Parama Ekadashi: ‘परमा एकादशी’ 27 मई को…पुरुषोत्तम मास में है इसका खास महत्व; भूलकर भी न करें ये काम
Parama Ekadashi: ‘परमा एकादशी’ 27 मई को…पुरुषोत्तम मास में है इसका खास महत्व; भूलकर भी न करें ये काम
इस दिन दूसरों की बुराई न करें. साथ ही क्रोध न करें और झूठ न बोलें. मन को पूरी तरह सात्विक रखें.
मान्यता है कि इस दौरान किया गया जप-तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता. इसे अधिक मास भी कहा जाता है.
चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल और वस्त्र आदि दान करने का भी कहीं-कहीं चलन दिखाई देता है.
कीर्ति गूंजने लगी जो कि धीरे-धीरे पीढी दर पीढ़ी उनकी कथा के माध्यम से आज भी लोग सावित्री के पतिव्रत धर्म के बारे में जान रहे हैं.
श्रीललित विस्तार ग्रंथ के 21 वें अध्याय के 178 पृष्ठ पर बताया गया है कि संयोगवश गौतम बुद्ध जी ने उसी स्थान पर तपस्या की जिस स्थान पर भगवान बुद्ध ने तपस्या की थी।
वृषभ राशि के जातकों को निवेश में लाभ मिलेगा और अटका हुआ पैसा वापस मिलेगा. सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के भी योग बन रहे हैं.
शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन प्रदोष काल यानी शाम के समय हुआ था.
भले ही भोजन न करें. इस दिन सत्तु बांटने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है.
2026 में यह यात्रा 3 जुलाई को शुरू होगी और 28 अगस्त तक चलेगी.
केवल सात्विक भोजन करें. साथ ही मांसाहार और नशीली वस्तुओं को भी पूरी तरह से एकादशी पर प्रतिबंधित करें.