Congress President Election: क्या खड़गे के सिर सजेगा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का ताज, या फिर थरूर मारेंगे बाजी, जानें क्यों है मल्लिकार्जुन को जीत का पूरा भरोसा, सस्पेंस को भेदते ये 6 प्वाइंट्स
कौन बनेगा कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष, शशि थरूर या फिर मल्लिकार्जुन खड़गे। फिलहाल अभी स्पष्ट रूप से इस पर कह पाना मुश्किल है। क्योंकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कदम पीछे खींच लेने के बाद अध्यक्ष पद का समीकरण थोड़ा साफ नजर आ रहा था लेकिन नामांकन के आखिरी दिन उस वक्त अध्यक्ष पद के लिए सस्पेंस पैदा हो गया, जब इस रेस में मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम की भी एंट्री हो गई, जो कि थरूर पर हर तरह से भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए बयान में खड़गे ने कहा कि मैं उन सभी नेता, कार्यकर्ता, प्रतिनिधी और राज्यों के नेताओं का शुक्रिया करता हूं जो मेरे साथ मेरे नामांकन के समय मौजूद रहे। 17 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे और मुझे उम्मीद है की मैं यह चुनाव जीतूंगा। बता दें कि कांग्रेस के कुल 30 नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम का प्रस्ताव रखा है। कांग्रेस के 10 नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पार्टी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नामांकन का समर्थन किया है।
फिलहाल इस समय राजनीतिक गलियारों में लोगों कि नजर कांग्रेस पार्टी पर ही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का चयन होने की प्रक्रिया जारी है। इस प्रक्रिया के तहत फिलहाल नामांकन भरे जा रहे हैं और 30 सितंबर को नामांकन के लिए आखिरी दिन तय किया गया है। इस आखिरी दिन लग रहा था कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चेहरा साफ हो जाएगा, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे का नामांकन होते ही थरूर के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं, क्योंकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि खड़गे आदिवासी चेहरा हैं और कांग्रेस भी भाजपा की तरह ही आदिवासी कार्ड खेलना चाहती है। इसीलिए खड़गे को आगे किया गया है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि 17 अक्टूबर को अध्यक्ष के नाम की घोषणा तो एक औपचारिक प्रक्रिया होगी, उनके नाम पर इस पद के लिए मोहर लग गई है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो कांग्रेस के अगले अध्यक्ष खड़गे ही होंगे।
सोनिया से मिलने के बाद लिया फैसला
हालांकि दक्षिण भारत से कांग्रेस पद के लिये पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पहले ही अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन अब उन्हीं के साथी कांग्रेसी नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे का नाम भी शामिल हो गया है। खड़गे की दावेदारी को भी मजबूत माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने यह फैसला शुक्रवार को सोनिया गांधी से मिलने के बाद लिया है।
जानें कैसे टक्कर दे रहे हैं खड़के, थरूर को
पार्टी सूत्रो के मुताबिक मलिकार्जुन का नाम कांग्रेस के कद्दावर और सबसे विश्वसनीय लोगो में से एक माना जाता है। इसके पीछे उनका राजनीतिक रिकॉर्ड बताया जा रहा है, जिसके अंदर पार्टी ने जब भी उन्हें कोई जिम्मेदारी दी है उन्होंने उसे बखूबी निभाया है फिर साल 2014 में लोकसभा के विपक्षी नेता हो या अभी राज्यसभा के विपक्षी नेता की बागडोर हो। उन्हें हमेशा गांधी परिवार के साथ किसी भी परिस्थिति में कंधे से कंधा मिलाकर चलते देखा गया है। हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़, एक दलित नेता की छवि, किसी विवाद का हिस्सा न बनने की शैली और पार्टी को साथ लेने का हुनर उन्हें एक बेहतरीन नेता बनाता है। अर्थात कुल मिलाकर उनकी छवि साफ-सुथरी है।
गरीब परिवार के होते हुए भी सत्ता में बनाई अलग पहचान
मल्लिकार्जुन खड़गे गरीब परिवार से आते हैं। उन्होंने अपने गांव से ही पढ़ाई की शुरुआत की और फिर पढ़ाई पूरी करने के लिये शहर पहुंचे। शहर पहुंचकर उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की और इसी दौरान उन्होंने छात्रसंघ नेता के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाकर राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वकालत पूरी करने के बाद खड़गे ने प्रैक्टिस जरूर की लेकिन इस दौरान वो सक्रिय रूप से मजदूरों के हक को लेकर आंदोलनों से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने मजदूरों की ओर से कई केस लड़े और जीते भी, शायद यही वजह थी कि जब मनमोहन सरकार थी तो उन्हें श्रम मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था।
दमदार रहा है राजनीतिक करियर
कर्नाटक में मल्लिकार्जुन खड़गे का एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है जहां पर वो 9 बार विधायक और दो बार लोकसभा सदस्य के रूप में जीत हासिल कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी में खड़गे का कद किसी पहचान का मोहताज नहीं है लेकिन इसके बावजूद वो आम जीवन में बिल्कुल शांत और सरल व संतुलित दिखाई देते हैं। वहीं जब भाषण देने के लिये माइक पकड़ते हैं तो बाकी नेताओं से काफी अलग नजर आते हैं। पढ़ाई जीवन में मल्लिकार्जुन खड़गे एक बेहद ही औसत छात्र रहे थे लेकिन खेल में उनकी काफी रूचि थी और इसीलिये वो कबड्डी, फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में हिस्सा लेते हुए नजर आते थे।
भगवान बुद्ध को मानते हैं आदर्श
खड़गे भगवान बुद्ध को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं के आदर्शों को अपनाते हैं। यही वजह है कि वो अपने वादे के पक्के है और अपनी बात से कभी मुकरते नजर नहीं आते हैं। ऐसा माहौल राजनीतिक परिवेश में बहुत कम ही देखने को मिलता है। मल्लिकार्जुन खड़गे का पूरा नाम मपन्ना मल्लिकार्जुन खड़गे है। उनका जन्म 12 जुलाई 1942 को हैदराबाद के बीदर जिले में तब हुआ था जब वो निजाम की रियासत में आता था। फिलहाल अब ये हिस्सा कर्नाटक में आता है। खड़गे के परिवार की बात करे तो उनके परिवार में पत्नी राधाबाई के अलावा तीन बेटियां और दो बेटे हैं।
ऐसा करने वाले छठे नेता हो सकते हैं खड़गे
अगर खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष पद को हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं तो ऐसा छठी बार होगा कि गैर गांधी परिवार का नेता अध्यक्ष बना हो और वो भी दक्षिण भारत से ताल्लुक रखता हो। इनसे पहले पी सीतारमैय्या, एस निजलिंगप्पा, नीलम संजीव रेड्डी, के कामराज और पीवी नरसिम्हा राव भी अध्यक्ष रह चुके हैं। जिस तरीके से खड़गे को कांग्रेस के दिग्गज नेताओं, गांधी परिवार का विश्वास और साथ मिल रहा है उसे देखते हुए उनका अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। (फोटो-एएनआई)