Azam Khan Hate Speech Case: हेट स्पीच मामले में आजम खान को 3 साल जेल की सजा, विधायकी पर लटकी तलवार, कहा, जारी रहेगा संघर्ष, जानें अब क्या बचा है विकल्प
समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के रामपुर शहर विधानसभा सीट से विधायक आजम खान को हेट स्पीच मामले में तीन साल की सजा गुरुवार को सुना दी गई है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही आजम खान की विधायकी पर तलवार लटकना शुरू हो गई है। अर्थात उनकी विधायकी जाना तय माना जा रहा है।
दरसअल सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 के एक मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को फैसला सुनाया था कि अगर किसी सांसद या विधायक को किसी मामले में दो साल से ज्यादा की सजा होती है तो उसकी सदस्यता खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से ये फैसला सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर लागू होगा।
हेट स्पीच मामले में रामपुर की एमपीएमएलए की विशेष अदालत ने आजम खान को तीन साल की सजा सुनाई है, ऐसे में माना जा रहा है कि आजम खान की विधायकी जा सकती है। इस फैसले पर आजम खान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें अदालत का फैसला मंजूर है। हालांकि आजम खान के पास अब भी संवैधानिक विकल्प खुले हैं जिसका वो इस्तेमाल कर सकते हैं। आजम खान कोर्ट के फैसले के खिलाफ निचली अदालत जा सकते हैं जहां उन्हें जमानत याचिका दायर करनी होगी। अगर कोर्ट उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर लेती है तो आजम खान के जेल से बाहर निकलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
अगर निचली अदालत आजम खान की जमानत याचिका खारिज कर देती है तो ऐसी स्थिति में आजम खान को हाई कोर्ट का रूख करना होगा। गौरतलब है कि आजम खान के खिलाफ 80 से ज्यादा केस दर्ज हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है लेकिन कुछ मामलों पर सुनवाई लगातार जारी है। आजम खान अलग-अलग मामलों में 27 महीने जेल में रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्हें 20 मई को सीतापुर जेल से छोड़ा गया था। इसी के साथ आजम खान ने हुंकार भरते हुए कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और वह सेशन कोर्ट जाएंगे।
दूसरी ओर खान के जेल जाने के बाद समाजवादी पार्टी का क्या होगा? पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि हाल ही में सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ है और अखिलेश इस दुख से उबर भी नहीं पाए कि सपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले आजम खान को तीन साल की सजा हो गई। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर अब सपा का क्या होगा। क्या बसपा की तरह ये भी उत्तर प्रदेश में खत्म हो जाएगी। फिलहाल देखना ये है कि अखिलेश यादव किसी तरह से इस संकट के दौर से खुद को निकाल कर पार्टी को आगे ले जाने में कामयाब रहते हैं, क्योंकि दो विधानसभा चुनावों में भी सपा को जनता ने हासिए पर ही रखा है। इन सबको देखते हुए अखिलेश के लिए वर्तमान परिस्थितियां बड़ी चुनौती बन गई हैं।