Lok Sabha: देश में होने जा रहा है बड़ बदलाव, आएगा नया कानून, बोले गृह मंत्री अमित शाह, “अंग्रेज शासन को मजबूत करने के लिए था ये कानून”, नहीं बच सकेंगे राजनीतिक रसूख वाले भी, जानें क्या होगा परिवर्तन, देखें वीडियो
Lok Sabha: देश में कानून के मामले में बड़ा बदलाव होने जा रहा है और अब देश में नया कानून आएगा जो की भारत की जनता के हिसाब से बनाया गया है और जनता को न्याय देने वाला होगा. लोकसभा में तीनों बिलों पर बोलते हुए अमित शाह (Amit Shah ) ने कहा,ये कानून अंग्रेज शासन को मजबूत करने एवं उनकी रक्षा के लिए उन्होंने बनाए थे. इनका उद्देश्य दंड देना था, न्याय देना नहीं. इसी के साथ आगे उन्होंने कहा कि, इस कानून के तहत हम राजद्रोह जैसे कानून को खत्म कर रहे हैं. हालांकि, विधेयक में देश के विरुद्ध अपराध का प्रावधान है. विधेयक की धारा 150 में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित सजा का प्रावधान है.
16 अगस्त से शुरू होगी 100 वर्ष की यात्रा
अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) पर नया विधेयक राजद्रोह के अपराध को पूरी तरह से निरस्त कर देगा. शाह ने आईपीसी, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए. उन्होंने बताया कि, आगामी 15 अगस्त को आजादी का अमृत महोत्सव समाप्त होगा और 16 अगस्त से आजादी की 100 वर्ष की यात्रा की शुरुआत के साथ अमृत काल का आरंभ होगा.
इन तीनों में होगा बदलाव
शाह ने आगे कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने उद्बोधन में देश के सामने पांच प्रण रखे थे जिनमें एक प्रण था कि हम गुलामी की सभी निशानियों को समाप्त कर देंगे. वह आगे बोले कि, आज मैं जो तीन विधेयक एक साथ लेकर आया हूं. ये सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच प्रणों में से एक को पूरा करने वाले हैं. इन तीन विधेयक में एक है इंडियन पीनल कोड (IPC), एक है क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CRPC), तीसरा है इंडियन एविडेंस कोड.
अब होगा भारतीय न्याय संहिता 2023
लोकसभा में उन्होंने बताया कि, इंडियन पीनल कोड 1860 की जगह, अब भारतीय न्याय संहिता 2023 होगा. क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 प्रस्थापित होगी और इंडियन एविडेंट एक्ट, 1872 की जगह ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ प्रस्थापित होगा.
2019 में ये बात कही थी प्रधानमंत्री ने
शाह ने भाषण देते हुए बताया कि, प्रधानमंत्री ने 2019 में ही हम सबका मार्गदर्शन किया था और कहा था कि अंग्रेजों के बनाए हुए जितने भी कानून हैं उन पर सोच-विचार और चर्चा करके उन्हें आज के समय के अनुरूप और भारतीय समाज के हित में बनाया जाना चाहिए. वहीं से यह प्रक्रिया शुरू हुई. शाह ने कहा कि ये कानून अंग्रेज शासन को मजबूत करने एवं उनकी रक्षा के लिए उन्होंने बनाए थे. इसी के साथ वह आगे बोले कि, उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य दंड देना था, न्याय देना नहीं। शाह ने कहा, नए कानून में सबसे पहला अध्याय महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित होगा और दूसरे अध्याय में मनुष्य हत्या के अपराध से जुड़े प्रावधान होंगे।
ये होगा सजा का प्रावधान
गृहमंत्री ने जानकारी दी कि, नए कानून में मॉब लिचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) के लिए सात साल या आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान होगा. वह बोले कि, अंग्रेजों ने राजद्रोह पर कानून बनाया था, लेकिन हम राजद्रोह के कानून को पूरी तरह खत्म करने जा रहे हैं। हालांकि, विधेयक में देश के विरुद्ध अपराध का प्रावधान है। विधेयक की धारा 150 में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित सजा का प्रावधान है।
देश में आएगा बदलाव
आगे जानकारी देते हुए गृहमंत्री ने बताया कि, 1860 से 2023 तक देश की आपराधिक न्याय प्रणाली अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार काम करती थी। इन तीन कानूनों के साथ देश में आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आएगा। वह आगे बोले कि, इन विधेयक का उद्देश्य अदालतों में दोषसिद्धि की दर को 90 प्रतिशत से ऊपर लेकर जाना है। इसीलिए हम एक महत्वपूर्ण प्रावधान लेकर आए हैं कि जो धाराएं सात साल या उससे ज्यादा जेल की सजा का प्रावधान करती हैं, उन सभी के तहत मामलों में फॉरेंसिक टीम का अपराध स्थल पर जाना अनिवार्य किया जाएगा।
नाबालिग के दुष्कर्म के लिए होगा मौत का प्रवाधान
वहीं शाह ने बताया कि, विधेयक में प्रमुख रूप से मॉब लिंचिंग के खिलाफ एक नया दंड संहिता, नाबालिगों से दुष्कर्म के लिए मौत का प्रावधान और सिविल सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए समयबद्ध मंजूरी शामिल है। इसी के साथ वह बोले कि, अलगाववाद और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे अपराधों को अलग-अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है। दाऊद इब्राहिम जैसे फरार अपराधियों पर उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने का भी प्रावधान लाया गया है। राजद्रोह का अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124ए के तहत कवर किया गया है।
सभी अदालतें होंगी कम्प्यूटराइज्ड
गृहमंत्री ने अदालतों के लिए कहा कि, अब सभी अदालतों को कम्प्यूटराइज्ड किया जाएगा, प्राथमिकी से लेकर निर्णय लेने तक की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा, अदालतों की समस्त कार्यवाही तकनीक के माध्यम से होगी और आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंस से होगी। इसी के साथ उन्होंने ये भी बताया कि, अब राजनीतिक रसूख वाले लोगों को भी किसी तरह छोड़ा नहीं जाएगा।
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