UP:अब उत्तर प्रदेश में अपराधी उगलेंगे “सिर्फ सच”, अगस्त महीने से प्रदेश के पांच जिलों में लगने जा रही हैं हाईटेक मशीनें, अपराधियों को लेकर जानें क्या है योगी सरकार का बड़ा टारगेट

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लखनऊ। अब उत्तर प्रदेश (UP) में अपराधी आराम से झूठ बोल कर किसी भी मामले में बचने की कोशिश नहीं कर पाएंगे। क्योंकि प्रदेश के पांच जिलों में झूठ पकड़ने वाली हाईटेक मशीनें (Hitech Machines) लगने जा रही हैं।

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बता दें कि किसी भी अपराधिक घटना में अपराधी का बयान सबसे प्रमुख माना जाता है और उसी के आधार पर कोर्ट उसे सजा सुनाने का निर्णय लेती है, ऐसे में अधिकांश मामलों में अपराधी या तो झूठ बोलकर या फिर झूठे गवाह प्रस्तुत करके आसानी से बच निकलता है। पर अब ऐसा नहीं हो सकेगी।

मालूम हो कि प्रदेश सरकार गंभीर अपराधों पर पर्दा डालकर खुद को निर्दोष साबित करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान चला रही है। जिससे न्याय का पक्ष प्रबल हो और पीड़ित को न्याय को मिल सके। इस कड़ी में सरकार ने गोरखपुर, गाजियाबाद, कन्नौज, प्रयागराज और आगरा में नार्को और लाइ डिटेक्शन टेस्ट लैब खोलने का निर्णय लिया है। पहले चरण में अगस्त महीने को टारगेट पर रखा गया है और इसके तहत पहले हफ्ते से गाजियाबाद, कन्नौज और गोरखपुर में लैब खुलेगी। तो दूसरे चरण में आगरा और प्रयागराज को टारगेट किया गया है। इसके पहले नार्को और लाइ डिटेक्शन (पालीग्राफ) टेस्ट की सुविधा सिर्फ लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में ही है।

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देखें क्या है योगी सरकार का बड़ा टारगेट
बता दें कि योगी सरकार ने अपनी पहली सरकार के दौरान अपराधियों को घुटनों पर लाने के लिए बड़ा अभियान चलाया था। इसके बाद जब वह प्रदेश में दूसरी बार आए तो बुलडोजर अभियान चलाकर बड़े से बड़े अपराधियों को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया। अर्थात पुलिस-प्रशासन के अफसर कुख्यात बदमाशों के खिलाफ 14ए की कार्रवाई कर अपराध से बनी करोड़ों की संपत्ति जब्त कर अपराधियों की आर्थिक रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी। अब टारगेट पर है अपराधियों के मुंह से सिर्फ सच निकलवाना। इसके लिए भी सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। क्योंकि प्रदेश में अधिकांश ऐसे अपराधी, जो कि अब सलाखों के पीछे हैं, कहीं न कहीं से वे जनप्रतिनिधि भी हैं। वह झूठ बोलकर आसानी से भोली-भाली जनता को मूर्ख बना लेते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।

जानें अपराधी कैसे बोलने लगेगा सच
जानकारों के मुताबिक झूठ पकड़ने की मशीन के टेस्ट में फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ ही एक फिजीशियन डाक्टर का भी होना आवश्यक होता है। इसमें अपराधी को लैब में बिठाया जाता है और फिजीशियन एक घोल अपराधी को पिलाते हैं, जिसके बाद वह अर्ध निद्रा में चला जाता है। उसके समक्ष एक्सपर्ट संबंधित घटना का वर्णन करते हैं, इसके बाद ही अपराधी से सच उगलवाने का सिलसिला भी शुरू होता है। या ये कहें कि अपराधी खुद ही घटना से जुड़ी सही जानकारी देने लगता है।

देखें कैसे काम करता है लाइ डिटेक्शन अथवा पालीग्राफ टेस्ट
इस टेस्ट के दौरान अपराधी को बैठाकर उसे कुछ ईसीजी टेस्ट की तरह कुछ यंत्र लगाए जाते हैं। फिर एक्सपर्ट उससे घटना से संबंधित सवाल करते हैं। अपराधी जवाब देता है। अगर वह झूठ बोल रहा होता है तो उसकी पल्स बढ़ने लगती है। इसका ग्राफ सामने स्क्रीन पर स्पष्ट दिखाई देने लगता है। इस तरह की तकनीकि से अपराधी का झूठ पकड़ा जाता है।

देखें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
विधि विज्ञान प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश निदेशक अतुल कुमार मित्तल बताते हैं कि नार्को और लाइ डिटेक्शन टेस्ट प्रदेश में अभी तक केवल लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में होता था। सरकार के निर्देश पर अगस्त से यह टेस्ट पहले चरण में कन्नौज, गोरखपुर, गाजियाबाद में शुरू होगा। दूसरे चरण में प्रयागराज और आगरा में ये व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।