Lucknow University: अब लखनऊ विश्वविद्यालय में LLB की पढ़ाई होगी NEP के तहत…दिखेगा ये बदलाव

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Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय में आज यानी एक जून को विधि शिक्षा (Legal Education) के क्षेत्र में एक अत्यंत युगांतरकारी, साहसिक और छात्र-हितैषी निर्णय लिया गया. एल-एल.बी. (त्रिवर्षीय) पाठ्यक्रम एवं एल-एल.बी. (पञ्च वर्षीय) पाठ्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रावधानों को लागू करने की आधिकारिक घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों के भविष्य और उनके शैक्षणिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया यह निर्णय वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही पूर्णतः प्रभावी माना जाएगा।

इसका सीधा अर्थ यह है कि जो छात्र वर्तमान में एल-एल.बी. प्रथम वर्ष के द्वितीय सेमेस्टर (First Year, Second Semester) में अध्ययनरत हैं, वे भी इस नई शिक्षा नीति के दायरे में आएंगे और इसके नीतिगत लाभों को प्राप्त करने वाले प्रथम बैच के गौरवशाली भागीदार बनेंगे।

तो वहीं इस निर्णय को लेकर कुलपति ने कहा कि विधि शिक्षा को आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालना और छात्रों के शैक्षणिक मार्ग को सुलभ बनाना हमारी प्राथमिकता है। थ्योरी और इंटरनल मिलाकर 40 प्रतिशत पर पास होने का नया नियम और 75:25 की नई प्रणाली छात्रों को तनावमुक्त करेगी। वर्तमान सत्र में पढ़ रहे विद्यार्थियों का भविष्य इस नीति से और अधिक सुरक्षित होगा।

विषम से सम सेमेस्टर में प्रमोशन की बड़ी राहत

इसी क्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एल-एल.बी. (त्रिवर्षीय) और एल-एल.बी. (पंचवर्षीय) दोनों पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए एक और अत्यंत महत्वपूर्ण एवं राहतकारी घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में दी गई व्यवस्था के अनुसार, परीक्षा परिणामों के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया है कि एल-एल.बी. 3 वर्ष और एल-एल.बी. 5 वर्ष के सभी छात्रों को विषम (Odd) सेमेस्टर से सम (Even) सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा। इस कदम से विधि संकाय के सैकड़ों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी और सत्र भी पूरी तरह नियमित बना रहेगा।

उत्तीर्ण होने का अभूतपूर्व नियम: थ्योरी और इंटरनल मिलाकर 40%

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के मानकों के अनुरूप उत्तीर्ण (Pass) होने के नियमों में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है, जो पहले की व्यवस्था में नहीं था। नए नियमों के तहत कंबाइंड पासिंग मार्क्स (40%) अब छात्र को किसी भी विषय में पास होने के लिए मुख्य लिखित परीक्षा (Theory) और आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) दोनों में अलग-अलग पास होना अनिवार्य नहीं होगा।

साथ ही थ्योरी और इंटरनल दोनों के अंकों को मिलाकर (Aggregate) न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर भी छात्र को उस विषय में उत्तीर्ण घोषित कर दिया जाएगा। कुल उत्तीर्ण प्रतिशत हालांकि पूरे सेमेस्टर के सभी विषयों को मिलाकर छात्र के कुल प्राप्तांक 45 प्रतिशत (45%) या उससे अधिक होने अनिवार्य हैं।

मूल्यांकन पद्धति में बड़ा बदलाव- 75 और 25 का फॉर्मूला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। पूर्व में लागू लिखित परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था, जो पहले 90 और 10 के अनुपात में विभाजित थी, उसे अब पूरी तरह संशोधित कर दिया गया है। अब से मुख्य लिखित परीक्षा के लिए 75 प्रतिशत (75%) अंक और आंतरिक मूल्यांकन (असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और अटेंडेंस) के लिए 25 प्रतिशत (25%) अंक निर्धारित किए गए हैं। इसी 75 और 25 (कुल 100 अंक) के संयुक्त मूल्यांकन में से छात्रों को पास होने के लिए 40 अंक लाने होंगे।

संशोधित मार्कशीट और परीक्षा फॉर्म की सूचना

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के अनुसार, प्रथम सेमेस्टर के विधि विभाग की संशोधित मार्कशीट (Revised Marksheet) इन नए नियमों के आधार पर शीघ्र ही जारी की जायेगी। मार्कशीट जारी होने के तुरंत बाद ही सभी पात्र छात्र आगामी सम सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म (Examination Form) भर सकेंगे।

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