क्या अब पुलिस से न्याय के लिए आम जनता को भी यही करना पड़ेगा जो ITBP के जवानों ने किया…? जानें क्या है मामला-Video

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ITBP Jawan Kanpur Case: भ्रष्टाचार किस हद तक सिर चढ़कर बोल रहा है इसका जाता उदाहरण उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है. यहां आईटीबीपी का जवान विकास सिंह अपनी मां निर्मला देवी के कटे हाथ को लेकर करीब तीन दिन तक थाना-पुलिस का चक्कर लगातार रहा लेकिन उसके न्याय नहीं मिला.

जबकि पुलिस को सिर्फ एक रिपोर्ट दर्ज कर कृष्णा अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई करनी थी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी इस मामले में अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

इसी बीच किसी ने जवान के कटे हाथ लेकर घूमने की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जिससे पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया लेकिन न्याय फिर भी नहीं मिला. इस पर अर्धसैनिक बल ITBP के अन्य जवानों में भी रोष व्याप्त हो गया नतीजतन न्याय पाने के लिए करीब 100 जवानों को पुलिस कमिश्नर ऑफिस जाना पड़ा.

शनिवार को सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि जवानों ने पूरे कमिश्नर ऑफिस को घेर रखा है और चप्पे-चप्पे पर हथियारबंद जवान तैनात हैं, पुलिस इस दौरान कहीं भी नहीं दिखाई दे रही है, मानो पुलिस की घिघ्घी बंध गई हो. शनिवार की सुबह नजारा देखने ही लायक था, पूरे परिसर में हड़कंप मचा हुआ था.

इसके बाद इस पूरे घटनाक्रम पर आईटीबीपी कानपुर कमांडेट गौरव प्रसाद और पुलिस कमिश्नर व सीएमओ के साथ लम्बी बातचीत चली. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी से इस पूरे मामले में दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है.

तो वहीं मीडिया में कमिश्नर ऑफिस के घेराव की बात वायरल होने पर एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा ने अर्धसैनिक बल के जवानों द्वारा कमिश्नरेट परिसर को घेरने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि पीड़ित जवान बात करने के लिए अपने कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आए थे.

इसी दौरान उनके साथी बाहर खड़े थे. मामले पर बात हो गई है जवानों को वापस भेज दिया गया है. इस सम्बंध में अधिकारियों ने मीडिया में दिए बयान पर कहा कि तथ्यों के आधार पर जांच होगी और अगर लापरवाही साबित होती है तो दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

कमिश्नर ने बताया कि आईटीबीपी के जवान कुछ दिन पहले आवेदन लेकर आए थे और अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया था कि उनकी मां का हाथ काटना पड़ा. चूंकि मामला स्वास्थ्य विभाग का था इसलिए आवेदन मुख्य चिकित्सा अधिकारी के यहां भेज दिया गया था.

उनके अनुसार डॉक्टरों की कमेटी गठित कर दी गई है और इस मामले के सभी पहलू की जांच कराई गई थी और इसी के बाद रिपोर्ट जो आई, उस पर बात करने के लिए जवान अपने अधिकारियों को लेकर आया था और उसने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी. फिलहाल अब सीएमओ और जवान के बीच बात हो गई है और मामले में फिर से जांच कराई जा रही है. जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या बोले आईटीबीपी के कानपुर कमांडेंट?

इस पूरे मामले में आईटीबीपी के कानपुर कमांडेंट गौरव प्रसाद ने भी पुलिस कमिश्नर ऑफिस के घेराव की बात से इंकार किया है और कहा है कि हम मामले पर बात करने आए थे. पुलिस कमिश्नर से अप्वाइंटमेंट लिया गया था. मैं अंदर बैठा था. इसी दौरान हमारे जवान बाहर खड़े थे. शायद इसे गलत रूप में ले लिया गया है. घेराव की बात निराधार है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में पुलिस कमिश्नर की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है.

सीएमओ बोले…

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि आपस में हमारी बात हो गई है. जांच रिपोर्ट दी गई है, वह सही है, लेकिन जिन बिंदुओं पर आज बात हुई है, उन पर फिर से जांच की जाएगी. इसके बाद फाइनल जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में तैनात है पीड़ित जवान

बता दें कि पीड़ित जवान विकास सिंह आईटीबीपी में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं और मूल रूप से फतेहपुर के अलीमऊ गांव के रहने वाले हैं. वर्तमान में मौजूदा समय में उनकी पोस्टिंग महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विकास ने बताया था कि उनकी मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में दिक्कत थी और उन्हें कब्ज और कमजोरी की भी शिकायत थी. वह पहले तो मां को आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर लेकर गए लेकिन वहां प्राथमिक उपचार के बाद आईटीबीपी के पैनल में शामिल अस्पताल यानी हायर सेंटर रेफर किया गया था. इसके बाद इलाज के लिए कानपुर के एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे जहां मां को वेंटीलेटर पर रख दिया गया.

विकास ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया गया जिससे उनका एक हाथ काला पड़ गया और सूजन भी लगातार बढ़ती जा रही थी. मां की हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड बैकुंठपुर स्थिति दूसरे निजी अस्पताल में एडमिट कराया तो अस्पताल ने कहा कि अगर हाथ नहीं काटा तो उनको बचा नहीं पाएंगे. इसलिए मां का हाथ काटना पड़ा.

तो वहीं इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर एक चर्चा छिड़ गई है और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि क्या भ्रष्टाचार ने इस कदर अपनी जड़ें जमा ली हैं कि देश की रक्षा करने वाले जवानों की समस्या को भी पुलिस नहीं सुन रही है. सवाल ये भी खड़े किए जा रहे हैं कि इस तरह से तो आम जनता का और भी बुरा हाल होगा.

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