Lucknow: संस्कृत में छात्राओं की होनी चाहिए निष्ठा…“गृहे गृहे संस्कृतम्” योजना के मईमासीय द्वादिवसीय कक्षाओं का समापन

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Lucknow: उत्तर प्रदेश शासन के स्वायत्तशासी उत्तरप्रदेश संस्कृत संस्थानम् द्वारा संचालित “गृहे गृहे संस्कृतम्” योजना के अंतर्गत संस्कृत भाषा शिक्षण कक्षाओं के मईमासीय द्वादशदिवसीय कक्षाओं का ऑनलाइन समापन शनिवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 33 जनपदों से जुड़े करीब 35 शिक्षण केंद्रों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष मनीष चौहान एवं निदेशक प्रेमेन्द्र कुमार गुप्त के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में योजना प्रभारी भगवान सिंह चौहान, आमंत्रित वक्ता धीरज मैठाणी तथा समन्वयक अनिल गौतम उपस्थित रहे।

लखनऊ जनपद के श्रीमद् दयानन्द बाल शिक्षा सदन, मोती नगर लखनऊ में प्रधानाध्यापिका रत्ना प्रकाश ने कहा कि हमारे यहां आयोजित शिविर में संस्थान द्वारा प्रेषित शिक्षक / शिक्षिका डा. प्रेरिका अग्रवाल की पाठन पद्यति से हमारे छात्र छात्राएं संस्कृत संभाषण से लाभान्वित हुए।

धीरज मैठाणी ने कहा कि संस्कृत को व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षण को केवल व्याकरण तक सीमित न रखकर संवाद, कहानी, गीत, अभिनय, खेल तथा तकनीकी माध्यमों से जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वेदांग में शिक्षा और पाणिनि शिक्षा से इस योजना का प्रगाढ़ संबंध है अतः सभी प्रशिक्षकों को शिक्षा में वर्णित उच्चारण स्थान का अनुकरण करते हुए छात्राओं में संस्कृत भाषा के प्रति निष्ठा उत्पन्न करना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

संस्कृत को व्यवहारिक भाषा के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत संवाद, कथोपकथन, बालगीत, चित्राधारित शिक्षण, खेल गतिविधियों तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन खुशी शर्मा ने किया। प्रारंभ में नमीता दुबे द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई तथा सुनीता कुमारी ने संस्थान गीतिका प्रस्तुत की। अंत में समन्वयक डा.अनिल गौतम ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा रेशम दुबे द्वारा कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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