Ganesh Chaturthi: अगर भूल से गणेश चतुर्थी पर कर लें चंद्रमा के दर्शन तो इस मंत्र का लें सहारा… ये टोटका भी आजमाएं, महर्षि वेदव्यास की पढ़ें कथा
Ganesh Chaturthi: पौराणिक कथा के मुताबिक गणेश जी का जन्म भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न में हुआ था, इसलिए गणेश जी की पूजा दोपहर में की जाती है. इसीलिए भाद्रपत की शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है और कहीं-कहीं तो ये उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलता है. मुम्बई से लेकर देश के तमाम हिस्सो में इसकी धूम कुछ दिनों पहले से ही दिखाई देने लगती है.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री के मुताबिक, गणेश जी को बुद्धि, विवेक, धन-धान्य, रिद्धि-सिद्धि का कारक माना जाता है. गणेश चतुर्थी पर उनकी पूजा करने से शुभ लाभ की प्राप्ति होती है और समृद्धि के साथ धन वृद्धि भी होती है. माना जाता है कि गणेश जी की पूजा सबसे सरल होती है.
भगवान श्री गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं. शिव के गणों के अध्यक्ष होने के कारण इन्हें गणेश और गणाध्यक्ष भी कहा जाता है. भगवान श्री गणेश मंगलमूर्ति भी कहे जाते हैं क्योंकि इनके सभी अंग जीवन को सही दिशा देने की सीख देते हैं.
जानें क्या सीख देते हैं गणपति?
गणेश जी का मस्तक बहुत बड़ा है। अंग विज्ञान के अनुसार बड़े सिर वाले व्यक्ति नेतृत्व करने में योग्य होते हैं। इनकी बुद्घि कुशाग्र होती है। गणेश जी का बड़ा सिर यह भी ज्ञान देता है कि अपनी सोच को बड़ा बनाए रखना चाहिए।
गणपति की आँखें छोटी हैं। अंग विज्ञान के अनुसार छोटी आंखों वाले व्यक्ति चिंतनशील और गंभीर प्रकृति के होते हैं। गणेश जी की छोटी आँखें यह ज्ञान देती है कि हर चीज को सूक्ष्मता से देख-परख कर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता।
गणेश जी के कान सूप जैसे बड़े हैं इसलिए इन्हें गजकर्ण एवं सूपकर्ण भी कहा जाता है। अंग विज्ञान के अनुसार लंबे कान वाले व्यक्ति भाग्यशाली और दीर्घायु होते हैं। गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं फिर अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेते हैं।
बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं। गणेश जी के सूप जैसे कान से यह शिक्षा मिलती है कि जैसे सूप बुरी चीजों को छांटकर अलग कर देता है उसी तरह जो भी बुरी बातें आपके कान तक पहुंचती हैं उसे बाहर ही छोड़ दें।
महर्षि वेदव्यास की कथा?
आचार्य पीएन पांडेय बताते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर में गाय के गोबर से एवं मिट्टी के गणेश जी स्थापित करना चाहिए. मान्यता है कि हमारा शरीर पंचतत्व से बना है और उसी में विलीन हो जायेगा. इसी मान्यता के आधार पर गणपति जी को अनंत चौदस के दिन विसर्जित कर दिया जाता है। धार्मिक कथा अनुसार महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश जी को लगातार 10 दिनों तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरशः लिखा था। 10 दिन के बाद पश्चात् जब वेदव्यास जी ने आँखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक परिश्रम के पश्चात् गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया है. वेदव्यास जी ने श्री गणेश जी के शरीर का तापमान न बढ़े इसलिए उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया. लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गयी और माटी झरने लगी. तब वेदव्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठण्डा किया था। इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश जी को मनपसंद आहार अर्पित किये तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है। मान्यता है कि जिन घरों में बप्पा का स्वागत किया जाता है और 10 दिनों तक उनकी पूजा होती है, उन घरों पर बप्पा की विशेष कृपा होती है. गणेश जी की कृपा से सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण होते हैं, तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
न करें चंद्रमा के दर्शन?
मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए. यदि भूलवश चन्द्रमा के दर्शन कर भी लें तो उसके निवारणार्थ इस मंत्र का जाप करें।
सिह: प्रसेनम् अवधीत्
सिंहो जाम्बवता हत:
सुकुमारक मा रोदीस्तव
ह्येष स्वमन्तक:
या फिर भूमि से एक पत्थर का टुकड़ा उठाकर पीछे की ओर फेंक दें।
इस तरह करें बप्पा का पूजन
एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थान दें. उस पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. चौकी के पास ही एक कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखकर रख थे. दोनों समय गणपति की आरती, चालीसा का पाठ करें।
ऊं गं गणपतये नमः
इस मंत्र का जाप करें. पान, सुपारी, सिंदूर, लड्डू और दूर्वा से बप्पा की पूजा करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 6 सितम्बर 2024 को दोपहर बाद 03:02 बजे से हो गया है और इसका समापान 7 सितम्बर को शाम 05:37 बजे तक होगा.
चूंकि सनातन धर्म के त्योहार उदयातिथि को लेकर मनाए जाते हैं इसलिए चतुर्थी तिथि 7 सितम्बर की ही मान्य होगी. इस हिसाब से गणेश प्रतिमा की स्थापना का शुभ मुहूर्त 7 सितम्बर को प्रातः 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक है।
भोजपुरी गणेश भक्तिगीत
गणपति के जइसन
गणपति के जइसन
नाही केहू देवता होई।
पहीले पूजा खातिर
उनके नेवता होई।
गौरी के लाल गणेश
पिता हवे महादेव हो।
भक्तन के भला करे ऋद्धि
सिद्धि के हवे पतिदेव हो।
विघ्न हरें मंगल करें
सभ कर खेवता होई।
गणपति के जइसन
नाही केहू देवता होई।
हथीया के सुंड पवले
चमके मथवा पे चंदा।
एक दंत दयावंत बुराई
के डाले गरवा में फंदा।
छप्पर फाड़ देले सबके
जे उनकर सेवता होई।
गणपति के जइसन
नाही केहू देवता होई।
बुद्धि के दाता बाड़े देले
घर लक्ष्मी के वास होई।
सुख शांति मिले हरदम
रहे जहवां गणेश के
निवास होई।
सब कुछ मिले जेकर
नाही केवनो बेवता होई।
गणपति के जइसन
नाही केहू देवता होई।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)