UP: बेसिक शिक्षको के गले की फांस बना BLO कार्य, रोक दिया गया 100 से अधिक शिक्षकों का वेतन, निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों की उड़ाई जा रही है धज्जियां, ACM,SDM,ADM FR कर रहे मनमानी, BSA को कुछ मालूम ही नहीं

August 28, 2022 by No Comments

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लखनऊ/कानपुर। निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों को धज्जियां उड़ाते हुए उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बेसिक शिक्षकों से बीएलओ का कार्य कराया जा रहा है और उन पर जबरन लोगों के आधार कार्ड का नम्बर लेकर मतदान पहचान पत्र से लिंक करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। जबकि निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के आदेश के मुताबिक किसी पर भी आधारकार्ड का नम्बर जबरन नहीं मांगा जाएगा। इसी के साथ शिक्षकों पर स्कूल में पढ़ाने के साथ ही बीएलओ का कार्य समय पर करने को मजबूर किया जा रहा है।

इस तरह के संदेश हो रहे हैं वायरल, जिससे स्पष्ट है कि किस तरह से बीएलओ कार्य कराया जा रहा है।


इस वजह से शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। इसी बीच जिले भर के शिक्षकों का वेतन भी रोक दिया गया है और इस सबकी जानकारी बीएसए को ही नहीं है। मतलब जिस विभाग के शिक्षक हैं, उसी विभाग के अधिकारी को ये मालूम ही नहीं कि उनके शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है और वो ये भी नहीं जानते कि उनके किस स्कूल के शिक्षक बीएलओ कार्य में लगे हैं और कौन सा स्कूल बंद है। इस पूरे मामले को देखते हुए एक सवाल खड़ा होता कि क्या जिले के उच्चाधिकारी अपने से नीचे अधिकारियों से किसी तरह की बात करना ठीक नहीं समझते या फिर अपने हिसाब से ही सब कुछ चलाना चाहते हैं। इन सबमें फिर चाहे बच्चे पढ़ें या न पढ़ें। फिलहाल देखें इस खबर में क्या कहना है शिक्षकों का और क्या कह रहे हैं जिम्मेदारी-

देखें क्या कहना है शिक्षकों का
शिक्षकों का कहना है कि टाइम एंड मोशन के कारण वह स्कूल छोड़कर कहीं जा नहीं सकते। स्कूल सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक है, लेकिन सुबह आधाघंटा पहले पहुंचना होता है और बच्चों की छुट्टी होने के बाद शिक्षक स्कूल के कार्य निपटाते हैं। आजकर डीबीटी कार्य से लेकर पुस्तक उठान का भी कार्य चल रहा है। ऐसे में स्कूल से निकलते हुए शाम को साढ़े चार-पांच बज जाते हैं। ऐसे में शिक्षक बीएलओ कार्य कब करे। इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के जिला संयोजक सीडी यादव कहते हैं कि शिक्षक बीएलओ कार्य से इंकार नहीं कर रहा है, लेकिन शिक्षण कार्य भी जरूरी है। प्रदेश के अंदर कई ऐसे जिले हैं, जहां बीएलओ कार्य पूरा करने के लिए विद्यालय के एक शिक्षक को अवकाश दिया गया है और एक या दो स्कूल में पढ़ा रहे हैं। इस तरह से शिक्षकों ने जल्द से जल्द बीएलओ कार्य पूरा कर लिया है और शिक्षण कार्य भी प्रभावित नहीं हुआ है।

निर्वाचन अधिकारी के इस आदेश के नम्बर 4 में दिया गया है जबरन किसी से आधार नम्बर नहीं लेना है।

एकल विद्यालयों पर गिरी गाज, देखें क्या बोले बीएसए
बता दें कि बीएलओ कार्य के लिए एसीएम, एडीएम और एडीएमएफआर के स्तर से मनमाने तरीके से बेसिक शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी पर लगा दिया गया है। इस बारे में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कानपुर नगर सुरजीत सिंह से पूछा भी नहीं गया है। इस वजह से जिले में तमाम एकल विद्यालय जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, पर बंदी की गाज गिर पड़ी है। इस मामले में पूछने पर सुरजीत सिंह ने बताया कि उनको मालूम ही नहीं कि शिक्षकों का वेतन काटने के निर्देश हुए हैं और उनको ये भी नहीं मालूम कि उनके किस स्कूल से शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी पर लगाया गया है। सिंह ने कहा कि ये कार्य एसीएस स्तर पर किया गया है, जिसकी उनको जानकारी नहीं है। फिलहाल शिक्षकों का वेतन मेरे स्तर से नहीं रोका गया है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि कल वह जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर एकल विद्यालय की समस्या से अवगत कराएंगे। ताकि कोई स्कूल बंद न हो।

