Draupadi Murmu:गांव की रूढ़िवादी परम्पराएं तोड़ कर आगे बढ़ीं थीं द्रौपदी मुर्मू, जानें देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति के जीवन से जुड़े तमाम उतार-चढ़ाव, देखें वीडियो

July 21, 2022 by No Comments

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ओडिशा के गरीब और पिछड़े परिवार में जन्मीं दौपदी मुर्मू का जीवन तमाम उतार-चढ़ाव से भरा रहा। कहते हैं न कि जो जिंदगी में सबसे अधिक संघर्ष करता है, वही सबसे ऊंचाई पर जाता है। यह कहावत मुर्मू के जीवन पर एकतम फिट बैठती है। आइए जानते हैं देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने जा रही द्रौपदी मुर्मू की जिंदगी से जुड़ी वो तमाम बातें, जो दूसरों के लिए आज प्रेरणादायक बन गई हैं। बता दें कि देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल थीं।

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पांच साल में दो जवान बेटों और पति को खोने के बाद खुद को सम्भालना मुश्किल था मुर्मू को
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। मुर्मू संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था, जो कि एक किसान थे। द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। दोनों से चार बच्चे, दो बेटे और दो बेटियां थे। साल 1984 में एक बेटी की मौत हुई। इसके बाद जीवन चल ही रहा था कि 2009 में एक और 2013 में दूसरे बेटे की मौत ने उनकी कमर तोड़ दी। वह खुद को सम्भाल भी नहीं पाई थीं कि एक साल बाद ही उनके पति कि 2014 में मौत हो गई। बताया जाता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। इसके बाद तो जैसे मूर्मु टूट सी गई थीं, लेकिन एकलौती बेटी के चेहरे ने उनको जीना सिखाया। बता दें कि उनकी सिर्फ एक बेटी है, जिसका नाम इतिश्री है।

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जब तोड़ी गांव की रूढ़िवादी परम्परा
मुर्मू की स्कूली पढ़ाई तो गांव में ही हुई। 1969 से 1973 तक उनकी पढ़ाई आदिवासी आवासीय विद्यालय में हुई। इसके बाद स्नातक करने के लिए उन्होंने भुवनेश्वर के रामा देवी वुमंस कॉलेज में दाखिला ले लिया था। इसी के साथ मुर्मू ने गांव की उस रूढ़वादी परम्परा को तोड़ दिया, जिसमें लड़कियों को पढ़ने के लिए लोग गांव से बाहर नहीं भेजते थे। अर्थात मुर्मू गांव की पहली लड़की थीं तो कि स्नातक की पढ़ाई करने के लिए गांव के बाहर भुवनेश्वर तक गईं। इसी के साथ मुर्मू ने एक और परम्परा तोड़ी, वो थी खुद की मर्जी से विवाह करना।

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात श्याम चरण मुर्मू से हुई। पहले दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। श्याम चरण मुर्मू के घर 1980 में शादी का प्रस्ताव लेकर गए थे लेकिन द्रौपदी के पिता बिरंची नारायण टुडू ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया था, लेकिन श्याम चरण और मुर्मू ने पिता को मनाने का प्रयास जारी रखा। काफी मान-मनौव्वल के बाद द्रौपदी के पिता ने इस रिश्ते के लिए हां कर दी थी। बता दें कि जिस समय मुर्मू ने खुद की पसंद से शादी करने की हिम्मत जुटाई, उस समय लड़कियों की शादी उनके परिवार की मर्जी से हुआ करती थी। लड़कियां इस मामले में अपने विचार नहीं रख सकती थीं।

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लड़के वालों की ओर से दिया गया था दहेज
बता दें कि द्रौपदी जिस संथाल समुदाय से आता हैं, वहां पर लड़के वालों की ओर से लड़की वालों को दहेज दिया जाता है। इसके तहत श्याम चरण के घर से द्रौपदी को एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े दिए गए थे। बताया जाता है कि द्रौपदी और श्याम की शादी में लाल-पीले देसी मुर्गे का भोज कराया गया था। तब लगभग हर जगह शादी में यही बनाया जाता था।

ससुराल में पति के नाम से 2016 में खुलवाया स्कूल
बता दें कि द्रौपदी मुर्मू का ससुराल पहाड़पुर गांव में है। यहां उन्होंने अपने घर को ही स्कूल में बदल दिया है और इसका नाम श्याम लक्ष्मण शिपुन उच्चतर प्राथमिक विद्यालय रखा है। द्रौपदी ने अगस्त 2016 में अपने घर को स्कूल में तब्दील कर दिया था। मालूम हो कि द्रौपदी हर साल अपने बेटों और पति की पुण्यतिथि पर यहां जरूर आती हैं।