Mulayam Singh Yadav Passed Away: दो दर्जन ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में देखें “धरती पुत्र” के संघर्ष से लेकर अंतिम दिन तक की यात्रा, जानें कैसा था कार्य व व्यवहार, खबर देखें प्वाइंट्स में
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का सोमवार को निधन होने के बाद से ही पूरे उत्तर प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। धरती पुत्र के नाम से जाने जाने वाले मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद से ही राजनीति में “अच्छे सम्बंधों” वाला युग भी खत्म हो गया। बताते हैं कि मुलायम का व्यवहार इतना अच्छा था कि उनके विरोधी भी उनकी आलोचना नहीं कर पाते थे।
पहले पहलवानी, उसके बाद शिक्षक के पेशे में आने वाले श्री सिंह ने जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव देखे। इसी वजह से वह आम लोगों की परेशानियों को झट समझ लेते थे। उनके लिए कई निर्णय देश के लिए मील का पत्थर साबित हुए। खासतौर पर रक्षामंत्री रहते हुए जो निर्णय उन्होंने सेना के लिए किए। वह कई दलों में शामिल रहे और बड़े नेताओं की शागिर्दी भी की। इसके बाद उन्होंने अपना दल बनाया। एक दो बार नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री बने और यूपी की सत्ता संभालकर जनता की भरपूर सेवा की।

यूपी की राजनीति जिस धर्म और जाति की प्रयोगशाला से होकर गुजरी उसके एक कर्ताधर्ता मुलायम सिंह भी रहे। उन्होंने देश को अनगिनत नेता दिए। उनकी ही उंगली पकड़ कर न जाने कितने ही नौसिखियों ने राजनीति की किताब पढ़ी और न केवल नेता बल्कि मंत्री भी बने। बता दें कि उनके पुत्र अखिलेश यादव भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
मालूम हो कि सोमवार को सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर मुलायम सिंह यादव ने मेदांता हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 82 साल के थे। उनके यूरिन संक्रमण, ब्लड प्रेशर की समस्या और सांस लेने में तकलीफ के चलते 1 अक्टूबर को उनको मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से ही उनकी तबीयत लगातार नाजुक बनी रही थी। मंगलवार को दोपहर 3 बजे उनके पैतृक गांव सैफई में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। वहीं बिहार में भी राजकीय शोक की घोषणा लालू यादव की मांग पर की गई है।
ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में देखें श्री सिंह का राजनीतिक सफर

मुलायम सिंह यादव की यह फोटो 1955 की बताई जाती है। तब मुलायम सिंह यादव मैनपुरी के जैन इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थे। तब वह मात्र एक शिक्षक थे। वह राजनीति में नहीं आए थे।

मुलायम चौधरी चरण सिंह के बहुत ही करीबी थे। 1987 में चौधरी चरण सिंह की मौत हो गई। लोक दल दो हिस्सों में टूट गया। एक दल चरण सिंह के बेटे अजित सिंह के साथ चला गया। दूसरा मुलायम सिंह के साथ। 1989 में मुलायम ने जनता दल के साथ नाता जोड़ लिया।

किसानों के लिए किए गए उनके द्वारा कार्यों को लेकर मुलायम सिंह को धरती पुत्र कहा जाता है। किसानों में उनकी जबरदस्त पकड़ रही है। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत से भी मुलायम के अच्छे संबंध थे। दोनों में अक्सर मुलाकात होती रही है। इस तस्वीर में टिकैत के साथ मुलायम दिखाई दे रहे हैं।

मुलायम की दोस्ती भी बेमिसाल रही है, जिससे भी की उसे पूरी शिद्दत से निभाया। इस फोटो में राजनीति के चार दिग्गज नेता नजर आ रहे हैं। शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान।

मुलायम सिंह की चौधरी चरण सिंह के साथ गहरे संबंध रहे हैं। इस फोटो में तब के सूचना राज्यमंत्री सत्यदेव त्रिपाठी भी रहे हैं।

