प्रेमानंद महाराज ने इस विवाद को लेकर कहा कि जब हमको विरोध सुनने को मिला तो, मेरा कार्य है कि सभी को सुख देना.
महाराज जी राधा रानी के नाम जप करने की बात कहते हैं. इसी के साथ ही वह युवाओं को सही मार्ग बताते हैं.
अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ था तो संत प्रेमानंद महाराज ने दोबारा पदयात्रा शुरू की थी.