुमान जताया है कि जुलाई तक अल नीनो के 80 प्रतिशत बनने की संभावना है.

तेजी से बढ़ सकता है तापमान

वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का जो मुख्य अल नीनो इलाका है, वहां पर समुद्र तेजी से गर्म हो रहा है. इस वजह से सतह के नीचे असामान्य तौर पर गर्म पानी का एक विशाल भंडार जमा हो रहा है. इसको लेकर कई मुख्य मौसम एजेंसियों ने सम्भावना जताई है कि 2026 के आखिरी में प्रशांत महासागर का तापमान में औसत से 2.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक वृद्धि हो सकती है.

अगर यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय मौसम और जलवायु सेवा में लंबी अवधि के पूर्वानुमान के प्रमुख एडम स्केफ की मानें तो यह अल नीनो सबसे शक्तिशाली और रिकॉर्ड तोड़ने वाला हो सकता है.

क्या है सबसे शक्तिशाली अलनीनो की पहचान?

अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) की वैज्ञानिक मिशेल एल ह्यूरेक्स का बयान भी इस सम्बंध में सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि सबसे शक्तिशाली अल नीनो की एक विशेष पहचान यह भी है कि भूमध्य रेखा के पार पूर्व से पश्चिम की ओर आने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. तो वहीं ये अप्रत्याशित हवाएं अचानक बहुत ही तेज हो सकती हैं. इस तरह की स्थिति जब बनती है तो अल नीनो का बढ़ना रुक जाता है या फिर यह उल्टा भी हो सकता है. इसलिए इसके बारे में कई महीने पहले किसी तरह की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है.

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