देखें क्या बोले एडीएम एफआर और क्या है निर्वाचन अधिकारी का आदेश
एडीएमएफआर कानपुर ने एकल विद्यालयों की बात पर कहा कि जहां भी ऐसी समस्या है, मुझे बताया जाए। इस समस्या का समाधान किया जाएगा। इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि आधार कार्ड नम्बर उन्हीं के जोड़े जाएं जो स्वैच्छा से जुड़वाए। जो लोग बूथ पर नहीं आ रहे हैं, उनके घर-घर जाकर आधार कार्ड नम्बर लेने का कार्य किया जाए, ताकि मतदान पहचान पत्र से जोड़ा जा सके। इसी के साथ उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग से पूछकर ही शिक्षक बीएलओ ड्यूटी पर लगाए गए हैं। हालांकि वह इस बात पर कोई जवाब नहीं दे पाए, कि क्या प्रतिदिन 250 शिक्षकों को जोड़ने का दबाव शिक्षकों पर बनाया जा रहा है। बता दें कि शिक्षकों का आरोप है कि उच्चाधिकारियों द्वारा प्रतिदिन 250 आधार नम्बर एकत्र करने हैं, जबकि होता ये है कि बहुत से लोग अपना आधार नम्बर नहीं देते हैं। इस तरह से एक दिन में इतनी संख्या पूरी नहीं हो पाती। हालांकि निर्वाचन अधिकारी के आदेश के मुताबिक किसी से भी जबरन आधार नम्बर नहीं लेना है।

जानें क्या है पूरा मामला
बता दें कि प्रदेश भर में 26, 27, 28, को अभियान चलाकर बीएलओ कार्य पूरा कराने के निर्देश निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश द्वारा दिया गया था। लोगों के आधार नम्बर गरुणा निर्वाचन एप पर जोड़ना है, ताकि वोटर कार्ड से आधार कार्ड को लिंक किया जा सके। नाम को बढ़ाने से लेकर हटाने तक का कार्य गरुणा एप पर होना है। प्रतिदिन 250 आधार एकत्र करने का आदेश जिला स्तर पर शिक्षकों को दिया गया है। हालांकि बीएलओ कार्य में अन्य विभाग के कर्मचारियों को भी लगाया गया है। चूंकि शिक्षकों की संख्या सबसे अधिक है, इसलिए बड़ी संख्या में शिक्षकों को ये जिम्मेदारी दी गई है। इसी बीच महाराजगंज विधानसभा में ड्यूटी कर रहे करीब 100 से अधिक शिक्षकों का अगस्त माह का वेतन एसडीएम के स्तर से रोकने के निर्देश दे दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि जो वेतन पोर्टल के माध्यम से रोका जा रहा है, फिर शिक्षकों को मिलने में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

शिक्षकों का ये भी है आरोप
शिक्षकों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग के निर्देश के बावजूद शिक्षकों को बीएलओ कार्य उसके निवास अथवा कार्य क्षेत्र से करीब 10 से 20 किलोमीटर की दूरी पर दिया जा रहा है। इसी वजह से शिक्षक और भी परेशान हैं। जैसे जो शिक्षक घाटमपुर का है, उसे कानपुर में बीएलओ ड्यूटी पर लगाया गया है। इसी के साथ शिक्षकों ने ये भी बताया कि एक बीएलओ को जो क्षेत्र दिया गया है उसमें एक वोटर लिस्ट में 450 से लेकर 1500 तक होती है, अर्थात निर्वाचन लिस्ट में इतने नाम रहते हैं। कई जिले ऐसे हैं, जहां रविवार को काम करने पर शिक्षकों को किसी अन्य दिन इस अवकाश का एडजेस्टमेंट दिया जा रहा है, लेकिन कानपुर में ऐसा नहीं हो रहा है, जबकि विभाग का ये आदेश है। इसी के साथ शिक्षकों ने ये भी आरोप लगाया है कि बीएलए ड्यूटी में प्रधानाध्यापकों को भी लगाया जा रहा है, जबकि विभाग ने प्रधानाध्यापकों को इस कार्य से मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।