UP Basic Shiksha: RSM उत्तर प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी जिलाध्यक्ष के प्रयासों से प्रदेश के 50 हजार बेसिक शिक्षकों की दूर हुई चयन वेतनमान विसंगति, अब शिक्षकों के हित में रखी की ये महत्वपूर्ण मांग, देखें वीडियो

September 22, 2022 by No Comments

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वाराणसी। प्रदेश भर के बेसिक शिक्षकों के लिए खुशी की खबर सामने आ रही है। RSM (राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ) उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय के प्रयासों के चलते यूपी के करीब 50 हजार शिक्षकों के चयन वेतनमान विसंगति को दूर कर दिया गया है। इसके लेकर उन्होंने वित्त नियंत्रक रविन्द्र कुमार द्वारा प्रदेश के सभी लेखाधिकारियों को एक पत्र जारी कर धन्यवाद किया है। इसके लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल भी गुरुवार को वित्त नियंत्रक से मिला।

इस मौके पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी के जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय ने शिक्षकों के प्रथम नियुक्ति तिथि से ही एनपीएस कटौती करने तथा इसके सापेक्ष मिलने वाले सरकारी अंशदान को व्याज समेत देने की वित्त नियंत्रक से मांग भी की।

शशांक कुमार पाण्डेय ने बताया कि चयन वेतनमान एवं प्रोन्नत वेतनमान की विसंगति के कारण एक ही बैच के शिक्षकों में से वरिष्ठतम शिक्षक का वेतन अपने से कनिष्ठ शिक्षक से कम फिक्स होने के कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत 50 हजार से ज्यादा शिक्षक वरिष्ठ होने के बावजूद अपने कनिष्ठ शिक्षक से कम वेतन पा रहे थे जिसको दूर करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी के जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय “शेखर” ने वित्त नियंत्रक प्रयागराज उत्तर प्रदेश रविन्द्र कुमार से मिलकर वार्ता किया था और उन्हें इसके लिए ज्ञापन भी दिया था जिसके क्रम में वित्त नियंत्रक रविन्द्र कुमार ने 21 सितंबर 2022 को उत्तर प्रदेश के समस्त वित्त एवं लेखाधिकारियों को पत्र जारी करके इस विसंगति को दूर करने का निर्देश दिया जिस पर उन्हें धन्यवाद देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी के जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय “शेखर” ने आज 22 सितंबर 2022 को उनके कार्यालय में मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया।

गुरुवार को वित्त नियंत्रक से हुई मुलाकात के दौरान प्रदेश संयुक्त मंत्री शशांक कुमार पाण्डेय”शेखर” ने उनसे मांग किया कि नवीन अंशदाई पेंशन योजना (एन पी एस) के अंतर्गत आने वाले लाखों शिक्षकों के प्रथम नियुक्ति तिथि से एन पी एस की कटौती नहीं की। न ही उस कटौती के सापेक्ष मिलने वाले नियोक्ता अंशदान को शिक्षकों के प्रान खाते में भेजा गया है जिससे शिक्षकों की वर्षों का एनपीएस लंबित है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि शिक्षकों के वेतन से पुरानी एनपीएस काटकर उसके सापेक्ष उन्हें व्याज समेत नियोक्ता अंशदान दिया जाय।

एनपीएस की ऐसी विसंगति के कारण हर साल तमाम शिक्षक बिना किसी वित्तीय लाभ के रिटायर हो रहे हैं जिससे उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो रहा है जो कि अमानवीय है क्योंकि एक तरफ जहां शिक्षकों से पुरानी पेंशन व्यवस्था छीन ली गई वहीं एनपीएस के अंतर्गत मिलने वाले उनके देयक भी उन्हें नहीं दिये जा रहें हैं।

इस पर वित्त नियंत्रक रविन्द्र कुमार ने कहा कि मैं खुद चाहता हूं कि ऐसे सभी शिक्षकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एनपीएस का रुटीन में कटौती हो और सरकारी अंशदान भी उनके प्रान खाते में जाय परंतु व्यावहारिक दिक्कत आ रही है कि पुरानी एनपीएस कटौती के लिए किसी भी जिले से शिक्षकों या उनके शिक्षक संगठनों ने कोई मांग नहीं किया है जिससे हमलोग सरकार से पुरानी कटौती के सापेक्ष दिए जाने वाले सरकारी अंशदान की मांग कर सकें परंतु मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की तरफ से आपने शिक्षकों के वास्तविक लाभ के लिए एनपीएस के पुराने देयकों की मांग किया है मैं इस पर पूरी सहानुभूति पूर्वक कार्य करुंगा जिससे यह समस्या अगले वित्तीय वर्ष में न रहे।

इस मौके पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी मंडल के मंडल महामंत्री आनंद कुमार सिंह,वाराणसी के सह मीडिया प्रभारी शशिभूषण त्रिपाठी,कार्यकारी अध्यक्ष आराजी लाइन्स अमिताभ राय उपस्थित रहे।

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