सावन भादों बरसे बदरिया, हमरे पिया घर ना आए…कजरी गीतों पर छात्राओं ने किया नृत्य

August 22, 2026 by No Comments

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Lucknow: बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ में भारत विकास परिषद महिला शाखा, चौक के सौजन्य से भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित संस्कृति सप्ताह के समापन अवसर पर आज पारंपरिक लोक संस्कृति और लोक संगीत की मधुर छटा बिखेरते हुए कजरी पर्व का उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने कजरी गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियों के साथ आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर भारतीय लोक परंपरा, ऋतु-संवेदना और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का आयोजन पूनम यादव, शालिनी श्रीवास्तव, प्रतिभा रानी, रागिनी यादव एवं मंजुला यादव के निर्देशन में किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने विद्यालय परिवार की ओर से भारत विकास परिषद महिला शाखा, चौक की संरक्षिका कंचन अग्रवाल, संस्कार गतिविधि संयोजिका तुलसी गौड़ तथा महिला सहभागिता गतिविधि संयोजिका साधना रस्तोगी का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इसके पश्चात अतिथियों, प्रधानाचार्य एवं विद्यालय की शिक्षिकाओं ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर कजरी लोकगीतों की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि कजरी उत्तर भारत की अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत परंपरा है, जिसका विशेष संबंध सावन ऋतु से है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ जब आकाश में घने काले मेघ छा जाते हैं, धरती हरितिमा से भर उठती है और प्रकृति का परिवेश नवजीवन से स्पंदित होने लगता है, तब कजरी की स्वर-लहरियां लोकजीवन में एक विशिष्ट भाव-संसार का निर्माण करती हैं।

‘कजरी’ शब्द को प्रायः काजल से जोड़कर देखा जाता है और वर्षा ऋतु में आकाश पर छाए कजरारे बादलों से इसका सांकेतिक संबंध माना जाता है। कजरी में वर्षा, विरह, प्रेम, मिलन की आकांक्षा, प्रकृति-सौंदर्य, लोकजीवन तथा कृष्ण-लीला जैसे विविध भावों की अभिव्यक्ति मिलती है। कजरी केवल एक लोकगीत नहीं, भारतीय लोक-संस्कृति में प्रकृति और मनुष्य के आत्मीय संबंध की सजीव अभिव्यक्ति भी है।

सावन की फुहारों, झूलों, मेघों की गर्जना, मिट्टी की सोंधी गंध और ग्रामीण जीवन की सहज उमंग के साथ कजरी की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इसी सांस्कृतिक विरासत से छात्राओं को परिचित कराने और उसके प्रति उनके मन में आत्मीयता उत्पन्न करने के उद्देश्य से विद्यालय में इस आयोजन को विशेष रूप से आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने विभिन्न पारंपरिक कजरी गीतों की अत्यंत मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।

गीतों के साथ प्रस्तुत किए गए नृत्य ने कार्यक्रम की गरिमा और आकर्षण को और बढ़ा दिया। छात्राओं ने अपनी गायन प्रतिभा, लयबद्धता, भावाभिव्यक्ति और नृत्य-कौशल के माध्यम से कजरी के विविध भावों को मंच पर साकार किया।

सावन भादों बरसे बदरिया, हमरे पिया घर ना आए, हमके याद सताए, झूला परल कदम की डारी, झूले कृष्ण मुरारी ना, बादरिया घेरि आई ननदी आदि कजरी गीतों से विद्यालय का प्रांगण संगीतमय हो गया। छात्राओं के परिधान, भाव-भंगिमाएं और प्रस्तुतियों की सहजता ने वातावरण को पूरी तरह सावनी उल्लास से भर दिया। इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाओं शालिनी श्रीवास्तव, प्रतिभा रानी, अनीता श्रीवास्तव, माधवी सिंह एवं रागिनी यादव ने भी कजरी गीतों की प्रस्तुति देकर छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।

शिक्षिकाओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को एक आत्मीय और पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया। छात्राओं ने भी अपनी शिक्षिकाओं की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। छात्राओं की प्रस्तुतियां दो वर्गों—जूनियर एवं सीनियर—में आयोजित की गईं। जूनियर वर्ग की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन उत्तरा सिंह एवं ऋचा अवस्थी ने निर्णायक के रूप में किया। इस वर्ग में कक्षा 6 की जाह्नवी एवं अनन्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कक्षा 8 की जाह्नवी एवं दिव्यांशी को द्वितीय स्थान तथा कक्षा 8 की आयशा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। कक्षा 7 की खुशी एवं कक्षा 9 की ज्योति को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। सीनियर वर्ग की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन उमा रानी यादव एवं सीमा आलोक वार्ष्णेय ने किया। इस वर्ग में कक्षा 10 की रोशनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। काजल तिवारी को द्वितीय तथा नैंसी कनौजिया को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

सोनी सिंह को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। निर्णायकों ने छात्राओं की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके गायन, लय, भावाभिव्यक्ति, मंचीय प्रस्तुति एवं लोक-संस्कृति के प्रति उनकी समझ को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान अनीता श्रीवास्तव, माधवी सिंह, मीनाक्षी गौतम एवं रितु सिंह सहित विद्यालय की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं और उन्होंने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। छात्राओं ने भी पूरे उत्साह, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं।

विद्यालय परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान सावन की लोक-संस्कृति और पारंपरिक उल्लास का सुंदर वातावरण बना रहा। कार्यक्रम की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति उसकी लोक परंपराओं में निहित है। लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, वे हमारी सामूहिक स्मृति, जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक अनुभवों के जीवंत दस्तावेज हैं। कजरी जैसी लोकपरंपराओं को विद्यालयी परिवेश में स्थान देने से छात्राएं अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती हैं और अपनी समृद्ध विरासत को समझने का अवसर प्राप्त करती हैं।

उन्होंने भारत विकास परिषद महिला शाखा, चौक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृति सप्ताह जैसे आयोजन छात्राओं के व्यक्तित्व में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन कक्षा 10 की काजल एवं कक्षा 12 की चाहत ने प्रभावशाली ढंग से किया। दोनों छात्राओं ने कार्यक्रम की विभिन्न प्रस्तुतियों और गतिविधियों का सहज एवं सुव्यवस्थित संचालन करते हुए अपनी मंचीय प्रतिभा का परिचय दिया। भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित संस्कृति सप्ताह का समापन बालिका विद्यालय में अत्यंत हर्षोल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ।

समापन अवसर पर उपस्थित सभी छात्राओं को खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया। इस अवसर ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को आत्मीयता और सहभागिता का एक और आयाम प्रदान किया। कजरी के मधुर स्वरों, छात्राओं की उत्साहपूर्ण प्रस्तुतियों और सावन की लोक-संवेदना से ओतप्रोत इस आयोजन ने विद्यालय परिसर को भारतीय लोक संस्कृति के जीवंत रंगों से भर दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़ाव नई पीढ़ी के व्यक्तित्व को अधिक समृद्ध, संवेदनशील और संस्कारित बनाता है।

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