Kanpur: महिला शिक्षामित्र ने हेडमास्टर पर लगाए गम्भीर आरोप, बच्चों के साथ मिलकर किया धरना प्रदर्शन, कल ही घरों से बच्चे न लेकर आने पर हेडमास्टर ने की थी BEO से शिकायत, वायरल हुआ वीडियो, देखें क्या कहा BSA ने
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के जाजमऊ स्थित प्राथमिक विद्यालय गज्जू पुरवा की महिला शिक्षामित्र मोहिनी अवस्थी ने प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह (55) पर गम्भीर आरोप लगाते हुए मंगलवार को बच्चों के साथ स्कूल के गेट पर ही धरना प्रदर्शन किया। इस मौके पर बच्चों ने भी आरोप लगाते हुए कहा है कि सर उन लोगों से झाड़ू लगवाते हैं और बर्तन साफ करवाते हैं। फिलहाल इस पूरे मामले की जानकारी होने पर खंड शिक्षाधिकारी सदर बाजार सौरभ आनन्द मौके पर पहुंचे और पूरे मामले पर जांच करने के बाद कार्यवाही करने की बात कही।
दूसरी ओर इस पूरे मामले को लेकर प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि 18 अगस्त को स्कूल में कम बच्चे थे। इस पर उन्होंने बच्चों को घरों से लाने के लिए कहा था, जो कि शिक्षामित्र को रास नहीं आया और बच्चों के सामने ही उनसे अभद्र व्यवहार कर दिया। इसकी शिकायत वीरेंद्र सिंह ने 22 अगस्त को खंड शिक्षाधिकारी (BEO)से लिखित रूप में कर दी थी। खुद को इस पूरे मामले से बचाने के लिए ही शिक्षामित्र ने उन पर आरोप लगाए हैं। इसी के साथ मंगलवार को उन लोगों के साथ धरना प्रदर्शन किया, जो लोग स्कूल पर कब्जा करना चाहते हैं।
देखें क्या कहा BSA ने
बता दें कि वायरल वीडियो में शिक्षामित्र मोहिनी अवस्थी प्रधानाध्यापक पर गलत आरोप लगाते हुए दिखाई दे रही हैं। इस पूरे मामले पर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सुरजीत सिंह ने कहा कि वह 24 अगस्त को ही स्कूल जाकर पूरे मामले की छानबीन करेंगे। हालांकि इस पूरे मामले पर खंड शिक्षाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। इसी के साथ बीएसए ने बताया कि प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह ने स्कूल में कब्जा कर रहे लोगों को पुलिस की मदद से हटवाया है। इसलिए आस-पास के लोग भी वीरेंद्र सिंह को पसंद नहीं करते हैं। अगर शिक्षामित्र को किसी तरह की समस्या प्रधानाध्यपक से थी तो उनको पहले विभाग को जानकारी देनी चाहिए थी। अगर विभाग कार्यवाही नहीं करता, तब वह कुछ भी करतीं। इस तरह उन्होंने सरासर अनुशासनहीनता की है।
देखें क्या कहा प्रधानाध्यापक ने
प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर बताया कि 18 अगस्त को स्कूल में बच्चे कम थे। इस पर शिक्षामित्र से घर जाकर बच्चों को लाने को कहा। इस पर उन्होंने मना कर दिया तो मैं खुद गया और कई बच्चों को लेकर स्कूल आया। चूंकि शासन का आदेश है कि स्कूल में 70-80 प्रतिशत उपस्थिति बच्चों की होनी चाहिए। इसलिए कोशिश होती है कि जो बच्चे नहीं आ रहे हैं, उन्हें घर से लाकर पढ़ाया जाए।
स्कूल आने पर जब शिक्षामित्र के खिलाफ रजिस्टर में “अपनी जिम्मेदारी समझें और बच्चों को स्कूल से लेकर आया करें” लिख दिया तो वह भड़क गईं और बच्चों के सामने ही वह मुझसे अभद्र भाषा में बात करने लगीं। इस पर उनके खिलाफ लिखित शिकायत 22 अगस्त को खंड शिक्षाधिकारी को रिसीव करा दिया, जिससे खुद को बचाने के लिए उन्होने मेरे ऊपर झूठे आरोप लगा दिए और स्कूल पर कब्जा करने वालों के साथ मिलकर मेरा खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। इसी के साथ प्रधानाध्यापक ने बताया कि वह 2018 से स्कूल में काम कर रहे हैं, लेकिन कभी उनको मुझसे कोई समस्या नहीं हुई। अब जब उनके खिलाफ कार्यवाही की तो वह मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।