Raju Srivastava: अपने आखिरी लेख में ED और नेताओं के कनेक्शन को लेकर ली थी चुटकी, कहा था “मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं” महंगाई, चीन, अमेरिका पर भी छोड़े थे व्यंग्य बाण, पढ़ें पूरा लेख, रोक नहीं पाएंगे हंसी, राजू श्रीवास्तव में यही तो थी खासियत हर जगह ढूंढ लेते थे कॉमेडी
“वैसे दोस्तों अब तो 2000 रु. के नोट सिर्फ ऑनलाइन या न्यूज चैनल में ही देखने को मिलते हैं, वो भी ईडी की मेहरबानी से। अब तो एक नया मुहावरा भी बन गया है कि जब सीधी उंगली से घी न निकले तब उंगली ईडी करनी पड़ती है। उधर चीन-ताइवान में अलग ठन रही है और हमेशा की तरह अमेरिका ताइवान को फिर यूक्रेन जैसा साथ और विश्वास देने आगे आया है। अगर चीन और ताइवान के बीच कोई झंझट हो गई तो यही अमेरिका पीछे हट जाएगा। “
“खैर मुझे क्या लेना-देना, मेरी न तो चीन में कोई गर्लफ्रैंड है न ताइवान में। भैया मुझे गर्लफ्रैंड से ब्रेकअप होने का कोई डर ही नहीं है। क्योंकि मेरी कोई गर्लफ्रैंड ही नहीं और भैया गर्ल फ्रैंड बॉयफ्रैंड में ब्रेकअप तभी होता है, जब किसी के पास कोई बैकअप होता है। वैसे ये ब्रेकअप वेकअप सब चोंचलेबाजी है। शादी के बाद तो दिन में तीन बार ब्रेकअप होता है और सुनो एक रिसर्च में पता चला है कि लड़कियों को 20 साल तक पहुंचने में 30 से 40 साल लग जाते हैं। अच्छा महिलाएं तो बस उम्र छुपाती हैं, मगर आदमी को तो गंजापन, अपनी सैलरी और यहां तक कि लड़कियों के फोन नम्बर भी छुपाने होते हैं। भैया जो लोग गर्लफ्रैंड विहीन हैं, उन्हें मेरी एक ही सलाह है कि कर्म करते रहिए क्या पता ‘फल’ की जगह ‘फलानी’ मिल जाए। क्योंकि आजकल जवान हो या बूढ़ा सब फलानी ढूंढने में लगे हैं।”
बता दें कि उनका यह आखिरी लेख दैनिक भाष्कर समाचार पत्र में 6 अगस्त 2022 को प्रकाशित हुआ था, जिसे उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से ट्विट भी किया था और बताया था कि यह उनके रेगुलर लेख में से एक है। इस लेख में राजू श्रीवास्तव ने महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार और वर्तमान राजनीति पर भी व्यंग्य बाण छोड़े हैं, जिसे पढ़ने के बाद पाठक अपनी हंसी नहीं रोक सकता। इस लेख में हंसी-हंसी में राजू श्रीवास्तव ने कई गम्भीर बाते भी लिखी हैं और लोगों को सलाह भी देते नजर आए हैं। साथ ही इस लम्बे-चौड़े लेख के अंत में उन्होंने ये भी लिखा है कि “लास्ट में बस एक ही बात कहूंगा कि मेरी बातें ध्यान से सुना करो। क्योंकि मेरे घर में मेरी कोई सुनता नहीं है।” राजू श्रीवास्तव में यही तो खासियत थी कि वह हर जगह, हर चीज में कॉमेडी ढूंढ लेते थे और उसे इस तरह से प्रस्तुत करते थे कि वह साफ-सुथरी कॉमेडी होती थी, जिसे फैमिली के साथ बैठकर देखा जा सकता था। शायद की ही कॉमेडी के क्षेत्र में राजू के जाने के बाद जो खालीपन आया है, शायद ही उसे भरा जा सके कभी।
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