देशद्रोह न हो सवाल पूछना और…Gen Z की नजर में कैसी होती है आजादी?
Gen Z: भारत इस 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) मना रहा है. तो वहीं हाल ही में चर्चा में आए जेन जी 15 अगस्त 1947 में मिली आजादी को लेकर क्या सोचते हैं और उनकी नजर में आजादी के क्या मायने हैं, इसके बारे में वो खुद बता रहे हैं. Gen Z की नजर में आजादी सिर्फ अपनी मर्जी से कहीं आने-जाने या अपनी बात कहने तक ही सीमित नहीं है बल्कि अपनी पसंद का करियर चुनना, अपने फैसले खुद लेना और बिना किसी डर के अपनी पहचान के साथ जीवन बिताना ही असली आजादी है.
अमष्त
अपने नाम, जाति और लिंग की परवाह किए बिना लोगों को अपनी बात कहने की छूट हो. यही मेरे लिए आजादी है. सबके लिए बराबरी का मौका हो. जब आप जैसे हैं वैसे ही बने रहते हैं, तो आप अपनी आजादी का प्रतीक बन जाते हैं.
आस्था
आजादी का मतलब मेरे लिए अपनी पसंद के फैसले लेना है. अपनी जिंदगी में मैं क्या करना चाहती हूं और कौन सा करियर चुनना चाहती हूं आदि सभी बातें मैं खुद ही तय करूं. मेरे लिए यही आजादी है. यदि हमें अपने करियर औऱ रिश्तों पर विचार करने के फैसले को लेने की आजादी नहीं होगी तो फिर पूरी तरह से हम आजाद महसूस नहीं कर पाएंगे.
तन्वी
चाहे लड़की हो या लड़का, जिन्होंने हमें आजादी दिलाई उनके लिए हमें शुक्रगुजार हैं. जेन जी को मानसिक आजादी चाहिए. जहां पहले की पीढ़ी बाहरी दुनिया से लड़ती थी और सोचते थे कि समाज वाले क्या सोचेंगे लेकिन अब हमारी लड़ाई बाहर की दुनिया के साथ तो है ही साथ ही हमारे अंदर की दुनिया से भी लड़ाई है. मुझे हर रविवार को परिवार के साथ बैठकर ये न सोचना पड़े कि मेरा भविष्य क्या होगा? इसकी आजादी मिले. यानी अगर मैं नौ से पांच की नौकरी छोड़कर content creator बनना चाहूं तो मुझे आवारा न समझा जाए और न ही कहा जाए.
सुरभि
बचपन से ही इस शब्द को लेकर ऐसे पहचान कराई गई जैसे इसके होने से इंसान बिगड़ जाता है और जब पाबंदी लगी होती है तो सभ्य हो जाता है. आजादी वो स्थिति है जहां मूल अधिकारों के लिए हमें लड़- झगड़कर मांगना न पड़े, मेरे लिए यही आजादी है. जीवन शैली, करियर, शिक्षा को चुनने से पहले हमें ये न देखना पड़े की हम अमीर हैं या गरीब, महिला हैं या पुरुष, या हमारी जाति क्या है? यानी बिना किसी दबाव या रुकावट के अपनी बात रखना और चुनना ही मेरे लिए असली आजादी के मायने हैं.
आकांक्षा
आकांक्षा कहती हैं कि 15 अगस्त को तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना ही केवल आजादी नहीं बल्कि आजादी तब पूरी होगी, जब किसी युवा को अपने भविष्य की चिंता में रातें न जागनी पड़ें. कोई लड़की सुरक्षा की वजह से अपने सपनों का त्याग न कर दे. सवाल पूछना देशद्रोह न हो, योग्यता से पहचान हो. लोकतंत्र की ताकत को समझा जाए.
ये भी पढ़ें-आरक्षण के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन- Video