Political News: शाही इमाम के बयान पर खड़ा हुआ बवाल, कहा, “मुस्लिम महिलाएं चुनाव लड़ेंगी तो सुरक्षित नहीं रहेगा हिजाब”, महिला आयोग ने की गिरफ्तारी की मांग, देखें वीडियो
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अहमदाबाद के शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी कहते हुए दिख रहे हैं कि औरतों को टिकट नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में मुस्लिम महिलाओं को टिकट देना इस्लाम के खिलाफ है और ये धर्म को कमजोर करता है। उनके इस बयान के बाद वह चौतरफा घिर गए हैं।
मुस्लिम महिलाओं को लेकर यह बयान उन्होंने 4 दिसंबर को न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए। यह बयान शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले दिए। फिलहाल सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और न केवल मुस्लिम महिलाओं बल्कि समाज के अन्य लोग भी उनकी इस टिप्पणी का विरोध कर रहे हैं। वहीं इस बयान के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने पुलिस से गिरफ्तार करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि महिलाओं के प्रति इतनी घृणा क्यों है शाही इमाम साहब?
जानें क्या कहा था शाही इमाम ने
रविवार को ANI से बात करते हुए शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने कहा था, “देखिए, इस्लाम की बात अगर आपने लाई है, तो मैं आपको एक बात बताऊं अभी आपने देखा लोग नमाज पढ़ रहे हैं। यहां एक भी औरत नजर आई? और इस्लाम में नमाज की सबसे ज्यादा अहमियत है। अगर औरतों का इस तरह से लोगों के सामने आना इस्लाम में जायज होता तो उनको मस्जिद में आने से नहीं रोका जाता। मस्जिद में आने से रोक दिया क्योंकि इस्लाम में औरतों का एक मकाम है। तो इसलिए जो कोई भी औरतों को टिकट देते हैं वह इस्लाम के खिलाफ बगावत करते हैं। मर्द नहीं है क्या जो आप औरतों को ला रहे हैं। इससे हमारा मजहब कमजोर होगा।”
सिद्दीकी ने आगे कहा, ” धर्म कमजोर इसलिए होगा, कर्नाटक में हिजाब का मसला चला उस पर काफी हंगामा हुआ, अब जाहिर बात है कि अगर अपनी औरतों को विधायक, पार्षद वगैरह बनाएंगे तो इससे हम हिजाब को महफूज नहीं रख सकेंगे। इस मुद्दे को हम नहीं उठा सकेंगे। अगर हम सरकार के सामने इस मुद्दे पर सवाल करेंगे तो सरकार कहेगी कि आपकी औरतें विधानसभा में आ रही हैं, संसद में आ रही हैं और निगम परिषद में आ रही हैं। स्टेज पर लोगों से चुनाव में अपील कर रही हैं। चुनाव लड़ने के लिए हर एक के पास घर-घर जाना पड़ेगा। इसलिए मैं इसका सख्त विरोधी हूं। चुनाव लड़ाना है तो मर्द को टिकट दीजिए। हां, जहां कानून है कि औरतें ही चुनाव लड़ सकती हैं वहां टिकट दीजिए।”
इस तरह लोग कर रहे हैं विरोध
मशहूर इतिहासकार इरफान हबीब ने शाही इमाम के इस बयान पर विरोध दर्ज करते हुए कहा है कि, “यह तथाकथित शाही इमाम न तो इस्लाम जानते हैं और न ही इसका इतिहास। वर्तमान राजनीति और समाज से कोई वास्ता नहीं है। शर्म की बात है कि ऐसे लोगों को मुसलमानों की ओर से बोलने का मौका मिलता है।” वहीं भाजपा की नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि शाही इमाम “इस्लाम का अपना संस्करण बनाना चाहते हैं” इल्मी ने सवाल किया कि क्या शाही इमाम राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, “यह अजीब है कि कोई कह रहा है कि मुस्लिम महिलाओं को टिकट नहीं मांगना चाहिए। क्या वह महिलाओं को अदृश्य बनाना चाहते हैं? क्या वह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी नहीं चाहते हैं?” उन्होंने कहा, “क्या वह अपने धर्म के बारे में कुछ जानते हैं?”