प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों ने पार की क्रूरता की सारी हदें…दलित बच्चे की पैंट में डाल दिया बिच्छू
Shimla News: सोशल मीडिया पर शिमला की एक खबर चर्चा का विषय बनी हुई है. दलित छात्र के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने आठ साल के एक दलित बच्चे के साथ बार-बार मारपीट की औरऔर उसकी पैंट में बिच्छू डाल दिया. फिलहाल इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है.
यह खबर रविवार को सामने आई है. इस घटना को लेकर शिमला पुलिस ने एक बयान जारी किया है जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. घटना शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के खड़ापानी इलाके में स्थित एक प्राथमिक स्कूल की है. मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित छात्र कक्षा एक में पढ़ता है.
बच्चे के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि प्रधानाध्यापक देवेंद्र, शिक्षक बाबू राम और कृतिका ठाकुर पिछले करीब एक साल से उनके बेटे को लगातार पीट रहे हैं. बच्चे कि लगातार पिटाई होने की वजह से बच्चे के कान से खून बहने लगा और उसका कान का पर्दा भी फट गया था. पिता ने बताया कि शिक्षकों की क्रूरता यहीं नहीं रुकी आरोपी बच्चे के स्कूल के शौचालय में ले गए और उसकी पैंट में जिंदा बिच्छू डाल दिया.
इन धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट
पुलिस ने बताया है कि पीड़ित की ओर से शिकायत मिलने के बाद भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, गलत तरीके से बंधक बनाना, आपराधिक धमकी और समान इरादे से आपराधिक कृत्य के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा शिक्षकों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी आरोप लगाया गया है. इसके तहत जबरन कपड़े उतारने, मानवीय गरिमा का अपमान करने और अनुसूचित जाति/जनजाति के खिलाफ अपराध को जोड़ा गया है. साथ ही किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों के प्रति क्रूरता का आरोप भी लगाया गया है.घटना को लेकर पुलिस ने जारी बयान में कहा कि मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी करेंगे.
पीड़ित की ओर से धमकियों का भी आरोप
पीड़ित बच्चे के पिता ने शिक्षकों पर बच्चे को धमकाने का आरोप लगाया है. पिता ने कहा कि शिक्षकों ने बच्चे से कहा कि अगर उसने घर पर सारी बातें बताई तो उसे गिरफ्तार कर दिया जाएगा. इसी के साथ ही पीड़ित बच्चे के पिता ने ये भी आरोप लगाया है कि बीते 30 अक्टूबर को प्रधानाध्यापक ने कथित तौर पर बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी भी दी थी. यही नहीं शिक्षकों की हिम्मत इतनी बढ़ी हुई थी कि परिवार को भी मामला सार्वजनिक न करने की चेतावनी दी थी. साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने की भी धमकी दी थी.
शिक्षिका का पति अवैध रूप से पढ़ा रहा है स्कूल में
पीड़ित बच्चे के पिता ने आरोप लगाते हुए कहा है कि कृतिका ठाकुर का पति नितीश ठाकुर पिछले एक साल से अवैध रूप से स्कूल में पढ़ा रहा है और स्कूल में लगातार जातिगत भेदभाव किया जा रहा है. उसने ये भी आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल में भोजन के दौरान नेपाली और हरिजन छात्रों को राजपूत छात्रों से अलग बैठाया जाता है.
पहले भी हुई है कई घटनाएं
दें कि रोहड़ू में छात्रों पर शिक्षकों द्वारा लगातार हमला करने या जातिगत भेदभाव की खबरें सामने आ रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहड़ू के लिमड़ा गांव में एक 12 साल के दलित लड़के ने कथित तौर पर सुसाइड कर लिया था. मीडिया में खबरें सामने आई कि कुछ उच्च जाति की महिलाओं ने उसके घर में घुसकर उसे गौशाला में बंद कर दिया था. तो वहीं पिछले हफ्ते गवाना इलाके के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को एक छात्र को कांटेदार झाड़ी से पीटने का आरोप लगने के बाद निलंबित कर दिया गया था.
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