Chaitra Navratri-2023:नवरात्र के मौके पर कन्या भोज के लिए दो से 10 साल की ही कन्याओं को करें आमंत्रित, जो मन में मनौती हो, उतने ही साल की कन्या को कराएं भोज

March 21, 2023 by No Comments

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Chaitra Navratri-2023: सनातन धर्म में नवरात्र व्रत के दौरान कन्या भोज कराने की भी परम्परा है और इसके बारे में शास्त्रों में भी वर्णित है. कहते हैं कि इन कन्याओं को ही साक्षात देवी रूप माना गया है. इसीलिए जो भी नवरात्र की पूजा व व्रत करते हैं वह हवन व कन्या भोज कराने के बाद ही व्रत का पारण करते हैं। वृंदावन के आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि नवरात्र के दिनों में प्रथम दिन से लेकर नवमी तक, प्रत्येक दिन 1,3, 5, 7, 9, 11 विषम संख्या में अपनी क्षमता के अनुसार कन्या का पूजन कर भोजना कराना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा स्वयं ही भोग लगा लेती हैं।

अगर हर दिन संभव ना हो तो अष्टमी, नवमी को भी कन्या पूजन कर सकते हैं और कन्याओं को भोज करा सकते हैं। कन्या को घर में ही बुलाकर भोजना कराना शास्त्रों में सबसे उत्तम माना गया है। आचार्य बताते हैं कि दो से 10 साल तक ही कन्याओं को ही भोजन कराना चाहिए। इससे बड़ी उम्र की कन्याओं को भोजन कराना नवरात्र में उचित नहीं माना गया है। तो आइए इस लेख में देखते हैं कि किस उम्र की कन्या को भोजन कराने से भक्तों को क्या मिलता है लाभ।

दो वर्ष की कन्या का पूजन करने के बाद भोज कराने से घर से दुख और दरिद्रता दूर हो जाती है।

तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति का रूप मानी गई हैं। इनके पूजन से घर में धन-धान्‍य की भरमार रहती है, वहीं परिवार में सुख और समृद्धि जरूर रहती है।

चार साल की कन्या को कल्याणी माना गया है। इनकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है। इसलिए कन्या भोज में इनको भी शामिल कर सकते हैं।

पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी कहलाती हैं। मान्यता है कि रोहिणी का पूजन करने से व्यक्ति रोगमुक्त रहता है।

छह साल की कन्या को कालिका रूप माना गया है। कालिका रूप से विजय, विद्या और राजयोग मिलता है।

सात साल की कन्या चंडिका होती है। चंडिका रूप को पूजने से घर में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

आठ वर्ष की कन्याएं शाम्‍भवी कहलाती हैं। इनको पूजने से सभी तरह के विवाद चाहें वह कानूनी ही हो, में विजयी मिलती है।

नौ साल की कन्या दुर्गा का रूप मानी गई हैं। इनका पूजन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है और असाध्य कार्य भी पूरे हो जाते हैं।

दस साल की कन्या को सुभद्रा माना गया है। सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण करती हैं। अगर प्रत्येक दिन न हो सके तो अष्टमी, नवमी को एक साथ हर उम्र की कन्याओं को एक साथ बिठाकर भी पूजा कर भोजन करा सकते हैं। अंत में कन्याओं को दक्षिणा व गिफ्ट अवश्य दें।

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)