IIT Bombay Suicide Case: साहिल ने एग्जाम हॉल से लेकर हॉस्टल तक क्या-क्या किया? क्राइम ब्रांच को CCTV में मिले अहम सुबूत-Video
IIT Bombay Suicide Case: आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) में छात्र की आत्महत्या के मामले में मुम्बई क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है. सीसीटीवी खंगाल रही टीम को अहम सुबूत मिले हैं. पुलिस ने एक एग्जाम हॉल का सीसीटवी फुटेज चेक किया है जिसमें साफ दिख रहा है कि मृतक साहिल रवींद्र वाकोडे कथित तौर पर नकल कर रहा था जिसे प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने पकड़ा.
क्राइम ब्रांच टीम ने इस सम्बंध में कई सीसीटीवी खंगाले हैं. चूंकि दोपहर 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच का समय जांच के लिए अहम है इसलिए इस दौरान के सभी सीसीटीवी क्लिप चेक किए जा रहे हैं. परीक्षा दोपहर 1 बजे खत्म होनी थी. इसी दौरान मृतक छात्र वाकोडे को पेपर लिखते समय कथित तौर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था.
फुटेज में क्राइम ब्रांच को साफ दिखा कि नकल पकड़े जाने के बाद एग्जाम इनविजिलेटर सूर्यनारायण डूला उसको परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कह रहे हैं. बिल्डिंग में जो दूसरा सीसीटीवी कैमरा लगा है उसमें मृतक को एग्जाम हॉल से बाहर निकलते और कैंपस हॉस्टल में अपने कमरे की ओर जाते हुए देखा गया.
SUPPORT FOR PROFESSOR DOOLLA CONTINUES TO GROW 🔥
Students at IIT Bombay hold a PROTEST in SUPPORT of Professor Suryanarayana Doolla, who was SUSPENDED from the deanship of IIT Bombay.
=> The students are OPPOSING the caste angle in the case.pic.twitter.com/sDlNupVfbW
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) September 22, 2026
बता दें कि पुलिस अफसर धर्मवीर बंसोद के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की एक टीम लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. मृतक के कमरे की तलाशी पहले ही ले ली गई थी जिससे ये साफ हो गया कि छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी. तो वहीं किसी भी तरह का सुसाइड नोट भी मृतक के कमरे से नहीं मिला.
एससी-एसटी एक्ट में दर्ज कराया गया है मामला
मालूम हो कि इस मामले में मृतक साहिल के परिवार ने प्रोफेसर पर उत्पीड़न करने और जाति-आधारित भेदभाव करने का आरोप लगााया है. दावा किया है कि इसी वजह से छात्र ने आत्महत्या की. इसी के साथ ही परिवार ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत प्रोफेसर पर मामला दर्ज कराया है. इसी के बाद से ये मामला चर्चा में आ गया. तो वहीं सोशल मीडिया पर वायरल जानकारियों के मुताबिक, साहिल ने कभी भी किसी तरह के उत्पीड़न की शिकायत संस्थान में किसी से भी नहीं की.
Mumbai, Maharashtra: Ravindra Wakode, father of deceased IIT Bombay student Sahil Wakode, says, “I appeal for a thorough investigation into those who pushed him toward suicide through torture and caste discrimination. I urge the government to ensure justice for my child by… pic.twitter.com/EolHVj83ud
— IANS (@ians_india) September 19, 2026
दो धड़े में बंटे लोग
घटना को लेकर कैंपस में दो धड़े में लोग बंट गए हैं. जहां सभी प्रोफेसर और कुछ छात्र प्रोफेसर का बचाव कर रहे हैं तो वहीं कुछ कार्रवाई की मांग करते हुए फांसी की मांग कर रहे हैं. एक पक्ष का कहना है कि संस्थान के नियमों का पालन करते हुए ही नकल से रोका गया. छात्र ने बिना इजाजत के अपने पास स्मार्टफोन रखा था और वह उसका इस्तेमाल कर रहा था.