इस तस्वीर में बसपा अध्यक्ष कांशीराम के साथ मुलायम सिंह यादव नजर आ रहे हैं। मुलायम सिंह ने कांशीराम के साथ गठबंधन किया था। उनकी खास बात रही है कि विरोधियों से भी उनके संबंध मजबूत रहे हैं।

इस तस्वीर में मॉरीशस के प्रधानमंत्री का स्वागत करते दिखाई दे रहे हैं मुलायम सिंह। यह फोटो उस वक्त की है जब मुलायम सिंह कोट-पैंट पहना करते थे। हालांकि, बाद में मुलायम सिंह धोती-कुर्ता में ही नजर आए और फिर धोती-कुर्ता ही हमेशा पहनने लगे।

इस फोटो में नेल्सन मंडेला के साथ मुलायम सिंह यादव। साथ में हैं यूपी के तब के राज्यपाल सत्यनारायण रेड्डी।

यह फोटो साल 1996 की बताई जाती है। मुलायम सिंह यादव सांसद बने और केंद्रीय रक्षा मंत्री बनाए गए। रक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने शहीदों की पार्थिव शरीर घर ले जाने का फैसला किया था। इससे पहले शहीदों की सिर्फ टोपी और बेल्ट उनके घर लाई जाती थी। इस फैसले के बाद से ही सेना क्षेत्र से जुड़े लोगों में खासे लोकप्रिय हो गए थे नेता जी।

भाजपा के समर्थन से 5 दिसंबर 1989 में पहली बार मुलायम मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा चरम पर था। रथयात्रा के दौरान मुलायम सिंह से भाजपा के संबंध खराब हो गए।

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव शामिल हुए थे और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए भी आवाज उठाई थी।

इस तस्वीर में फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार और राज बब्बर के साथ मुलायम सिंह यादव, नजर आ रहे हैं।

इस तस्वीर में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ मुलायम सिंह यादव दिखाई दे रहे हैं। श्री सिंह के सम्बंध हर किसी से बहुत ही अच्छे थे।

यह तस्वीर पार्टी स्थापना के पहले अधिवेशन की बताई जाती है। इसमें मुलायम सिंह यादव समेत अन्य नेता दिखाई दे रहे हैं।

श्री सिंह ने 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की नींव रखी। सत्ता में काबिज होने के लिए 1993 में मुलायम सिंह यादव ने बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन कर लिया था।

यह तस्वीर मार्च 2017 की है। योगी आदित्यनाथ शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी से मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मिलवाया था।

आखरी चुनावी जनसभा में जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट से प्रत्याशी लकी यादव के लिए मुलायम सिंह यादव ने वोट की अपील की थी।

मुलायम सिंह शुरुआत में चुनाव प्रचार साइकिल से किया करते थे। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का सिंबल भी साइकिल लिया। मुलायम सिंह जब तक स्वस्थ थे वह साइकिल चलाते रहे हैं।
अब देखें परिवार व नाते-रिश्तेदारों के साथ की तस्वीरें

यह तस्वीर मुलायम सिंह यादव और उनकी पहली पत्नी मालती देवी की है।

इस तस्वीर में मुलायम अपनी मां मूर्ति देवी के साथ नजर आ रहे हैं।

राजनीति में मुलायम सिंह और लालू यादव अच्छे दोस्त रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जो रौब और दबदबा मुलायम सिंह का था वही दबदबा बिहार में लालू का था। बाद में यह दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई।

9 जुलाई को मुलायम की दूसरी पत्नी साधना का निधन हुआ था। ये तस्वीर उसी दिन की है। बताते हैं कि इसी के बाद से मुलायम सिंह की सेहत गिरने लगी थी। वह तभी से बहुत बीमार चलने लगे थे।
देखें मुलायम के जीवन की अंतिम दो तस्वीरें

एक अक्टूबर की रात मुलायम सिंह यादव (नेता जी) को गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। ये तस्वीर 7 अक्टूबर के आसपास ICU की है।

ये तस्वीर 10 अक्टूबर की है। निधन के बाद अखिलेश ने सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा- ‘मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे।’ (सभी तस्वीरें सोशल मीडिया से ली गई हैं।)