Matru Navami Shradh: पीपल वृक्ष के नीचे प्रज्जवलित करें दीपक…मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्तूबर को

October 3, 2026 by No Comments

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Matru Navami Shradh: आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है. इस बार मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्तूबर को किया जाएगा. जिस तरह से बेटा अपने पिता, पितामह आदि पूर्वजों के निमित्त पितृपक्ष में तर्पण करते हैं, ठीक उसी तरह से पुत्रवधू यानी बहू भी अपनी मृतक सास, माता आदि के निमित्त तर्पण करती हैं.

ये तर्पण प्रतिपदा से लेकर नवमी तक किया जाता है. नवमी के दिन दिवंगत सास व माता की आत्मा की शांति के लिए ब्राह्मणी को दान आदि दिया जाता है. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि मातृ नवमी को ही माता का श्राद्ध कर्म करना शास्त्रीय विधान माना गया है. इस तिथि के दिन सधवा अथवा पुत्रवती स्त्रियों को भोजन कराना पुण्यदायी माना गया है.

बता दें कि सर्वपितृ अमावस्या तिथि को पितृपक्ष का समापन होता है. नवमी तिथि को जहां अज्ञात महिलाओं का श्राद्ध कर्म होता है तो वहीं अमावस्या को भी सभी का श्राद्ध कर्म किया जाता है.

पितरों की पूजा का समय

कुतुप मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से लेकर 01 बजकर 13 मिनट तक.
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से लेकर 02 बजकर 06 मिनट तक.
अपराह्र काल: दोपहर 01 बजकर 06 मिनट से लेकर 04 बजकर 45 मिनट तक.

मातृ नवमी पर करें ये काम

मातृ नवमी के दिन परंपरागत तरीके से सुहागिन स्त्रियों को सुहाग का सामान जैसे बिंदी, चूड़ियाँ, सिंदूर या वस्त्र आदि भेंट करना अधिक शुभ माना गया है. वृद्ध महिलाओं को उपहार देना और उनसे आशीर्वाद लेना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है. इसके अलावा किसी ब्राह्मण पत्नी को आदरपूर्वक भोजन कराना तथा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक प्रज्ज्वलित करना विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है. इसके अलावा गाय, कुत्ते, चींटी, मछली और कौवे को अन्न-जल देने का भी विधान शास्त्रों में बताया गया है. माना जाता है कि इन जीवों को दिया गया अन्न सीधे पितरों तक पहुंचता है और उनकी आत्मा को शांति प्रदान करता है जो कि पीढ़ियों के लिए फलदायी होता है.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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