UP के इस जिले में महिलाएं-पुरुष करा रहे हैं नसबंदी…जानें क्या है परिवार नियोजन के स्थायी-अस्थायी साधन?

December 3, 2025 by No Comments

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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार परिवार नियोजन (family planning) का अभियान चलाया जा रहा है. परिवार पूरा होने पर परिवार नियोजन के स्थायी साधन को अपनाकर लोग अपना जीवन बेहतर बना रहे हैं. जानकारों का मानना है कि इससे न केवल मां का स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि परिवार भी खुशहाल होता है.

इसी क्रम में लखनऊ में चलाए जा रहे अभियान के तहत हाल ही में काकोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पर 29 महिलाओं ने नसबंदी (sterilized) करवाई. इसको लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एन.बी.सिंह ने बताया कि सीएचसी काकोरी पर 28 नवम्बर को नियत सेवा दिवस या फिक्स्ड डे सर्विस (एफडीएस) आयोजित किया गया जिसमें सर्जन डॉ. सुरेन्द्र शाही द्वारा 29 महिलाओं का ऑपरेशन किया.

इससे पहले भी 14 नवम्बर को एफडीएस आयोजित हुआ था 16 महिलाओं ने इसे अपनाया था. उन्होंने आगे कहा कि परिवार नियोजन के साधन अपनाने से जहाँ मां स्वस्थ रहती है वहीमातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी आती है. इसी क्रम में सरकार ने परिवार नियोजन के साधनों के लिए बास्केट ऑफ़ च्वाईज का प्रावधान किया है जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के विकल्प मौजूद हैं. दम्पति अपनी इच्छानुरूप किसी भी साधन का चुनाव कर सकते हैं.

महिलाओं को सरकार दे रही है ये सुविधा

मिशन परिवार विकास के अंतर्गत नसबंदी की सेवा अपनाने वाली महिलाओं को 2000 रुपए व आशा को प्रेरक के रूप में 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.

कौन महिला नसबंदी की सेवा नहीं अपना सकती?

जो गर्भवती हो.

जिसके प्रजनन तंत्र में संक्रमण हो.

महिला कब अपना सकती है नसबंदी की सेवा

प्रसव के सात दिन के भीतर.

माहवारी शुरू होने के सात दिन के भीतर.

गर्भपात होने के तुरंत बाद या सात दिन के अंदर.

परिवार नियोजन के स्थायी साधन

महिला नसबंदी

पुरुष नसबंदी

अस्थायी साधन

आईयूसीडी

त्रैमासिक गर्भनिरोधक इन्जेशन अंतरा

साप्ताहिक नॉन हार्मोनल गर्भनिरोधक गोली छाया

माला एन

आकस्मिक गर्भनिरोधक गोली

कंडोम

तीन पुरुषों ने कराई नसबंदी

बता दें कि लखनऊ में 21 नवम्बर से चार दिसम्बर तक पुरुष नसबंदी पखवारा अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में 2 दिसम्बर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एन.के.रोड, चिनहट तथा मलिहाबाद सीएचसी क्षेत्र के एक-एक पुरुषों ने नसबंदी कराई. इसके साथ ही सीएचसी सिल्वर जुबली पर 3 महिलाओं, एन.के.रोड पर 12 महिलाओं तथा सरोजिनी नगर सीएचसी पर 21 महिलाओं ने नसबंदी की सेवा को अपनाया है. यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी.सिंह ने दी.

इस तरह की जाती है पुरुष नसबंदी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पुरुष नसबंदी, नॉन स्केल्प्टेल वेस्क्टोमी (एनएसवी) विधि द्वारा की जाती है जो कि पूरी तरह से सुरक्षित है. उन्होंने आगे कहा कि इसमें प्रशिक्षित सर्जन द्वारा 10 मिनट का एक सरल ऑपरेशन किया जाता है. ऑपरेशन के दो दिन बाद व्यक्ति सामान्य काम तथा एक सप्ताह के बाद भारी काम कर सकता है. नसबंदी की सेवा अपनाने के बाद न तो पुरुषों में कमजोरी आती है और न ही पुरुषों की यौन क्षमता प्रभावित होती है. व्यक्ति वैवाहिक सुख का पूरा आनंद लेता है. नसबंदी अपनाने के तीन माह बाद ही यह प्रभावशाली होती है क्योंकि शुक्राणुवाहिनी में पहले से मौजूद शुक्राणुओं को वीर्य के साथ बाहर निकलने में तीन माह का समय लगता है. नसबंदी की सेवा अपनाने वाले पुरुष को 3000 रुपये तथा प्रेरक को प्रति लाभार्थी 400 रूपये मिलते हैं. पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी की अपेक्षा काफी आसान है.

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