इस पर नारद दी बोले कि यदि श्रीकृष्ण के बराबर सोना व रत्न दे दो तो उनको छोड़ देंगे.
राजा मुचुकुन्द ने राजोचित काष्ठों से शोभन का दाह-संस्कार करवाया। चंद्रभागा पति का पारलौकिक कर्म करके अपने पिता के ही घर ही रहने लगी।
ये तो सभी जानते हैं कि तुलसी पौधे की महिमा वैद्यक ग्रंथों के साथ-साथ धर्मशास्त्रों में भी बढ़-चढ़कर की गई है।