GUJARAT RIOTS: गुजरात दंगों के मामले में ATS ने सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ को लिया हिरासत में, पूछताछ जारी, सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही लिया था नाम और खारिज की थी दिवंगत कांग्रेस विधायक एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया की याचिका, देखें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। गुजरात दंगों (2002) पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने आए फैसले के दूसरे ही दिन शनिवार को गुजरात एटीएस की दो टीमें तीस्ता सीतलवाड़ के मुंबई स्थित घर पहुंची है। इसके बाद उन्हें अहमदाबाद ले आई। उनसे गुजरात दंगों में उनके एनजीओ की जांच के लिए एटीएस की टीम को पूछताछ करनी है। जानकारी सामने आ रही है कि उन्हें पहले मुंबई के सांताक्रूज थाने में ले जाया गया है। बता दें कि गुजरात दंगों में सीतलवाड़ के एनजीओ की भूमिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने और जांच की जरूरत बताई थी।

मीडिया सूत्रों की मानें तो गुजरात दंगों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 55 राजनेताओं और अधिकारियों को मिली क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी ने याचिका दायर की थी। जिसे शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कानून का दुरुपयोग करना ठीक नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच की तारीफ की और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि जितने लोग कानून के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ का नाम भी लिया था और कहा था कि सीतलवाड़ के खिलाफ और जांच की जरूरत है। इसी के साथ दूसरे दिन ही जांच के लिए एटीएस की टीम ने उनको हिरासत में लिया है।
गृहमंत्री ने भी किया था सीतलवाड़ का जिक्र
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एटीएस तीस्ता सीतलवाड़ के घर पहुंची। इससे पहले शनिवार सुबह एक इंटरव्यू में गृह मंत्री अमित शाह ने भी तीस्ता सीतलवाड़ का जिक्र किया था और उन्होंने कहा था कि सीतलवाड़ का एनजीओ पूरे केस में खासा सक्रिय रहा था। इसी के साथ गृह मंत्री ने तहलका मैगजीन के स्टिंग ऑपरेशन का भी जिक्र किया था और कहा कि अदालत ने उसको खारिज कर दिया। बकौल अमित शाह मीडिया से लेकर एनजीओ और राजनीतिक जमात ने नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की पूरा कोशिश की और कोई कसर बाकी नहीं रखी।
जानें कौन हैं तीस्ता सीतलवाड़
मीडिया रिपोर्ट्स से मुताबिक तीस्ता सीतलवाड़ एक समाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार हैं। वह सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) नामक संगठन की भी सचिव हैं। कहा जाता है कि इस संगठन को 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक दंगे के पीड़ितों के लिए न्याय लड़ने के लिए स्थापित किया गया था। सीजेपी एक सह-याचिकाकर्ता है जो नरेंद्र मोदी और 62 अन्य सरकारी अधिकारियों के 2002 के गुजरात दंगों में उनकी सहभागिता के लिए आपराधिक मुकदमा की मांग कर चुकी है। वहीं, भाजपा की नजर में तीस्ता सीतलवाड़ के संगठन को नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस द्वारा स्थापित या संचालित किया जा रहा है।