Katyayani Mata: षष्ठी मां कात्यायनी को लगाएं शहद का भोग…कन्याओं को दान करें ये सब

October 18, 2023 by No Comments

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Katyayani Mata: चाहे शारदीय नवरात्र हो या चैत्र की नवरात्र, षष्ठी के दिन माँ शक्ति के छठे स्वरुप कात्यायनी की पूजा का विधान शास्त्रों में दिया गया है। अगर किसी वजह से षष्ठी के दिन माता की पूजा न कर सकें, तो नवरात्र की अष्टमी व नवमी पर माता के सभी स्वरूपों की पूजा कर नवरात्र के सभी दिनों का फल प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रहे कि मां कात्यायनी की पूजा किसी विशेष कार्य के लिए कर रहे हैं तो मन को एकाग्र रखें और किसी भी तरह का छल-कपट मन में किसी के लिए न ऱखें।

ऐसी है माता की छवि
मां कात्यायनी की छवि सुनहरे और चमकीले वर्ण वाली है। माता की चार भुजाएं हैं। वह सदैव रत्न आभूषण से अलंकृत रहती हैं। इस रूप में माँ खूंखार और दानवों पर झपट पड़ने वाली मुद्रा में भी दिखाई देती हैं, जो कि सिंह पर सवार रहती हैं। माँ का आभामंडल विभिन्न देवो के तेज अंशों से मिश्रित इंद्रधनुषी छटा देने वाला है। माँ का यह छठवां विग्रह रूप है। नवरात्र की षष्ठी को भक्तों में माँ के इसी रूप की पूजा-अर्चना व आराधना करने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। प्राणियों में माँ का वास आज्ञा चक्र में माना गया है और योग साधक इस दिन अपना ध्यान आज्ञा चक्र में लगाकर माता की कृपा प्राप्ति करते हैं।

चारो पुरुषार्थ की होती है प्राप्ति
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि माँ के इस स्वरूप में दाहिनी ओर की ऊपर वाली भुजा अभय देने वाली मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा वर देने वाली मुद्रा में दिखाई देती है। बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में माँ ने चंद्रहास तलवार धारण किया है, तो वहीं नीचे वाली भुजा में माता कमल का फूल लिए हुए हैं। एकाग्रचित्त और पूर्ण समर्पित भाव से माँ की उपासना करने वाला भक्त बड़ी सहजता से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष अर्थात इन चारों पुरुषार्थो की प्राप्त कर लेता है। इस तरह वह इस लोक में रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव को प्राप्त कर लेने में सक्षम होता है। मान्यता है कि जो नवरात्र के दिन माता को पूरे मन और श्रद्धा के साथ जप लेता है, उसे शोक, रोग, संताप और भय से धीरे-धीरे मुक्ति मिलती जाती है। माता अपने बच्चों पर सदैव अपना आशीर्वीद बनाए रखती हैं।

इस तरह करें माता को प्रसन्न
पुराणों में मां कात्यायनी की पूजा और ध्यान करने का समय गोधूलि बेला में बताया गया है। मान्यता है कि अगर अविवाहित बेटियां, जो विवाह की इच्छा रखती हों और उनका विवाह नहीं हो पा रहा है तो वे मां कात्यायनी देवी की पूजा पूरे ध्यान और मन से करें। ऐसा करने से विवाह का योग जल्दी बनता है और योग्य वर की प्राप्ति होती है। विवाह की इच्छा रखने वाली बेटियों को चाहिए कि नवरात्र से माता कात्यायनी की पूजा शुरू कर प्रत्येक गुरुवार को भी उनकी पूजा पूरे विधि-विधान से करें। माता को प्रसन्न करने के लिए शहद का भोग लगाएं। इसी के साथ कन्याओं को फूल और फल भेंट में दें।

मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी

आरती
जय जय अंबे जय कात्यानी।
जय जग माता जग की महारानी।।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदानी नाम पुकारा।।

कई नाम है कई धाम है।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त है कहते।।
कात्यायनी रक्षक काया की ।
ग्रंथ काटे मोह माया की ।।

झूठे मोह से छुड़ाने वाली ।
अपना नाम जपने वाली ।।
बृहस्पति वार को पूजा करियो ।
ध्यान कात्यायनी का धरियो ।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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