UP News: छात्रों की जान के दुश्मन बने KV BHU के प्रिंसिपल, दो छात्रों को निकाला स्कूल से, एक ने की आत्महत्या, मां लगा रही न्याय की गुहार, नहीं हो रही सुनवाई, विरोध प्रदर्शन को उतरे छात्र, देखें वीडियो
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के परिसर में संचालित केंद्रीय विद्यालय (KV) के प्रिंसिपल दिवाकर सिंह की हठ की कोई सीमा नहीं है। जरा सी बात पर दो बच्चों को स्कूल से निकाल चुके हैं, जिसमें से कक्षा 9 के छात्र मयंक यादव ने अपने भविष्य को दांव पर लगा देख कर मौत को गले लगा चुका है तो वहीं दिवंगत छात्र को न्याय दिलाने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों में से एक विद्यार्थी को भी उन्होंने निकाल दिया है। तो वहीं पुलिस और प्रशासन मूक दर्शक बना सब देख रहा है। इस घटना को एक महीना हो गया है, लेकिन अभी तक केवी उच्चाधिकारियों द्वारा प्रिंसिपल पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

इस पूरे मामले को देखते हुए अपना बेटा खो चुकी मां मुन्नी यादव न्याय के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा है। इससे पहले बहन भी अपने दिंवगत भाई को न्याय दिलाने के लिए खड़ी हो चुकी है। मुन्नी यादव लंका थाने में प्रिंसिपल के खिलाफ तहरीर भी दे चुकी हैं, लेकिन अभी तक प्रिंसिपल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। तो वहीं केवी के उच्चाधिकारियों ने इस सम्बंध में कोई एक्शन लिया है। इस पूरे मामले को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया तो सभी छात्रों में केवल एक के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उसे स्कूल के निकाल दिया। निकाले गए छात्र का नाम उत्कर्ष श्रीवास्तव है और उत्कर्ष इस साल कक्षा 12 में है। अगर उत्कर्ष को फिर से स्कूल में नहीं लिया गया तो उसका पूरा भविष्य खराब हो जाएगा।

मतलब प्रिंसिपल के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण एक बच्चे ने तो अपनी जान खो ही दी है वह दूसरे बच्चे के पीछे भी पड़े हैं। उत्कर्ष का कहना है कि मयंक केवल मोबाइल लेकर स्कूल आ गया था। इस पर वाइस प्रिंसिपल विनीता ने मयंक को स्कूल से ही निकाल दिया। स्कूल में अक्सर ही बच्चों को निकाल देने की धमकी दी जाती है और ये सारा खेल प्रिंसिपल दिवाकर सिंह के कारण हो रहा है। इस पूरे मामले में शिक्षिका सुषमा मंडल भी दोषी हैं। तो वहीं छात्रों ने ये भी आरोप लगाया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ मिलीभगत कर प्रिंसिपल पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि केवी उपायुक्त डी मनिवरणम जांच की बात कहकर पूरे मामले को खींच रहे हैं और साफ तौर पर प्रिंसिपल को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं प्रिंसिपर लगातार कुर्सी पर काबिज होकर नाबालिग छात्रों के साथ तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। दिल्ली में बैठे केवी के जिम्मेदार अधिकारी भी जांच चल रही है कि बात कहकर मामला टालने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं छात्रों का ये भी कहना है कि जब तक प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपर को पद से नहीं हटाया जाता है, तब तक जांच पारदर्शी तरीके से नहीं हो सकती है।
बता दें कि इस पूरे मामले में मदद को सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका ने हाथ बढ़ाया है। उन्होंने मयंक की मां से मुलाकत कर पूरे मामले में उनको न्याय दिलाने की बात कही। इसी के साथ उन्होंने ट्विट करते हुए लिखा है कि, केंद्रीय विद्यालय के छात्र मयंक यादव को न्याय कब मिलेगा ? शिक्षक की प्रताड़ना से जान दे चुके मयंक की मां दर दर की ठोकरें खा रही हैं विनती है इन्हें न्याय मिले। इस बात को लिखकर उन्होंने डीजीपीयूपी को टैग किया है।
देखें क्या बोले जिम्मेदार
इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली में बैठे केवी कमिश्नर निधी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात नहीं की। उनके स्थान पर केवी एडीटर सचिन राठौर ने फोन पर बात की और कहा कि उनको इस पूरे मामले की जानकारी है। इस मामले में उपायुक्त डी मनिवरणम को जांच सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
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