Jagannathpuri: सबकी खैर-खबर लेने के लिए नगर भ्रमण को निकले “जगत के नाथ”, जगन्नाथपुरी में रथ खींचने को आतुर दिख रहे हैं लाखों श्रद्धालु, जानें कौन लोग खींच सकते हैं रथ, क्या कहता है शास्त्र, देखें वीडियो

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प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी उड़ीसा जगन्नाथपुरी में जगत के नाथ की भव्य शोभा यात्रा निकाली जा रही है। लाखों श्रद्धालु भगवान का रथ खींचने के लिए उमड़ पड़े हैं। भक्तों की भक्ति देखते ही बन रही है। बता दें कि श्री जगन्नाथ जी रथयात्रा उत्सव प्रत्येक साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाई जाती है। इस बार द्वितीया तिथि एक जुलाई को पड़ी है। वैसे तो रथयात्रा देश के तमाम हिस्सों में निकलती है, लेकिन यह उत्सव मुख्य रूप से भारत के पूर्वी तट पर स्थित उड़ीसा राज्य में और विशेषकर जगन्नाथपुरी धाम में बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता है।

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यहां स्थापित है गोवर्धन पीठ भी
बता दें कि जगन्नाथपुरी भारत के चार प्रमुख धामों में से एक है और आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित गोवर्धन पीठ भी यहीं पर है। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण को माना जाता है और उन्हें यहां जगन्नाथजी कहा जाता है। जो जगत के नाथ हैं, वही जगन्नाथ हैं। इसी नाम से उड़ीसा के इस प्राचीन नगर का नाम जगन्नाथपुरी पड़ा। बता दें कि पुरी का भव्य मंदिर भारतीय शिल्पकला का प्रतिनिधित्व भी करता है। ऐसी मान्यता है कि इसका निर्माण खुद विश्वकर्मा जी ने किया था। इस तीर्थ की विशेषता ये है कि यहां किसी तरह के जाति बंधन का पालन नहीं किया जाता है। अर्थात सभी जातियों के लोग शामिल हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि रथ को खींचने का अधिकार चाण्डाल को भी होता है।

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साल में एक बार नगर भ्रमण को निकल सबकी खैर-खबर लेते हैं प्रभु

बता दें कि इस मंदिर की देव प्रतिमाओं को साल में एक बार मंदिर के बाहर लाया जाता है और रथ पर बिठाकर नगर भ्रमण कराया जाता है। मान्यता है कि भगवान इस दिन अपने भक्तों की खैर-खबर लेने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं। इस मौके पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यात्रा को देखने के लिए पहुंचते हैं। इस दिन पुष्य नक्षत्र में सुभद्रा के साथ ही भगवान को सपरिवार रथ पर सवार कर के भ्रमण के लिए भक्त ले जाते हैं। इसी दिन दूसरे स्थानों पर भगवान श्रीराम जी को रथारूढ़ करते मंदिर से दूसरी जगह ले जाकर वाल्मीकि रामायण के युद्ध काण्ड का पाठ सुनाते हैं और फिर वहीं मुक्ता धान्य से बीजवपन करके चातुर्मासीय कृषि का शुभारम्भ करते हैं। सभी भक्त इस दिन व्रत रखकर उत्सव मनाते हैं।

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जानें क्या है जगन्नाथपुरी मंदिर की विशेषता
बता दें कि जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ जी का बहुत ही भव्य और विशाल मंदिर है। इसकी विशेषता ये है कि यहां भगवान कृष्ण के साथ राधा जी के साथ नहीं बल्कि भाई बलरामजी और बहन सुभद्रा जी के साथ विराजते हैं। तीनों भाई बहनों की संयुक्त प्रतिमा की पूजा यहां की जाती है। इन तीनों मूर्तियों को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मंदिर से निकाल कर जनकपुरी ले जाया जाता है। जहां ये मूर्तियां तीन दिन तक लक्ष्मीजी के निकट रहती हैं और तीन दिन बाद फिर से उन्हीं रथों में बिठाकर मूर्तियों को मंदिर वापस लाया जाता है।

जाते हैं मौसी से मिलने
यह भी मान्यता है कि प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल के द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ (भगवान श्रीकृष्ण) अपनी मौसी के घर जाते हैं। इस दौरान उनके साथ बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा भी जाती हैं। इन्हें तीन अलग-अलग रथों पर सवार होकर किया जाता है। इसके बाद तीनों को रथ यात्रा के जरिए उनकी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर में ले जाया जाता है। गुंडीचा मौसी का मंदिर, जगन्नाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर है। इस दौरान लाखों भक्त श्रध्दा भाव से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचकर उन्हें गुंडिचा मंदिर ले जाते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी को तीनों वापस अपने स्थान पर लाया जाता है।