Tulsi Ekadashi Katha: व्रत रखने से राजा के दामाद की हो गई मृत्यु…पढ़ें रमा एकादशी कथा-Video
Tulsi Ekadashi Katha Video: श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा हमेशा यही सोचा करती थीं कि रूपवती होने के कारण ही श्री कृष्ण अन्य पटरानियों की अपेक्षा उनसे अधिक स्नेह करते हैं. एक दिन जब नारद जी उधर से निकले तो सत्यभामा ने कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए कि अगले जन्म में श्रीकृष्ण की मुझे पतिरूप में मिलें.
इस पर नारद जी ने कहा कि नियम है कि यदि कोई अपनी प्रिय वस्तु इस जन्म में दान करे तो वह उसे अगले जन्म में प्राप्त हो जाती है. इस पर तुम मुझे श्रीकृष्ण को दान कर दो तो वह तुम्हें अगले जन्म में जरूर मिलेंगे. इस पर सत्यभामा ने श्रीकृष्ण को दान कर दिया. नारद जी जब श्रीकृष्ण को लेकर चलने लगे तो अन्य रानियों ने रोक लिया.
इस पर नारद दी बोले कि यदि श्रीकृष्ण के बराबर सोना व रत्न दे दो तो उनको छोड़ देंगे. इस पर तराजू के एक पलड़े में श्रीकृष्ण बैठे तो दूसरे पलड़े में सभी रानियों ने अपने-अपने आभूषण चढ़ाने शुरू कर दिए लेकिन पलड़ा टस से मस नहीं हुआ.
इसके बाद सत्यभामा ने कहा कि मैने यदि इनको दान किया है तो मैं ही उबारुंगी. इस पर उन्होने अपने सारे आभूषण चढ़ा दिए. फिर भी पलड़ा नहीं हिला. ये पूरा समाचार जब रुक्मिणी जी ने सुना तो तुलसी पूजन करके उसकी पत्ती ले आईं. उस पत्ती को पलड़े में जैसे ही रखा, तुला का वजन बराबर हो गया. इसके बाद नारद जी तुलसी दल लेकर स्वर्ग चले गए. रुक्मिणी श्रीकृष्ण की पटरानी थीं. तुलसी के वरदान के कारण ही वह अपने साथ ही सभी रानियों के सौभाग्यकी रक्षा कर सकीं.
माना जाता है कि तभी से तुलसी जी को यह पूज्य पद प्राप्त हो गया कि श्रीकृष्ण उसे सदा अपने मस्तक पर धारण करते हैं. इसीलिए इस एकादशी पर तुलसी जी की भी पूजा की जाती है.
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— Archana Sharma Shukla (@archanasharmas6) November 4, 2026
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