Brahmin: पुलिस भर्ती परीक्षा में नहीं बैठने दिया जनेऊधारी ब्राह्मण छात्र को, देखें वीडियो में कश्मीरी युवक ने क्या बताई आपबीती
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक खुद को ब्राह्मण बताते हुए ये आरोप लगा रहा है कि उसे पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ इसलिए नहीं बैठने दिया गया क्योंकि उसने जनेऊ पहना था और उसे उतारने से मना कर दिया।
छात्र ने आरोप लगाया है कि चेकिंग के दौरान जब उसका जनेऊ परीक्षा केंद्र में देखा गया तो उसे रोक दिया गया और जनेऊ उतार कर जमीन पर रखने के लिए कहा गया। इस पर उस ने ये करने से मना कर दिया तो परीक्षा केंद्र पर बोला गया कि या तो जनेऊ उतारो या फिर परीक्षा छोड़ दो। इस पर छात्र ने कहा कि वह जनेऊ नहीं उतार सकता, क्योंकि यह उसके धर्म में है। इसके बाद उसने परीक्षा छोड़ दी। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार परीक्षा केंद्रों पर जनेऊ की अनुमति नहीं दे रही है। छात्र ने अपना नाम अखिल बताया और खुद को जम्मू का रहने वाला व कश्मीरी ब्राह्मण बताया। (फोटो सोशल मीडिया)
जानें क्या होता है जनेऊ
बता दें कि जनेऊ को संस्कृत भाषा में ‘यज्ञोपवीत’ कहते हैं। यह तीन धागों वाला सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ब्राह्मण या कहें हिंदू धर्म के युवक बाएं कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे धारण करते हैं। अर्थात् इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे। इसे जमीन पर उतार कर रखने पर खंडित हो जाता है। अर्थात जब इसे पहनाया जाता है तो फिर कभी भी उतारा नहीं जाता। घिस जाने अथवा किसी वजह से खंडित होने के बाद नए जनेऊ को धारण करते वक्त गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है और जब पहना हुआ उतारा जाता है तो साथ ही दूसरा भी पहना जाता है। अर्थात आप किसी तरह से बगैर जनेऊ के नहीं रह सकते। ये इसका नियम है। इसी के साथ जो खंडित होता है जनेऊ उसे पेड़ पर टांगा जाता है।
जनेऊ हर हिन्दू युवक पहन सकता है। बशर्ते उसे जनेऊ के सभी नियमों का पालन करना होगा। ब्राह्मण ही नहीं समाज का हर वर्ग जनेऊ धारण कर सकता है। जनेऊ धारण करने के बाद ही द्विज बालक को यज्ञ तथा स्वाध्याय करने का अधिकार प्राप्त होता है। द्विज का अर्थ होता है दूसरा जन्म।
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