Shakuntala University: शकुन्तला विवि में लगेंगी ₹1.77 करोड़ की हाईटेक मशीनें… छात्र सीख सकेंगे आधुनिक तकनीक से कृत्रिम अंग बनाना
Shakuntala University: डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (Dr. Shakuntala Mishra National Rehabilitation University) ने दिव्यांगजनों के पुनर्वास और छात्रों के कौशल विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय और इंस्टालिम्ब इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत विश्वविद्यालय में करीब 1.77 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनें, सॉफ्टवेयर और डिजिटल तकनीक स्थापित की जाएगी।
इसकी मदद से विद्यार्थी आधुनिक तकनीक से कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) और सहायक उपकरण (ऑर्थोटिक्स) तैयार करना सीख सकेंगे। यह पहल संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के ग्लोबल साउथ के सहयोग से संचालित हो रही है।
कुलपति आचार्य संजय सिंह ने बताया कि समझौते के तहत विश्वविद्यालय को दो हाई-स्पीड 3डी प्रिंटर, पांच 3डी स्कैनर, दो लैपटॉप और इंस्टालिम्ब वन सॉफ्टवेयर उपलब्ध जाना है। विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों को 3डी स्कैनिंग, एआई आधारित डिजाइन, डिजिटल मॉडलिंग और 3डी प्रिंटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
विवि की ओर से कुलसचिव रोहित सिंह और इंस्टालिम्ब इंडिया की ओर से निदेशक उत्कृष्ट आहूजा ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
नई तकनीक से कृत्रिम अंग पहले की तुलना में कम समय में तैयार होंगे और उनकी फिटिंग अधिक सटीक होगी। इससे दिव्यांगजनों को अधिक आरामदायक और गुणवत्तापूर्ण कृत्रिम अंग मिल सकेंगे। परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय हर महीने 30 से 40 लाभार्थियों को डिजिटल तकनीक से तैयार कृत्रिम अंग उपलब्ध करा सकेगा। एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में अधिष्ठाता प्रो. वीके सिंह, एमओयू समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा, कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र के कार्यशाला प्रबंधक डॉ. रंजीत कुमार अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
नई पहचान बनाएगा विश्वविद्यालय
इस खास मौके पर कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगी। इससे विश्वविद्यालय डिजिटल प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
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