इस पर ब्राह्मण कन्या ने ऐसा ही किया जिससे उसका पति जीवित हो उठा. इस तरह से ये कथा सुनाकर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि यदि तुम भी इतनी ही श्रद्धा और विधि पूर्वक ये व्रत करोगी.
इस व्रत में सुहागिन महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देकर जल-भोजन ग्रहण करती हैं.