Solar Eclipse: सूर्यग्रहण आज… गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान
Solar Eclipse: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितम्बर यानी पितृपक्ष की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि पितरों की विदाई कैसे होगी क्योंकि हिंदू धर्म में ग्रहण लगने से सूतक माना जाता है और पूजा-पाठ व कर्मकांड आदि बंद हो जाते हैं लेकिन यहां चिंता करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण है.
जिसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को ढकेगा. यहाँ बता दें कि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और सूतक भी नहीं माना जाएगा. हालांकि ज्योतिष आचार्य सलाह देते हैं कि अगर सूतक काल नहीं भी लग रहा है फिर भी आप ग्रहण से पहले कर्मकांड कर लें. यानी पितरों को विदा करने का काम सुबह जल्दी ही कर लें. तो वहीं आचार्य सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएं भी अपना ध्यान रखें और सूर्यग्रहण के दौरान बाहर बिल्कुल भी न निकलें. भले ही ग्रहण आपके क्षेत्र में न लग रहा हो फिर भी जो भी निषेध कार्य है, उसका पालन करें.
हिंदी पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण (Surya grahan 2025) 21 सितंबर को देर रात 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन ब्रह्म मुहूर्त में 03 बजकर 23 मिनट पर होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इस वजह से सूतक काल मान्य नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक तभी माना जाता है, जब ग्रहण हमारे क्षेत्र में दिखाई देता है। इसलिए किसी भी तरह का कर्मकांड इस दौरान भी हो सकेगा.
इन बातों का रखें ध्यान
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दौरान किसी भी व्यक्ति को खासकर गर्भवती महिलाओं को नकारात्मक ऊर्जा से बचना चाहिए. ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। ऐसे में मानसिक शांति बनाए रखने के लिए वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए।
भले ही सूतक काल न लगा हो फिर भी खाने-पीने का परहेज करें.
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं घर के अंदर ही रहें. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके और पूजा-पाठ करके ही कोई काम शुरू करना चाहिए।
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं पूजा-पाठ न करें और न ही भोजन करें और सोने से भी बचें.
रसोई संबंधित कोई काम गर्भवती महिलाएं न करें.
चाकू या फिर किसी भी नुकीली चीजों जैसे सुई आदि का इस्तेमाल न करें.
सूर्य ग्रहण को कभी भी नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए।
ग्रहण के दौरान घर के सभी खिड़की-दरवाजे बंद रखें।
ग्रहण के दौरान नकारात्मकता वाले स्थान यानी शमशान आदि पर न जाएं।
सूर्य ग्रहण के दौरान बाल और नाखून काटने और यात्रा करने की भी मनाही होती है।
सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी की पूजा या तुलसी में जल अर्पित न करें. तुलसी के पत्ते भी इस दौरान न तोड़ें.
भोजन-पानी-दूध आदि में डालने के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें क्योंकि ग्रहण या फिर रविवार या फिर एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते.
करें ये काम
सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर में एक स्थान पर शांत जगह पर बैठकर अपने इष्टदेव का ध्यान कर सकती हैं।
भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्रों का जप भी मन ही मन कर सकती हैं. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा आपसे दूर होगी. साथ ही शिशु के ऊपर सूर्य ग्रहण का बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा.
सूर्य पूजन मंत्र
ग्रहण के समाप्त होने पर स्नान आदि के बाद इन मंत्रों का जाप करें.
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।।
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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