H1 N1 वायरस का बढ़ा खतरा…केरल में हुई संक्रमितों की मौत से मचा हड़कंप; जानें लक्षण
‘H1 N1’ Virus: बारिश के मौसम में लोग लगातार खांसी, सर्दी बुखार जैसी मौसमी संक्रामक बीमारियों से ग्रसित हैं तो इसी बीच स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा ‘एच-1 एन-1’ का खतरा भी तेजी से बढ़ा है. अस्पतालों में मरीजों की बढ़ी संख्या को लेकर डॉक्टर इन्फ्लुएंजा की आशंका जता रहे हैं. तो इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी निर्देश जारी कर दिए हैं तो वहीं दिल्ली में भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक कर जरूरी निर्देश दिए हैं.
चिकित्सकों का कहना है कि जिनको पहले से फेफड़े में संक्रमण या सांस की बीमारी नहीं है उनका एच 1 एन 1, प्रभावित राज्यों से संबंध जानने की कोशिश होती रही है.
स्वास्थ्य विभाग ने दिए ये निर्देश
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इसके बचाव को लेकर पूरे देश के सभी राज्यों को निर्देश जारी कर दिए हैं. इसी के बाद से हर राज्य के सरकारी अस्पतालों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं. स्वरूपरानी नेहरू (एसआएन) चिकित्सालय में वार्ड आरक्षित किया गया है और पैथालॉजी विभाग में नमूने जांचने को टीम बनाई गई है. चेतावनी दी गई है कि तीन दिनों तक उच्च ताप के बुखार के साथ सांस लेने में रुकावट आ रही है तो तत्काल आरटीपीसीआर जांच कराएं.
केरल में हुई संक्रमितों की मौत
स्वाइन फ्लू ने लोगों को इस वजह से भी चिंता में डाल दिया है क्योंकि केरल में कई संक्रमितों की मौत के मामले भी सामने आए हैं. वर्तमान मौसम में एच1एन1 वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। दिल्ली में जहां 1777 तो वहीं कर्नाटक में चार हजार से अधिक लोगों में संक्रमण मिला है. केरल में अब तक इन्फ्लुएंजा के 7421 के मामले रिकार्ड किए जा चुके हैं.
डॉक्टरों ने दी सलाह
डाक्टरों ने लोगों को न घबराने की सलाह दी है और सतर्क रहने को कहा है. साथ ही लक्षण को पहचानने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह पर आरटीपीसीआर जांच कराने की सलाह दी है. इस सम्बंध में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका का एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा है कि नाक और गले से नमूना लेकर आरटीपीसीआर जांच के माध्यम से संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है.
वह कहती हैं कि अगर सही समय पर और सही तरीके से नमूने ले लिए जाएं व निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसे पैथालॉजी तक पहुंचा दिया जाए और नमूने की जांच को पूरी गंभीरता से किया जाए. साथ ही डायग्नोस्टिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो जाती . फिर संक्रमण पर नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने कहा किपैथालॉजी में जांच की तैयारियां रखी गई हैं।
निमोनिया का बढ़ा खतरा-लक्षण
एसआरएन अस्पताल के वरिष्ठ फजीशियन डॉ. अजीत चौरसिया का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा है कि यदि तीन दिनों तक उच्च ताप के साथ बुखार और इसी के साथ ही गले में खराश, खांसी, सिर दर्द, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, बहुत अधिक थकान और सांस लेने में दिक्कत इसके प्रमुख लक्षण हैं.
हालांकि कुछ मरीज सामान्य उपचार और देखभाल से ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर हो जाने की वजह से फेफड़े में निमोनिया की स्थिति हो सकती है. वह आगे कहते हैं कि अक्सर सामान्य बीमारियों में एक फेफड़े में बैक्टीरियल संक्रमण होता है लेकिन अगर इन्फ्लुएंजा का संक्रमण धनात्मक हो जाए तो दोनों फेफड़े में निमोनिया होने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि अभी तक इस तरह का कोई केस सामने नहीं आया है लेकिन सतर्क सभी को रहना चाहिए.
वार्ड आरक्षित
प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रो. डॉ. एके वर्मा कहते हैं कि अस्पताल में वार्ड आरक्षित कर दिया गया है. पूरी सावधानी बरती जा रही है. अभी तक एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के कोई केस दर्ज नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि हो सके तो इन दिनों मास्क का इस्तेमाल करें ताकि भीड़ में किसी को संक्रमण हो भी तो उससे सुरक्षित रह सकें. तो वहीं दिल्ली में भी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इसी के साथ ही लखनऊ सहित अन्य सभी राज्यों में भी सरकारी अस्पताल अलर्ट मोड पर हैं.