Lucknow University: साइबर अपराध से कैसे बचें…? अपर पुलिस अधीक्षक ने छात्रों को दी महत्वपूर्ण जानकारी
Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय में विद्यार्थियों को साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग एवं तकनीकी नवाचार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से “साइबर अपराध की जांच एवं साइबर सुरक्षा – तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप के अवसर” विषय पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया।
सेमिनार के प्रारंभ में अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के डीन प्रो. एस. पी. सिंह ने मुख्य वक्ता मनीष चंद्र सोनकर, अपर पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश पुलिस का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता मनीष चंद्र सोनकर ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की जांच, डिजिटल साक्ष्यों, साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल अपराधों से निपटने की प्रक्रिया के विभिन्न व्यावहारिक एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल एविडेंस की चेन ऑफ कस्टडी तथा जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों की अखंडता बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की प्रभावी जांच के लिए केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से एकत्र करना, संरक्षित करना और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करना भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ उत्पन्न होने वाली नई साइबर सुरक्षा चुनौतियों से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ साइबर अपराधों को अधिक परिष्कृत बनाने में भी किया जा सकता है।
एआई (AI) आधारित फिशिंग , सोशल इंजीनियरिंग और अन्य डिजिटल हमलों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए विद्यार्थियों के लिए एमेर्जिंग टेक्नोलॉजीज के साथ-साथ एथिकल एवं रिस्पांसिबल यूज़ ऑफ़ टेक्नोलॉजी को समझना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के कोऑर्डिनेटर डॉ. हिमांशु पांडेय ने विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर टेक्नोलॉजी -ड्राइवन सलूशन्स , प्रोटोटाइप्स एवं मिनिमम विएबल प्रोडक्ट्सविकसित करने तथा उन्हें नवाचार और स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि क्लाउड एवं एआई जैसी तकनीकों के प्रभावी उपयोग से कम लागत में स्कैलेबल और सिक्योर डिजिटल सलूशन्स विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें भविष्य में व्यावसायिक उत्पादों एवं स्टार्टअप के रूप में विकसित किया जा सकता है।
एडब्लूएस स्टूडेंट बिल्डर कैंपस लीडर ओम राय द्वारा क्लाउड कंप्यूटिंग एवं एडब्लूएस जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप के अवसरों पर विशेष चर्चा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को क्लॉड कंप्यूटिंग , क्लॉड आर्किटेक्चर , एपीआई -बेस्ड एप्लीकेशन्स तथा क्लॉड सिक्योरिटी जैसी उभरती तकनीकों की संभावनाओं से अवगत कराया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. हिमांशु पांडेय,कोऑर्डिनेटर कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एवं एडब्लूएस स्टूडेंट बिल्डर कैंपस लीडर ओम राय द्वारा किया गया।
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