Chhath Puja 2023: छठ व्रत के दौरान न करें ये 6 गलतियां, पढ़ें कथा, वीडियो में देखें दादी मां का छठ गीत

November 13, 2023 by No Comments

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Chhath Puja 2023: सूर्य देव की उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ (Chhath) इस बार 17 नवम्बर से शुरू हो रहा है, जो 20 नवम्बर तक चलेगा। यह पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दौरान भक्त 36 घंटे का निर्जल उपवास कर छठी मइया से संतान के स्वास्थ्य लाभ, सफलता और दीर्घायु के लिए वरदान मांगते हैं। यह व्रत पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के उपरांत व्रत का पारण करने से संपन्न होता है।

जानें सूर्यदेव को अर्घ्य देने का महत्व
मान्यता है कि छठी मइया का पवित्र व्रत रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही सारे दुर्भाग्य समाप्त हो जाते हैं। इस व्रत से निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है।

छठ पूजा व्रत के जानें 6 नियम
व्रत के दौरान चार दिन तक पलंग या तख्त या बेड पर नहीं सोना चाहिए।
व्रती को चारों दिन नए और साफ कपड़े पहनने चाहिए।
व्रत रखने के दौरान सात्विक भोजन ही करें।
व्रत रखने वाले शख्स को मांस, मदिरा, क्रोध, लोभ, धूम्रपान आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
छठ पूजा में छठी मैया और भगवान भास्कर को ठेकुआ व कसारका भोग लगाना चाहिए।
छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए गन्ने का प्रयोग अवश्य करें।

पढ़ें कथा
मान्यता है कि छठ देवी को सूर्य देव की बहन माना जाता है। लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार, छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। देवसेना अपने परिचय में कहती हैं कि वह प्रकृति की मूल प्रवृत्ति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं यही कारण है कि उन्हें षष्ठी पुकारा जाता है। वह कहती हैं अगर आप संतान सुख चाहते हैं तो उनकी विधि-विधान से पूजा करें। इस पूजा को कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन करने का विधान बताया गया है। वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, रामायण काल में भगवान राम के अयोध्या आने के बाद माता सीता के साथ मिलकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य की उपासना करने से भी जोड़ा जाता है। इसके महाभारत काल में कुंती द्वारा विवाह से पूर्व सूर्योपासना से पुत्र की प्राप्ति से भी इसे जोड़ा जाता है।

कहते हैं कि सूर्यदेव के अनुष्ठान से उत्पन्न कर्ण जिन्हें अविवाहित कुंती ने जन्म देने के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया था, वह भी सूर्यदेव के उपासक थे। वे घंटों जल में रहकर सूर्य की पूजा करते रहे। मान्यता है कि कर्ण पर भगवान सूर्य की कृपा सदैव बनी रही। यही कारण है कि भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। भगवान भाष्कर और छठी मईया की कृपा आप पर बनी रहे। जय छठी मईया।।

यहां देखें वीडियो

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)