तो वहीं इस सम्बंध में मृतक के एक करीबी दोस्त ने दावा किया कि इस पूरे मामले को मीडिया के कुछ हिस्सों में जातिवाद का रूप दिया जा रहा है जो कि देश के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान के लिए ठीक नहीं है. इससे आईआईटी बाम्बे की छवि पूरी दुनिया में खराब होगी. प्रोफेसर पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है. प्रोफेसर तो केवल अपना काम कर रहे थे जो नियम है. तो वहीं परीक्षा के दिन वाकई में क्या हुआ था इस पर मृतक छात्र के मित्र ने दावा किया है कि वह नकल करते हुए पकड़ा गया था.
साहिल के दोस्त ने मीडिया को ये भी बताया है कि “प्रोफेसर उसे कमरे से बाहर ले गए. इंस्टिट्यूट ने ये भी कहा कि उस पर डीएसी (अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति) की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. फिर इसके बाद मुझे नहीं पता कि क्या हुआ.
तो वहीं सोशल मीडिया पर लगातार प्रोफेसर के समर्थन में शांति मार्च कैंपस में निकाला जा रहा है. आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला का समर्थन किया है और बताया गया है कि उनको सस्पेंड नहीं किया गया है, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने खुद ही पद छोड़ दिया है.
BIG BREAKING 🚨 IIT Bombay faculty members march in support of Prof. Suryanarayana Doolla.
The Faculty Forum says Doolla followed the Senate-approved examination procedure when he reported second-year student Sahil Wakode for alleged phone use during an exam on Sept 18.…
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) September 21, 2026
प्रोफेसर डूला की उपलब्धियां
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला वर्तमान में IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर, शोधकर्ता और पूर्व डीन के रूप में कार्यरत हैं. 2009 में वह IIT बाम्बे से जुड़े. पावर सिस्टम व स्मार्ट ग्रिड के क्षेत्र में उनको देश के अग्रणी विशेषज्ञों में गिना जाता है.
वह कई शीर्ष सम्मान से सम्मानित किए जा चुके हैं.
2021 में प्रो. एसपी सुखामते एक्सीलेंस इन टीचिंग अवार्ड मिला.
2017 में ।IT बॉम्बे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवार्ड संस्थान द्वारा ही दिया गया.
2009 में यंग फैकल्टी अवार्ड दिया गया.
वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी संस्था IEEE द्वारा उनको मान्यता और फेलोशिप भी दी जा चुकी है.
शिक्षक के अलावा प्रशासनिक पदों पर भी रहे
बतौर शिक्षक पढ़ाने के अलावा वह बड़े प्रशासनिक पदों पर भी रहे. डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के पद पर लम्बे समय तक रहे. छात्रों के हित में बड़े सुधार किए. ऑल इंडिया रैंक (AIR) को सार्वजनिक न करने की पहल भी उन्होंने की ताकि छात्रों को मानसिक तनाव से बचाया जा सके.
एकेडमिक अफेयर्स के डीन पद की जिम्मेदारी भी वह सम्भाल चुके हैं.
देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं जैसे JEE Advanced, UCEED और CEED के सफल आयोजन और संचालन में भी वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं.
आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल 6 के वार्डन के रूप में भी वह सेवा दे चुके हैं.
एनर्जी सेक्टर में उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा चुका है.
माइक्रोग्रिड (Microgrids), स्मार्ट-ग्रिड (Smart Grids), पावर-सिस्टम ऑपरेशन, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण (Renewable-Energy Integration) और एनर्जी एफिशिएंसी (Energy Efficiency) के क्षेत्र में उनके कई शोध पत्र (Research Papers) प्रकाशित हो चुके हैं.
आईआईटी बॉम्बे से जुड़ने से पहले वह बेंगलुरु में पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स और हैदराबाद में मशीन टू मशीन जैसी कंपनियों में भी विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत रह चुके हैं.
शैक्षिक योग्यता
साल 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली.
साल 2002 में IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की.
साल 2007 में IIT दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी (PhD) पूरी की और फिर बतौर शिक्षक देश को एक नई दिशा दिखाने का कार्य शुरू किया.