‘हे वासुदेव! अनंत संसाररूपी महासमुद्र में मैं डूब रही या रहा हूं। आप मेरा उद्धार करें, साथ ही अपने अनंतस्वरूप में मुझे भी आप विनियुक्त कर लें। हे अनंतस्वरूप! आपको मेरा बारम्बार प्रणाम है।