Sawan Putrada Ekadashi: सावन की पुत्रदा एकादशी पर करें ये काम घर में नहीं होगा झगड़ा…पढ़ें कथा

August 22, 2026 by No Comments

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Sawan Putrada Ekadashi katha: श्रावण (सावन) मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा अथवा पवित्रा एकादशी कहा जाता है. शास्त्रों में इस एकादशी का महान पुण्य बताया गया है क्योंकि ये सावन के माह में पड़ती है. मान्यता है कि सावन के इस पवित्र महीने में इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करने से संतान की इच्छा रखने वालों की मनोकामना पूरी होती है।

आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि अगर इस दिन दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें तो घर में होने वाले झगड़ों से निजात मिलती है। संतान की इच्छा रखने वालों को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। पूरे मन और एकाग्रता से किए गए इस व्रत से संतान की प्राप्ति होती है। इसके लिए आपको संकल्प कर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना होगा, लेकिन इसके लिए कुछ सावधानी भी बरतनी होगी।

पुत्रदा एकादशी व्रत में ये बरतें सावधानी

मान्यता है कि एकादशी का व्रत पाप और रोगों का करता है। वृद्ध, बालक और रोगी को एकादशी का व्रत नही रखना चाहिये उनको चावल का त्याग करना चाहिए। अगर संतान प्राप्ति के उद्देश्य से ये व्रत कर रहे हैं तो सारा दिन व्रत रखकर भजन-कीर्तन करें। विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर उनका आशिर्वाद प्राप्त करें। इस दौरान मन में अनुष्ठान के प्रति पूरी निष्ठा और एकाग्रता जरूर रखें। पूरे दिन भगवान का भजन-कीर्तन करें। रात में भगवान की मूर्ती के पास हो सोएं।

एक एकादशी व्रत का ये मिलता है पुण्य

सूर्यग्रहण में दान करने से कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से मिलता है। जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से मिलता है। एकादशी व्रत करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं। इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। धन-धान्य के साथ संतान की वृद्धि होती है। कीर्ति-वैभव बढ़ता है।

सावन पुत्रदा एकादशी की कथा

प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में महीजित नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था. वह बहुत ही शांतिप्रिय, ज्ञानी और दानी था. सभी तरह का सुख-वैभव होने पर भी राजा संतान न होने से बहुत ही दुखी था.

एक दिन राजा ने अपने राज्य के सभी ऋषि-मुनियों, संन्यासियों और विद्वानों को बुलाकर संतान प्राप्ति का उपाय पूछा. उन ऋषियों में परम ज्ञानी लोमश ऋषि ने कहा- राजन आपने पिछले जन्म में सावन मास की एकादशी को अपने तालाब में जल पीती हुई गाय को हटा दिया था. तभी तुम्हें श्राप लगा था और इसी वजह से तुम संतान सुख से वंचित रह गए हो.

इसका उपाय ये है कि यदि तुम अपनी पत्नी के साथ पुत्रदा एकादशी को भगवान जनार्दन का भक्तिपूर्वक पूजन-अर्चन और व्रत करो तो तुम्हारा श्राप दूर हो जाएगा और तुम्हें अवश्य ही संतान की प्राप्ति होगी.

यह सुनकर व ऋषि की आज्ञा मानकर राजा ने पत्नी के साथ मिलकर पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा और इसका प्रभाव ऐसा हुआ कि रानी ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया. इससे राजा की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा. इसके बाद वह हमेशा इस व्रत को करने लगे और इस व्रत का प्रचार-प्रसार भी किया. तभी से ये व्रत प्रचलित हो गया.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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