भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने लकवाग्रस्त हरीश को दी इच्छामृत्यु की इजाजत…फैसला सुनाते हुए जस्टिस पारदीवाला की आंखें हुई नम-Video
India Passive Euthanasia First Case Harish Rana: भारत में इच्छामृत्यु का पहला मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के हरीश राणा मामले को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दी है. आज यानी बुधवार (11 मार्च, 2026) को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने हरीश राणा के परिवार को पैसिव युथनेसिया (passive euthanasia) यानी इच्छामृत्यु की अर्जी पर मंजूरी दे दी है. हरीश 13 सालों से बिस्तर पर हैं. इस दौरान फैसला सुनाते हुए जज जस्टिस जेबी पारदीवाला बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं.
पंजाब विश्वविद्यालय से की पढ़ाई
32 साल के हरीश राणी के साथ साल 2013 में एक घटना हुई थी. दरअसल वह पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे और वहां के हॉस्टल की चौथी मंजिल से वह गिरे जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और इसका सीधा असर उनके ब्रेन पर भी पड़ा. वह तभी से बिस्तर पर हैं और 13 सालों में उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है. इसी आधार पर हरीश के परिवार ने उनके लिए इच्छामृत्यु की अपील करते हुए याचिका दाखिल की थी. इस सम्बंध में हरीश के पिता का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि मेरा बेटा टॉपर था. मैं परमात्मा का धन्यवाद करता हूं कि इच्छामृत्यु पर फैसला आया. भला कौन पिता चाहता है लेकिन हरीश जैसे न जाने कितने ही लोग होंगे. इससे हर किसी को भलाई होगी. तीन साल से ये लड़ाई लड़ रहा था.
क्या बोले जज?
इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस पारदीवाला ने दुख व्यक्त किया और कहा कि यह बेहद दुखद है. वह आगे बोले कि यह हमारे लिए बेहद ही मुश्किल फैसला है लेकिन इस लड़के (हरीश) को यूं ही बहुत दुख में नहीं रख सकते. जज ने आगे कहा कि हम उस स्टेज में हैं, जहां हमें आखिरी फैसला लेना होगा. इसी के साथ ही जज ने हरीश राणा के परिवार की तारीफ की और कहा उनके परिवार ने कभी अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा. किसी से प्यार करने का मतलब है, सबसे बुरे समय में भी उनकी देखभाल करना.
Supreme Court allows withdrawal of medical treatment to 32-year-old Harish Rana, who has been in a vegetative state for the last 13 years with negligible hope of recovery.
Harish Rana’s father, Ashok Rana, says,” We had been fighting for this. Which parents would want this for… pic.twitter.com/KU9FFuJt3u
— ANI (@ANI) March 11, 2026
कोर्ट ने दिया मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने का आदेश
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्थिति को समझा और फिर हरीश के परिवार की अर्जी पर मंजूरी दे दी. इसी के साथ ही हरीश का मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने का आदेश दिया. इसी के साथ ही कोर्ट ने कहा कि यहां मुख्य सवाल ये नहीं है कि ऐसे मामलों में मृत्यु मरीज के लिए सर्वोत्तम हित में है, बल्कि ये है कि क्या उसको लाइफ सस्टेनिंग ट्रीटमेंट पर जिंदा रखना उसके हित में है. इसके आगे कोर्ट ने कहा कि एम्स के पैलिएटिव केयर में हरीश को भर्ती किया जाएगा ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जा सके. इसी के साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरी गरिमा के साथ पूरा किया जाए.
हरीश के शरीर पर हुए घाव
लकवाग्रस्त हरीश को सांस लेने व रोजमर्रा के काम जैसे खाना खाने आदि के लिए चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है. तो वहीं लगातार बिस्तर पर पड़े होने की वजह हरीश के शरीर पर घाव हो गए हैं. एम्स के चिकित्सकों की टीम ने हरीश राणा के घर जाकर उनकी जांच की थी और फिर ये जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की. रिपोर्ट में चिकित्सकों ने बताया कि हरीश ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब के जरिए सांस ले रहे हैं और गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए उनको भोजन दिया जा रहा है.
हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
मालूम हो कि मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले दिल्ली हाईकोर्ट में गया था जहां हरीश के परिवार की याचिका को खारिज कर दिया गया था और कहा गया था कि भारतीय कानून के तहत सक्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति नहीं है. इस पर हरीश का परिवार अगस्त 2024 में मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मानवीय समाधान तलाशने की बात कही थी.
Delhi: The Supreme Court has allowed passive euthanasia for Harish Rana, who has been in a vegetative state since 2013
Senior Advocate Kapil Sibal says, “I would like to congratulate the Supreme Court of India for taking this historic decision. For many years, this issue has… pic.twitter.com/5Ei06XvhW4
— IANS (@ians_india) March 11, 2026
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