“…जरा फासले से मिला करो” मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन; जावेद अख्तर बोले-उर्दू थोड़ी और गरीब हो गई-Video
Bashir Badr Passes Away: उर्दू की गजलों को बड़ी महफिलों और महलों से निकालकर आम जनता के दिलों तक पहुंचाने वाले मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से ग्रसित थे और इसी वजह से शायरी और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे.
उनके निधन पर फिल्मों और साहित्य की दुनिया के मशहूर लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने दुख व्यक्त किया है और एक भावुक ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है, ‘आज हमारी भाषा, उर्दू, थोड़ी और गरीब हो गई है. बशीर बद्र, एक बहुत ही सुरीले शायर, हमारी दुनिया से हमेशा के लिए चले गए. यह शायर और उनकी शायरी हमेशा हमारी यादों में जिंदा रहेगी.’
Legendary poet Bashir Badr, a Padma Shri awardee who wrote famous couplets like “Ujale apni yaadon ke hamare saath rehne do”, passed away in Bhopal on Thursday after a prolonged illness, family sources said.#bashirbadr #padmashri #poet #urdupoetry #bhopal #rip pic.twitter.com/kHvsMboNuK
— DD NEWS CHHATTISGARH (@ddnewsraipur) May 28, 2026
मॉर्डन गजल के थे मास्टर
बशीर बद्र ने आम जनता के दिलों तक शायरी को पहुंचाने के लिए पारंपरिक उर्दू के मुश्किल शब्दों की जगह आसान, मखमली और आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया. यही वजह रही कि उनको मॉडर्न गजल का ‘मास्टर’ माना जाता है.
‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए’ और ‘कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो’ जैसी दोहों से वह हर पीढ़ी की जबान पर रहते हैं. वह भले ही आज हमारे बीच नहीं लेकिन उनकी गजलों और दोहों के जरिए उनको हमेशा याद किया जाएगा.
उर्दू ग़ज़ल के अद्वितीय मशहूर शायर बशीर बद्र जी आज हम सबको छोड़ गए।😭#BashirBadra pic.twitter.com/VpNgjy5amb
— Vismrita (@TeamVismrita) May 28, 2026
पद्मश्री से सम्मानित
भारत की संस्कृति और साहित्य में उनके बेमिसाल और ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से नवाजा है. साहित्य अकादमी अवॉर्ड से भी उनको सम्मानित किया जा चुका है.
…जब बशीर बद्र के घर में लगा दी गई थी आग
बशीर बद्र के जीवन में एक बुरा वक्त भी आया. 1987 में जब मेरठ में भयानक सांप्रदायिक दंगे भड़के. उस वक्त दंगाइयों ने मेरठ में बशीर बद्र के घर को आग लगा दी जिसमें उनका घर तो तबाह हुआ ही साथ ही उनकी जिंदगी की दौलत कही जाने वाली उनकी कई ऐतिहासिक, अनोखी और अनपब्लिश्ड रचनाएं और कविताएं भी जलकर राख हो गई. इस गहरे सदमे और नुकसान ने उनको इतना दुखी कर दिया कि वह मेरठ को हमेशा के लिए छोड़कर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल चले गए और यहीं पर अंतिम सांस ली.
इस तरह बशीर बद्र की जिंदगी सिर्फ शायरी और शोहरत तक ही सीमित नहीं रही बल्कि उनको जीवन में कई बुरे दौर भी देखने पड़े. इसके बावजूद वह दुनिया में एकता और मोहब्बत का पैगाम देते रहे.
Bashir Badr sahab left us .His poetry feels very personal and human. He wrote about love, loneliness, memories, separation, hope and the quiet pain people carry inside.
One of my Fav Poets . RIP बशीर साहब 🙏 pic.twitter.com/93IbVcZ3TQ— VishalUnfiltered (@RajeevRupani1) May 28, 2026
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