Karwa Chauth Katha: यहां पढ़ें करवा चौथ की तीन कथाएं…जानें मुसीबत के वक्त श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को क्या दी थी सलाह?
Karwa Chauth Katha: सुहागिन महिलाओं के बीच करवा चौथ का व्रत बहुत ही लोकप्रिय है. हालांकि अब वो कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को करने लगी हैं, जो किसी को मन ही मन अपना पति मान चुकी हैं. वैसे ये व्रत सौभाग्यवती महिलाओं का ही है. इस दिन महिलाएं पति की लम्बी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. मान्यता है कि इस व्रत के बारे में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को बताया था और भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया था. इस लेख में तीन कथाएं हैं, जिनको पूजा के दौरान पढ़ा जा सकता है-
करवा चौथ की पहली कथा (Karwa Chauth Katha)
एक बार अर्जुन नीलगिरी पर तपस्या करने गए. इस दौरान द्रौपदी के मन में विचार आया कि हर समय अनेक प्रकार के विघ्न बाधाएं आती रहती हैं. अर्जुन यहां पर हैं नहीं, इसलिए कोई उपाय किया जाए. यह सोचकर द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया और फिर भगवान वहां पर प्रकट हो गए. इसके बाद द्रौपदी ने उनसे अपनी समस्या के निदान के लिए उपाय पूछा.
इस पर श्रीकृष्ण ने कहा-एक बार पार्वती जी ने भी शिव जी से यही सवाल किया था तो उन्होंने कहा था कि करवा चौथ का व्रत गृहस्थी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाएं दूर करता है. इस व्रत से पित्त प्रकोप भी दूर होता है. इसके लिए श्रीकृष्ण जी ने द्रौपदी जी को एक कथा सुनाई-
प्राचीनकाल में एक धर्मपरायण ब्राह्मण के सात बेटे और एक बेटी थी. बेटी के बड़े होने पर उसका विवाह कर दिय गया. कार्तिक की चतुर्थी को कन्या ने करवा चौथ का व्रत रखा. शाम तक चंद्रमा निकलने से पहले ही उसे भूख-प्यास लगने लगी और उसका मुख मुरझा गया. इस पर लड़ली बहन का ये हाल देखकर सातो भाई दुखी हो गए और अपनी बहन को परेशान नहीं देख सकते थे. इस पर भाइयों ने उपाय सोचा.
पहले तो भाइयों ने बहन को चंद्रमा निकलने से पहले ही भोजन करने को कहा तो बहन ने मना कर दिया. इस पर भाइयों ने स्नेह में आकर पीपल के पेड़ की आड़ में प्रकाश कर दिया और कहा कि देखो चंद्रोदय हो गया है और अब अर्घ्य देकर भोजन कर लो. इस पर कन्या ने उसे चंद्रमा समझकर अर्घ्य दिया और फिर भोजन कर लिया. तो दूसरी ओर जैसे ही कन्या ने भोजन किया दूसरी ओर उसके पति का निधन हो गया. इस पर वह रोने लगी. इसी दौरान दैवयोग से इंद्राणि देवदासियों के साथ वहां से जा रही थीं और फिर रोने की आवाज सुनकर वह कन्या के पास गईं और उससे रोने का कारण पूछा तो उसने पूरी बात बता दी. इस पर इंद्राणी ने कहा कि तुमने करवा चौथ के पहले भोजन कर लिया इसीलिए ऐसा हुआ है. अगर तुम अपने पति की सेवा करते हुए पूरे 12 महीने की चौथ को यथाविधि व्रत करो, इसके बाद करवा चौथ पर विधिवत गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय के साथ ही चंद्रमा का पूजन करो तथा चंद्रदय के बाद अर्घ्य देकर अन्न-जल ग्रहण करो तो तुम्हारा पति फिर से जीवित हो जाएगा.
इस पर ब्राह्मण कन्या ने ऐसा ही किया जिससे उसका पति जीवित हो उठा. इस तरह से ये कथा सुनाकर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि यदि तुम भी इतनी ही श्रद्धा और विधि पूर्वक ये व्रत करोगी तो तुम्हारे सभी दुख दूर हो जाएंगे और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होगी. इस पर द्रौपदी ने श्रीकृष्ण के कहने पर करवा चौथ का व्रत रखा. इसी व्रत का प्रभाव था जिससे महाभारत के युद्ध में कौरवों की हार तथा पांडवों की जीत हुई थी.
दूसरी-करवा की कथा

तीसरी- गणेश जी की कथा



