Mahakumbh 2025: अब कुंभ के मेले में कोई नहीं बिछड़ेगा अपनों से…सीएम योगी ने शुरू की ये नई पहल
Mahakumbh 2025: फिल्मी डायलॉग, “लगता है कुंभ मेले में बिछड़े हैं” को अक्सर आप लोगों से किसी न किसी मौके पर सुनते आए होंगे लेकिन अब कुंभ मेले में अपनों से बिछड़ जाने और भी सालों बाद मिलने वाली ये प्रथा खत्म होने जा रही है क्योंकि अब कुंभ मेले में कोई अपनों से नहीं बिछड़ेगा. दरअसल योगी सरकार अब कुंभ मेले में हर व्यक्ति का ध्यान रखेगी और अगर गलती से कोई अपनों से छूट भी जाता है तो उसे जल्द ही उसके अपनों से मिलवा दिया जाएगा.
कुंभ मेले में आने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों को अब भीड़ में खोने का डर नहीं रहेगा, क्योंकि सरकार की यह नई प्रणाली खोए हुए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और शीघ्र उनके परिजनों से मिलाने का भरोसा दे रही है. दरअसल प्रयागराज मेला प्राधिकरण और पुलिस विभाग ने मिलकर इस बार के महाकुंभ मेले में एक उच्च तकनीक से युक्त खोया-पाया पंजीकरण प्रणाली से तीर्थयात्रियों को सुरक्षित करने की योजना बनाई है. यह नई पहल सुरक्षा, जिम्मेदारी और तकनीक का अद्भुत संगम है, जो महाकुंभ मेला को सुरक्षित और सुखद अनुभव बना देगी।
महाकुंभ में होगी ये व्यवस्था
बता दें कि इस बार महाकुंभ में हाई-टेक खोया-पाया केंद्र स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों में खोए हुए व्यक्तियों का डिजिटल पंजीकरण होगा, जिससे उनके परिवार या मित्र आसानी से उन्हें खोजा जा सकेगा. इसके अलावा सभी लापता व्यक्तियों के लिए केंद्रों पर उद्घोषणा की जाएगी। इस तरह से पहली बार होगा जब मेले में फिर से मिलने की गाथा लिखी जाएगी.
12 घंटे के अंदर खोने के बाद मिलेंगे अपने परिजनों से
दरअसल सरकार डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की मदद से जो खोए हुए व्यक्ति होंगे उनके परिजनों से मिलाने के लिए तकनीक का सहारा लेगी. हर खोए हुए व्यक्ति का पंजीकरण तुरंत किया जाएगा और उसकी जानकारी को अन्य केंद्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और एक्स (पहले ट्वीटर) पर भी प्रसारित किया जाएगा. इस तरह से मात्र 12 घंटे के भीतर खोए हुए व्यक्ति को अपनों से मिलवाने की व्यवस्था सरकार कर रही है. पुलिस खोए हुए व्यक्ति को सुरक्षित परिवार से मिलवाएगी.
बच्चों व महिलाओं की होगी सुरक्षा
महाकुंभ में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को अधिक प्राथमिकता दी गई है। अगर कोई बच्चा या महिला खो जाती है और अगर कोई खोए बच्चे को अपना बताता है तो उसे अपने पहचान की पुष्टि करनी होगी ताकि बच्चा या महिला सुरक्षित हाथों में जाए।
इस फिल्म में सुनाई दिया था ये डायलॉग
बता दें कि हिंदी सिनेमा में कुंभ मेले की भीड़ से अलग हुए लोगों की कहानियां अक्सर ही देखने को मिलती हैं. फिल्मों में गंभीर संवाद हो या हास्य, कहीं न कहीं कुंभ मेले में बिछड़ने वाले डायलॉग सुनने को मिल ही जाते हैं। इसी तरह 1943 में आई फिल्म ‘तकदीर’ और 70 के दशक में आई फिल्म ‘मेला’ में भाइयों के मेले में बिछड़ने की कहानी पर्दे पर उतारी गई और फिर बाद में वे मिल जाते हैं. ये कहानियां कहीं न कहीं ये दर्शाती रही हैं कि भीड़ में खो जाने के बाद अपने प्रियजनों से मिल पाना कितना मुश्किल होता है. या फिर उनके परिजन भी अपने खोए व्यक्ति को नहीं खोज पाते हैं.
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