Health Tips: डेंगू से बचने को आयुर्वेद की लें शरण, रामबाण हैं ये फल और अनाज, पढ़ें पूरी जानकारी
आयुर्वेद। मौसम में बदलाव होते ही तमाम बीमारियां हमारे आस-पास घूमने लगती हैं। इनमें से ही एक है डेंगू, जो कि जानलेवा भी है। इन दिनों प्रतिदिन देश भर से समाचार सामने आ रहे हैं कि फलां शहर में इतने डेंगू के मरीज मिले और इतने मरे। इन सबको सुनसुनकर लोग चिंतित हो रहे हैं, ऐसे में इससे बचने के लिए हमारे आयुर्वेदाचार्य रोहित यादव आपको सलाह दे रहे हैं। आप अपने डाक्टर से इलाज कराने के साथ ही इनका सेवन भी कर सकते हैं। रोहित यादव बताते हैं कि तेज बुखार, सिर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सूखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है।
अनार जूस तथा गेहूं घास रस, नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है । चीकू का फ़ल भी दें।
पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है। पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी। हलांकि तमाम लोग बताएंगे कि इससे कुछ नहीं होता, लेकिन ये परखी हुई जानकारी है कि पपीते के पत्तों से प्लेटलेट की संख्या तेजी से बढ़ती है। इसलिए इसे भी अजमा सकते हैं।
बकरी का दुध भी डेंगू में काफी लाभदायक होता है।
गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है।
डेंगू के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से ज़रूर सम्पर्क करे तथा ख़ून की जाँच अवश्य करवाए। डेंगू एक बहुत ही ख़तरनाक जानलेवा बीमारी है इसीलिए समय रहते डॉक्टर से सम्पर्क करना अतिआवश्यक है। अर्थात चिकित्सक से सलाह लेने के साथ ही आयुर्वेद को भी अपनाएं, तो जल्द ही राहत मिलेगी। (photo credit social media)